Central bank digital currency based public distribution system
संदर्भ:
हाल ही में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने देश की पहली केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC-R) आधारित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का शुभारंभ किया।
केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा आधारित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के बारे मे:
- परिचय: यह एक आधुनिक प्रणाली है जहाँ सरकारी राशन की सब्सिडी ‘डिजिटल रुपया’ (e-Rupee) के रूप में सीधे लाभार्थी के मोबाइल वॉलेट में भेजी जाती है।
- परियोजना का नाम: ‘सुगम ई-रुपया वितरण पहल’ (Sugam e-Rupee Distribution Initiative)।
- प्रमुख उद्देश्य: राशन वितरण में होने वाले ‘लीकेज’ (Leakage) को खत्म करना, बिचौलियों को हटाना और लाभार्थियों को वित्तीय रूप से सशक्त बनाना।
- एकीकरण: यह प्रणाली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी डिजिटल रुपया (e₹) और खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग की PDS प्रणाली का एक सफल एकीकरण है।
- प्रथम चरण: इसे प्रायोगिक तौर पर वाराणसी (उत्तर प्रदेश) और अहमदाबाद (गुजरात) में लॉन्च किया गया है।
- तकनीकी सहयोग: इस प्रणाली को पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के सहयोग से विकसित किया गया है।
- सत्यापन प्रक्रिया: स्मार्टफोन उपयोगकर्ता QR कोड के माध्यम से और फीचर फोन उपयोगकर्ता आधार-आधारित OTP प्रणाली के माध्यम से लेनदेन कर सकेंगे।
- ब्लॉकचेन तकनीक: यह प्रणाली आरबीआई की सुरक्षित ब्लॉकचेन और डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी (DLT) पर आधारित है, जो इसे हैकिंग और जालसाजी से सुरक्षित बनाती है।
यह प्रणाली कैसे काम करती है?
- डिजिटल वॉलेट आवंटन: प्रत्येक पात्र लाभार्थी के ‘ई-रुपया’ वॉलेट में सरकार द्वारा सब्सिडी की राशि या विशिष्ट ‘प्रोग्रामेबल टोकन’ भेजे जाते हैं।
- प्रोग्रामेबिलिटी (Special Feature): इन डिजिटल रुपयों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इन्हें ‘प्रोग्राम’ किया गया है। यानी, यह पैसा केवल ‘उचित मूल्य की दुकानों’ (FPS) पर अनाज खरीदने के लिए ही इस्तेमाल किया जा सकता है।
- ऑफलाइन लेनदेन: इंटरनेट की कमी वाले क्षेत्रों के लिए इसे ‘ऑफलाइन डिजिटल वाउचर’ (e-RUPI आधारित) के माध्यम से भी संचालित किया जा सकता है।
- त्वरित निपटान (Instant Settlement): जैसे ही लाभार्थी क्यूआर कोड या एसएमएस के जरिए भुगतान करता है, राशन दुकानदार के खाते में तुरंत पैसा जमा हो जाता है, जिससे दुकानदार की कार्यशील पूंजी की समस्या हल हो जाती है।
प्रमुख लाभ:
- भ्रष्टाचार पर अंकुश: वर्तमान प्रणाली में ‘बोगस’ लाभार्थियों या अनाज की कालाबाजारी की समस्या रहती है। CBDC प्रणाली में पैसा सीधे लाभार्थी के डिजिटल वॉलेट में जाता है, जिसे किसी अन्य उद्देश्य के लिए खर्च नहीं किया जा सकता।
- वित्तीय समावेशन: यह करोड़ों ग्रामीण नागरिकों को औपचारिक बैंकिंग और डिजिटल मुद्रा इकोसिस्टम से जोड़ता है। इसके लिए लाभार्थी को बैंक खाते की भी आवश्यकता नहीं है।
- राजकोषीय दक्षता: सरकार को नकद प्रबंधन और छपाई की लागत में बचत होगी। साथ ही, सब्सिडी का वितरण अधिक लक्षित (Targeted) होगा, जिससे सरकारी खजाने पर अनावश्यक बोझ कम होगा।

