Caller Name Presentation
संदर्भ:
भारत सरकार ने अक्टूबर 2025 में टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) की सिफारिश के आधार पर कॉलर नेम प्रेजेंटेशन (CNAP) सिस्टम को मंजूरी दी। इस प्रणाली के लागू होने के बाद मार्च 2026 तक अधिकांश भारतीय उपयोगकर्ताओं को फोन कॉल पर सत्यापित कॉलर नाम दिखाई देने लगेगा।
कॉलर नेम प्रेजेंटेशन (CNAP) क्या है?
- परिचय: CNAP एक तकनीकी प्रणाली है, जो मोबाइल उपयोगकर्ताओं को इनकमिंग कॉल पर कॉलर का नाम देखने की सुविधा प्रदान करती है। यह प्रणाली तीसरे पक्ष के ऐप्स (जैसे Truecaller) पर निर्भर नहीं है। इसके बजाय यह नाम टेलीकॉम ऑपरेटर के KYC-verified डेटाबेस से प्राप्त किया जाता है, जिससे डेटा अधिक विश्वसनीय और धोखाधड़ी-रोधी बनता है।
- उद्देश्य: CNAP का मुख्य उद्देश्य ग्राहकों को अनजान या स्पैम कॉल से सुरक्षा प्रदान करना है। इसके माध्यम से उपयोगकर्ता कॉल का निर्णय सुरक्षित और भरोसेमंद आधार पर ले सकते हैं। यह प्रणाली धोखाधड़ी और टेलीमार्केटिंग द्वारा उत्पन्न परेशानी को काफी हद तक कम करने में मदद करेगी।
- कार्यप्रणाली: हर टेलीकॉम ऑपरेटर अपने ग्राहकों के KYC-पंजीकृत नाम और मोबाइल नंबर का डेटाबेस बनाए रखेगा। जब कोई कॉल की जाएगी, तो सिस्टम कॉलर का नाम प्राप्त करके रिसीवर के स्क्रीन पर दिखाएगा। प्रारंभ में, यह सुविधा सिर्फ उसी नेटवर्क के भीतर कार्य करेगी। क्रॉस ऑपरेटर कॉल (जैसे Jio-to-Vodafone) के लिए डेटा शेयरिंग हेतु नियामक अनुमोदन आवश्यक होगा।
- गोपनीयता: CNAP को डिफ़ॉल्ट रूप से ऑन किया जाएगा। हालांकि, उपयोगकर्ताओं को CLIR (Calling Line Identification Restriction) फीचर के माध्यम से अपनी जानकारी छिपाने का विकल्प दिया गया है।
- कानूनी पहलू: CNAP के तहत ऑपरेटरों की जिम्मेदारी बढ़ती है कि वे डेटा को अद्यतन, सुरक्षित और अनुमोदित परिस्थितियों में ही उपयोग करें।
CNAP लागू करने की योजना:
CNAP की रोलआउट प्रक्रिया चरणबद्ध होगी, पहले 4G और 5G नेटवर्क में और बाद में पुराने नेटवर्क में विस्तार किया जाएगा। नए मोबाइल उपकरणों को CNAP-सक्षम होना आवश्यक होगा। यह प्रक्रिया टेलीकॉम इकोसिस्टम को भविष्य के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद बनाएगी।

