Apni Pathshala

भारत के कोयला क्षेत्र में सुधार हेतु कोलसेतु नीति (CoalSETU) | UPSC

CoalSETU

CoalSETU

संदर्भ:

हाल ही में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने कोलसेतु नीति को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य घरेलू कोयले के न्यायसंगत आवंटन, इष्टतम उपयोग, और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना है।

कोलसेतु  (CoalSETU) नीति:
  • कोलसेतु (CoalSETU) भारत सरकार के कोयला मंत्रालय की एक नई नीतिगत पहल है, जिसे घरेलू कोयला संसाधनों के निर्बाध, कुशल और पारदर्शी उपयोग (Seamless, Efficient & Transparent Utilisation) के लिए एक नीलामी-आधारित प्रणाली बनाने हेतु अनुमोदित किया गया है। 
  • यह एक नई ‘विंडो’ या उप-क्षेत्र है जिसे 2016 की गैर-विनियमित क्षेत्र (Non-Regulated Sector – NRS) लिंकेज नीलामी नीति में जोड़ा गया है। 
  • यह नीति “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने और आयातित कोयले पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से शुरू की गई है।  
  • भारत ने वर्ष 2020 से कोयला क्षेत्र में बड़े सुधार किए हैं, जिनमें व्यावसायिक खनन और अंत-उपयोग प्रतिबंधों को हटाना शामिल है। इसके बावजूद गैर-नियंत्रित क्षेत्रों में कोयला आपूर्ति की सीमाएँ बनी हुई थीं। कोलसेतु नीति इसी कमी को दूर करने के लिए लाई गई है।
  • भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा कोयला उपभोक्ता है, फिर भी कुछ औद्योगिक क्षेत्रों में आयात पर निर्भरता बनी हुई है। यह नीति घरेलू कोयले की उपलब्धता बढ़ाकर विदेशी मुद्रा बचत में सहायक होगी।

कोलसेतु नीति के प्रमुख प्रावधान:

    • नई नीलामी विंडो: कोलसेतु नीति के तहत 2016 की गैर-नियंत्रित क्षेत्र लिंकेज नीलामी नीति में एक नई खिड़की जोड़ी गई है, जिसे कोलसेतु विंडो कहा गया है। इसके माध्यम से दीर्घकालिक आधार पर कोयला लिंकेज की नीलामी की जाएगी।

    • अंत-उपयोग की स्वतंत्रता: इस नीति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि कोयले के उपयोग पर कोई क्षेत्रीय प्रतिबंध नहीं होगा। कोई भी घरेलू औद्योगिक उपभोक्ता, चाहे उसका अंतिम उपयोग कुछ भी हो, नीलामी में भाग ले सकता है।

  • लचीला उपयोग ढांचा: कोलसेतु के अंतर्गत प्राप्त कोयला स्वयं के उपभोग, कोयला धुलाई, समूह कंपनियों के बीच स्थानांतरण के लिए उपयोग किया जा सकता है। हालांकि, देश के भीतर पुनर्विक्रय की अनुमति नहीं होगी

  • निर्यात की अनुमति: लिंकेज धारक अपने आवंटित कोयले का अधिकतम 50 प्रतिशत तक निर्यात कर सकते हैं। यह प्रावधान भारत को कोयला आधारित मूल्यवर्धित उत्पादों के निर्यातक के रूप में उभारने में सहायक होगा।

  • पात्रता और प्रतिबंध: कोई भी घरेलू औद्योगिक उपभोक्ता, कोयले की वास्तविक आवश्यकता रखने वाली इकाइयाँ इसके पात्र है। व्यापारी या सट्टेबाज नीलामी में भाग नहीं ले सकते। साथ हीं कोकिंग कोयला इस नीति के अंतर्गत शामिल नहीं है।

आर्थिक और औद्योगिक महत्व:

  • औद्योगिक विकास को बढ़ावा: दीर्घकालिक और सुनिश्चित कोयला आपूर्ति से इस्पात, सीमेंट, एल्युमिनियम, ऊर्जा और विनिर्माण क्षेत्र को स्थिरता मिलेगी।

  • कोयला धुलाई उद्योग को प्रोत्साहन: नीति से निजी कोयला धुलाई संयंत्रों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्वच्छ और अधिक दक्ष कोयले की उपलब्धता बढ़ेगी।

Share Now ➤

क्या आपको Apni Pathshala के Courses, RNA PDF, Current Affairs, Test Series और Books से सम्बंधित कोई जानकारी चाहिए? तो हमारी विशेषज्ञ काउंसलर टीम आपकी सिर्फ समस्याओं के समाधान में ही मदद नहीं करेगीं, बल्कि आपको व्यक्तिगत अध्ययन योजना बनाने, समय का प्रबंधन करने और परीक्षा के तनाव को कम करने में भी मार्गदर्शन देगी।

Apni Pathshala के साथ अपनी तैयारी को मजबूत बनाएं और अपने सपनों को साकार करें। आज ही हमारी विशेषज्ञ टीम से संपर्क करें और अपनी सफलता की यात्रा शुरू करें

📞 +91 7878158882

Related Posts

Scroll to Top