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आक्रामक प्रजातियों से निपटने की लागत (Cost of Dealing with Invasive Species) | UPSC Preparation

Cost of Dealing with Invasive Species

Cost of Dealing with Invasive Species

संदर्भ:

नेचर इकोलॉजी एंड इवोल्यूशन में प्रकाशित हालिया अध्ययन के अनुसार, 1960 से अब तक आक्रामक गैरदेशी पौधों और जानवरों ने वैश्विक स्तर पर 2.2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का नुकसान पहुंचाया है, और वास्तविक लागत पहले के अनुमानों से 16 गुना अधिक होने की संभावना जताई गई है।

आक्रामक विदेशी प्रजातियाँ (Invasive Alien Species – IAS):

परिभाषा: आक्रामक प्रजातियाँ वे गैर-स्थानीय (non-native) वनस्पति और जीव हैं, जो स्थानीय पारिस्थितिक तंत्र (ecosystem), अर्थव्यवस्था या मानव स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाती हैं।

वैश्विक प्रभाव:

  • सबसे ज़्यादा हानिकारक आक्रामक प्रजातियाँ पौधे रहे, जिनसे लगभग $926.38 अरब का नुकसान हुआ।
  • इनके बाद क्रमशः:
    • आर्थ्रोपोड्स (Arthropods): $830.29 अरब
    • स्तनधारी (Mammals): $263.35 अरब
  • शोधकर्ताओं के अनुसार, व्यापार (Trade) और यात्रा (Travel) इनके फैलाव के मुख्य साधन हैं।

भारत में आक्रामक प्रजातियाँ:

  • MoEFCC (पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय) ने भारत में 154 से अधिक आक्रामक जीव प्रजातियों को मान्यता दी है, जो स्थलीय (terrestrial), मीठे पानी (freshwater) और समुद्री (marine) पारिस्थितिकी तंत्र में फैली हैं।
  • पौधों में लैंटाना (Lantana camara) और सेना स्पेक्टाबिलिस (Senna spectabilis) ने पश्चिमी घाट (Western Ghats) के बड़े हिस्सों पर कब्जा कर लिया है।
  • विशेषकर, लैंटाना (Lantana camara) ने अकेले भारत के 40% बाघ आवास (Tiger habitats) पर कब्जा कर लिया है, जिससे शिकार की उपलब्धता घट रही है और जंगलों की संरचना बदल रही है।

उदाहरण:

  • जापानी नॉटवीड (Japanese knotweed – Reynoutria japonica)
  • कॉमन लैंटाना (Common lantana – Lantana camara)

वैश्विक नीति प्रतिक्रियाएँ:

कई अंतरराष्ट्रीय समझौते जैविक आक्रमण (biological invasions) को रोकने का प्रयास करते हैं:

  • Ballast Water Management Convention: जहाजों के माध्यम से जलीय प्रजातियों के प्रसार को रोकता है।
  • Convention on Biological Diversity: देशों को उन विदेशी प्रजातियों (alien species) को रोकने, नियंत्रित करने या समाप्त करने के लिए बाध्य करता है, जो पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरा हैं।

भारत के प्रयास: जैविक आक्रमण पर नियंत्रण

भारत ने कई पहलें की हैं, जिनमें प्रमुख हैं:

राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्ययोजना (NBSAP)

  • यहKunming-Montreal Global Biodiversity Framework के अनुरूप है।
  • आक्रामक प्रजातियों के प्रबंधन को एक मुख्य प्राथमिकता बनाया गया है।
  • यहWhole-of-Government और Whole-of-Society दृष्टिकोण अपनाता है, जिसमें कई मंत्रालयों और हितधारकों की भागीदारी होती है।
  • मुख्य बिंदु:
    • क्षतिग्रस्त पारिस्थितिक तंत्र का पुनर्स्थापन
    • स्थलीय और समुद्री क्षेत्रों की सुरक्षा
    • प्रदूषण नियंत्रण और आक्रामक प्रजातियों का निवारण
    • जैव विविधता शासन में समुदाय की भागीदारी

वैज्ञानिक अनुसंधान और प्रलेखन (Scientific Research and Documentation): Indian Council of Forestry Research and Education (ICFRE) ने आक्रामक प्रजातियों पर एक व्यापक Handbook on Invasive Species प्रकाशित किया।

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