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झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of Jharkhand High Court) | Apni Pathshala

Chief Justice of Jharkhand High Court

Chief Justice of Jharkhand High Court

संदर्भ:

हाल ही में केंद्र सरकार ने झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति महेश शरदचंद्र सोनाक की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। न्यायमूर्ति सोनाक वर्तमान में बॉम्बे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हैं, वे 8 जनवरी 2026 को पदभार ग्रहण करेंगे।

उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति:

भारत के उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति भारतीय संवैधानिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

  • संवैधानिक प्रावधान: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 217 में उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों (मुख्य न्यायाधीश सहित) की नियुक्ति का प्रावधान है।
  • नियुक्ति प्राधिकारी: उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। राष्ट्रपति, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और संबंधित राज्य के राज्यपाल से परामर्श करने के बाद यह नियुक्ति करते हैं। 
  • कॉलेजियम प्रणाली: उच्च न्यायपालिका में नियुक्तियों के लिए ‘कॉलेजियम प्रणाली’ का पालन किया जाता है, जो ‘थ्री जजेज केसेज’ (Three Judges Cases) के माध्यम से विकसित हुई है।
  • केंद्र सरकार की भूमिका: केंद्रीय कानून मंत्री कॉलेजियम की सिफारिशों को प्रधानमंत्री को भेजते हैं, जो राष्ट्रपति को सलाह देते हैं।
  • प्रक्रिया: उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति के लिए प्रस्ताव भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा भेजा जाता है। इस प्रणाली में CJI सर्वोच्च न्यायालय के दो वरिष्ठतम न्यायाधीशों के कॉलेजियम से परामर्श करते हैं। नियुक्तियों की प्रक्रिया को सरकार और न्यायपालिका के बीच सहमत ‘मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर’ द्वारा विनियमित किया जाता है। 
  • पात्रता और योग्यता: अनुच्छेद 217(2) के अनुसार, किसी व्यक्ति को उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए निम्नलिखित योग्यताएं आवश्यक हैं: वह भारत का नागरिक हो, भारत के राज्य क्षेत्र में कम से कम 10 वर्ष तक न्यायिक पद पर रहा हो, अथवा कम से कम 10 वर्ष तक किसी उच्च न्यायालय में अधिवक्ता (Advocate) रहा हो। 
  • स्थानांतरण: उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति में ‘बाहरी व्यक्ति नीति’ (Outside Judge Policy) का पालन किया जाता है। इसके तहत, किसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश सामान्यतः उस राज्य से नहीं होता जहाँ वह नियुक्त किया जा रहा है। 
  • कार्यकाल और पदमुक्ति: उच्च न्यायालय के न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु तक पद पर बने रहते हैं। वे राष्ट्रपति को अपना त्यागपत्र सौंप सकते हैं।
  • हटाने की प्रक्रिया: अनुच्छेद 124(4) के तहत केवल ‘सिद्ध कदाचार’ या ‘अक्षमता’ के आधार पर संसद के विशेष बहुमत द्वारा पारित प्रस्ताव के बाद राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता है।
  • शपथ: राज्यपाल या उनके द्वारा नियुक्त व्यक्ति द्वारा दिलाई जाती है (अनुच्छेद 219)।
  • वेतन और भत्ते: राज्य की संचित निधि (Consolidated Fund of State) से दिए जाते हैं, लेकिन पेंशन भारत की संचित निधि से दी जाती है।
  • विशेष: वर्तमान में भारत में 25 उच्च न्यायालय हैं।

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