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CE-20 क्रायोजेनिक इंजन का सफल परीक्षण (CE-20 cryogenic engine successfully tested) | Ankit Avasthi Sir

CE-20 cryogenic engine successfully tested

CE-20 cryogenic engine successfully tested

संदर्भ:

हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने तमिलनाडु के महेंद्रगिरि स्थित इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स (IPRC) में स्वदेशी CE-20 क्रायोजेनिक इंजन का सफलतापूर्वक समुद्र-स्तरीय तप्त परीक्षण संपन्न किया। यह परीक्षण 22 टन के उन्नत थ्रस्ट स्तर पर किया गया, जो भारत के भारी प्रक्षेपण यान LVM-3 की पेलोड क्षमता को बढ़ाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

परीक्षण के मुख्य बिंदु:

  • तिथि और स्थान: 10 मार्च, 2026 को महेंद्रगिरि के ISRO Propulsion Complex (IPRC) में संपन्न हुआ।
  • अवधि: इंजन का परीक्षण 165 सेकंड तक किया गया।
  • थ्रस्ट क्षमता: परीक्षण के दौरान इंजन ने 22 टन का थ्रस्ट उत्पन्न किया। 
  • तकनीकी नवाचार: इस परीक्षण में पूर्ण-क्षेत्र नोजल के साथ एक नई नोजल सुरक्षा प्रणाली (NPS) और मल्टी-एलिमेंट इग्नाइटर का उपयोग किया गया।

CE-20 क्रायोजेनिक इंजन: 

  • परिचय: CE-20 (Cryogenic Engine-20) भारत का पहला स्वदेशी गैस-जेनरेटर चक्र (Gas-generator cycle) पर आधारित क्रायोजेनिक इंजन है। इसमें ‘क्रायोजेनिक’ तकनीक का उपयोग किया गया है, जिसमें अत्यधिक कम तापमान पर तरल गैसों को ईंधन और ऑक्सीडाइज़र के रूप में जलाकर भारी पेलोड के लिए आवश्यक थ्रस्ट (प्रणोद) उत्पन्न किया जाता है।
  • निर्माता: इसका विकास लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम सेंटर (LPSC) द्वारा किया गया है, जो इसरो (ISRO) की एक प्रमुख इकाई है। इसका निर्माण और परीक्षण इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स (IPRC), महेंद्रगिरि में किया जाता है।
  • विशेषताएं:
    • ईंधन: तरल हाइड्रोजन (LH2) -253°C पर।
    • ऑक्सीडाइज़र: तरल ऑक्सीजन (LOX) -183°C पर।
    • थ्रस्ट क्षमता: यह इंजन 19 टन से लेकर 22 टन तक का वैक्यूम थ्रस्ट उत्पन्न करने में सक्षम है।
    • विशिष्ट आवेग (Specific Impulse): लगभग 443 सेकंड (वैक्यूम में), जो इसे उच्च दक्षता प्रदान करता है।
    • 3D प्रिंटिंग: इंजन के प्रमुख घटकों जैसे टर्बाइन एग्जॉस्ट केसिंग में आधुनिक 3D प्रिंटिंग तकनीक का प्रयोग किया गया है।
  • कार्यप्रणाली: CE-20 इंजन गैस-जेनरेटर चक्र पर कार्य करता है। इसमें एक छोटा हिस्सा ईंधन और ऑक्सीडाइज़र का उपयोग करके टर्बाइन को घुमाया जाता है, जो मुख्य पंपों को शक्ति देता है। ये पंप भारी मात्रा में LH2 और LOX को दहन कक्ष (Combustion Chamber) में भेजते हैं। यहाँ तीव्र दहन से उच्च दबाव वाली गैसें निकलती हैं, जो नोजल के माध्यम से बाहर निकलकर रॉकेट को ऊपर धकेलती हैं।

महत्व:

  • रणनीतिक: यह भारत को उन चुनिंदा देशों (अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, जापान) की श्रेणी में रखता है जिनके पास जटिल क्रायोजेनिक तकनीक है।
  • आर्थिक: भारी उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए अब भारत को अन्य देशों (जैसे एरियनस्पेस) को भुगतान नहीं करना पड़ता, जिससे करोड़ों की विदेशी मुद्रा बचती है।
  • भविष्य के मिशन: यह चंद्रयान-3 जैसे मिशनों की सफलता का आधार रहा है और भविष्य के ‘भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन’ के निर्माण में मुख्य भूमिका निभाएगा।
  • गगनयान मिशन: CE-20 इंजन को पहले ही ‘ह्यूमन रेटिंग’ (मानव उपयोग के लिए सुरक्षित) प्राप्त हो चुकी है। 22 टन थ्रस्ट वाला यह उन्नत संस्करण चालक दल के साथ भविष्य के अधिक जटिल मिशनों को शक्ति देगा।

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