Chakravarti Rajagopalachari first Indian Governor-General

संदर्भ:
हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन में चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (राजाजी) की प्रतिमा का अनावरण किया। यह प्रतिमा राष्ट्रपति भवन के अशोक मंडप के पास ‘ग्रैंड ओपन स्टेयरकेस’ पर स्थापित की गई है, जो महात्मा गांधी की प्रतिमा के ठीक सामने है।
चक्रवर्ती राजगोपालाचारी के बारे में:
- परिचय: चक्रवर्ती राजगोपालाचारी, जिन्हें ‘राजाजी’ के नाम से भी जाना जाता है, एक प्रखर राजनेता, स्वतंत्रता सेनानी, वकील और महान लेखक थे। महात्मा गांधी ने उन्हें अपनी “अंतरात्मा का रक्षक” (Conscience Keeper) कहा था।
- जन्म: राजाजी का जन्म 10 दिसंबर 1878 को मद्रास प्रेसिडेंसी (वर्तमान तमिलनाडु) के कृष्णागिरी जिले के थोरपल्ली गाँव में हुआ था।
- शिक्षा: उनकी प्रारंभिक शिक्षा होसुर में हुई, जिसके बाद उन्होंने सेंट्रल कॉलेज, बैंगलोर से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। इसके पश्चात, उन्होंने प्रेसिडेंसी कॉलेज, मद्रास से कानून (Law) की पढ़ाई पूरी की।
- प्रथम भारतीय गवर्नर-जनरल: वे लॉर्ड माउंटबेटन के बाद भारत के अंतिम और एकमात्र भारतीय गवर्नर-जनरल (1948-1950) बने।
- मद्रास के मुख्यमंत्री: उन्होंने 1937-1939 (प्रीमियर) और पुनः 1952-1954 के दौरान मद्रास प्रांत का नेतृत्व किया।
- केंद्रीय भूमिका: उन्होंने स्वतंत्र भारत के गृह मंत्री और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में भी सेवाएँ दीं।
- गांधीजी के ‘विवेक रक्षक’: गांधीजी उन्हें अपना ‘कॉन्शियस कीपर’ मानते थे। उन्होंने असहयोग आंदोलन और नमक सत्याग्रह (वेदारण्यम मार्च) का नेतृत्व किया।
- CR फॉर्मूला (1944): मुस्लिम लीग और कांग्रेस के बीच गतिरोध को सुलझाने के लिए उन्होंने एक योजना प्रस्तुत की, जो अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान की मांग को स्वीकार करने की ओर एक कदम थी, ताकि स्वतंत्रता की राह आसान हो सके।
- सामाजिक सुधार: 1939 में उन्होंने मद्रास में ‘मंदिर प्रवेश प्राधिकरण और क्षतिपूर्ति अधिनियम’ पारित कर दलितों को मंदिर में प्रवेश का अधिकार दिलाया।
- आर्थिक विचार: वे ‘लाइसेंस-परमिट राज’ के सख्त विरोधी थे। उन्होंने मुक्त बाजार अर्थव्यवस्था की वकालत की।
- स्वतंत्र पार्टी (1959): कांग्रेस की समाजवादी नीतियों (विशेषकर नागपुर प्रस्ताव) के विरोध में उन्होंने स्वतंत्र पार्टी की स्थापना की।
- साहित्य अकादमी: रामायण के उनके तमिल अनुवाद ‘चक्रवर्ती थिरुमगन’ के लिए उन्हें यह सम्मान मिला।
- भारत रत्न: 1954 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा गया।
