Critical Mineral Recycling Incentive Scheme
संदर्भ:
हाल ही में राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन के तहत शुरू की गई ₹1,500 करोड़ की क्रिटिकल मिनरल रीसाइक्लिंग इंसेंटिव स्कीम को उद्योग जगत से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। यह योजना भारत में महत्वपूर्ण खनिजों के पुनर्चक्रण और आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
क्रिटिकल मिनरल रीसाइक्लिंग प्रोत्साहन योजना:
- क्या है यह योजना?
- यह खनन मंत्रालय के तहत केंद्रीय प्रायोजित योजना है।
- इसका उद्देश्य ई-वेस्ट (e-waste) और उपयोग की गई लिथियम-आयन बैटरियों जैसे द्वितीयक स्रोतों से महत्वपूर्ण खनिजों का पुनर्चक्रण बढ़ावा देना है।
- मुख्य योजना: राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन
- उद्देश्य:
- इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरियों, इलेक्ट्रॉनिक्स और नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों में उपयोग होने वाले महत्वपूर्ण खनिजों के आयात पर निर्भरता कम करना।
- कचरे से खनिज पुनः प्राप्त कर सर्कुलर इकॉनमी को प्रोत्साहित करना।
- प्रमुख विशेषताएँ:
- वित्तीय प्रावधान: ₹1,500 करोड़ का कुल प्रोत्साहन आवंटन।
- पात्रता: नए संयंत्र, क्षमता विस्तार, और मौजूदा रीसाइक्लिंग इकाइयों के आधुनिकीकरण को कवर करता है।
- फीडस्टॉक स्रोत: ई-वेस्ट, उपयोग की गई लिथियम-आयन बैटरियाँ और धातुयुक्त अपशिष्ट।
- लाभार्थी:
- बड़े रीसाइक्लर — अधिकतम ₹50 करोड़ सहायता।
- स्टार्ट-अप्स — अधिकतम ₹25 करोड़ सहायता।
- फोकस क्षेत्र: केवल खनिजों के वास्तविक निष्कर्षण (actual extraction) चरण पर प्रोत्साहन मिलेगा, ब्लैक मास उत्पादन चरण पर नहीं।
- संभावित परिणाम:
- रीसाइक्लिंग क्षमता: 270 किलो टन प्रति वर्ष।
- खनिज उत्पादन: 40 किलो टन प्रति वर्ष।
- निजी निवेश: ₹8,000 करोड़ आकर्षित होंगे।
- रोजगार सृजन: 70,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियाँ।
- महत्व:
- रणनीतिक आत्मनिर्भरता: चीन और अन्य देशों पर निर्भरता कम करेगा।
- सतत विकास: संसाधनों के पुनः उपयोग को बढ़ावा देगा और भारत की LiFE पहल के अनुरूप कार्य करेगा।
क्रिटिकल मिनरल रीसाइक्लिंग की आवश्यकता
- स्वच्छ ऊर्जा की बढ़ती मांग
- EVs, सोलर और इलेक्ट्रॉनिक्स के बढ़ते उपयोग से लिथियम, कोबाल्ट, निकेल, कॉपर, रेयर अर्थ जैसे खनिजों की मांग तेज़ी से बढ़ी।
- रीसाइक्लिंग से घरेलू मांग पूरी होती है और खनन पर दबाव घटता है।
- आयात निर्भरता और आपूर्ति जोखिम
- भारत अधिकांश क्रिटिकल मिनरल्स आयात करता है, जिससे कीमत और आपूर्ति में जोखिम रहता है।
- रीसाइक्लिंग से ई–वेस्ट और बैटरी अपशिष्ट से धातुएँ पुनः प्राप्त कर सुरक्षा बढ़ती है।
- सीमित खनिज भंडार: भारत मेंलिथियम, कोबाल्ट, ग्रेफाइटजैसे खनिज सीमित हैं, इसलिए रीसाइक्लिंग से स्थायी आपूर्ति सुनिश्चित होती है।
- बढ़ता ई–वेस्ट: हर साल लगभग1.75 मिलियन टन ई-वेस्टऔर 60 किलो टन बैटरी अपशिष्ट बनता है, जिसमें मूल्यवान धातुएँ होती हैं।
- पर्यावरणीय लाभ: रीसाइक्लिंग सेकम कार्बन और जल उपयोगहोता है।
- यह नेट ज़ीरो और LiFE मिशन के लक्ष्यों को समर्थन देता है।
- सर्कुलर इकॉनमी को बढ़ावा: “उपयोग और फेंको” मॉडल की जगहपुनः उपयोग और रीसाइक्लिंगको प्रोत्साहन मिलता है।
- नीति और तकनीकी प्रोत्साहन
- EPR नियमों का पालन और वैश्विक स्थिरता मानकों के अनुरूप कदम।
- नई तकनीक व R&D को बढ़ावा मिलता है।

