Apni Pathshala

CO₂ लेजर: रेडियोधर्मी पदार्थ का पता लगाने की नई तकनीक

संदर्भ:

CO₂ लेजर: अमेरिका ने कार्बन-डाइऑक्साइड लेज़रों का उपयोग करके दूर से रेडियोधर्मी पदार्थों का पता लगाने की नई तकनीक का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया है। यह नवाचार राष्ट्रीय रक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया में तेज़ और सटीक पहचान की संभावनाएं बढ़ा सकता है।

कार्बन डाइऑक्साइड – CO लेजर के बारे में:

  • CO लेजर का पहला विकास भारतीय-अमेरिकी वैज्ञानिक प्रो. C.K.N. पटेल ने किया था।
  • मुख्य विशेषताएँ:
    • चार-स्तरीय आणविक गैस लेजर(Four-Level Molecular Gas Laser) जो CO अणुओं के कंपन ऊर्जा स्तरों पर कार्य करता है।
    • अत्यधिक कुशल, उच्च-शक्ति (High-Power) निरंतर (Continuous) या स्पंदित (Pulsed) आउटपुट प्रदान करता है।

संरचना (Structure):

  • CO₂ अणु एक कार्बन परमाणु मध्य में और दो ऑक्सीजन परमाणु दोनों ओर होते हैं।
  • यह तीन स्वतंत्र कंपन विधियों (Vibrational Modes) में कंपन करता है:
    1. समान्तर प्रसार मोड: ऑक्सीजन परमाणु एकसाथ कार्बन परमाणु की ओर या उससे दूर गति करते हैं।
    2. झुकाव मोड (Bending Mode): कार्बन और ऑक्सीजन परमाणु अणु के अक्ष के लंबवत (Perpendicular) कंपन करते हैं।
    3. असमान्तर प्रसार मोड: ऑक्सीजन परमाणु एक दिशा में और कार्बन परमाणु विपरीत दिशा में गति करता है।

CO₂ लेजर का सिद्धांत (Principle):

  • लेजर CO अणुओं के कंपन ऊर्जा स्तरों के बीच संक्रमण (Transition) के माध्यम से कार्य करता है।
  • ऊर्जा उत्तेजित नाइट्रोजन (N) अणुओं से CO अणुओं को स्थानांतरित होती है।
  • यह जनसंख्या उत्क्रमण (Population Inversion) उत्पन्न करता है, जो लेजर क्रिया के लिए आवश्यक है।

लेजर से विकिरण की पहचान:

  • वैज्ञानिकों ने कार्बन-डाइऑक्साइड लेजर का उपयोग करके 10 मीटर दूर स्थित एक रेडियोधर्मी स्रोत (Caesium-137) से निकलने वाले अल्फा कणों का पता लगाया।
  • कार्य प्रणाली:
    • रेडियोधर्मी क्षय (Radioactive Decay):
      • जब रेडियोधर्मी तत्व विघटित होता है, तो यह चार्ज कण (अल्फा, बीटा और गामा विकिरण) छोड़ता है।
      • ये कण वायु के परमाणुओं को आयनित कर देते हैं, जिससे प्लाज्मा (एक विशेष अवस्था) बनता है।
    • हिमस्खलन विघटन (Avalanche Breakdown):
      • नकारात्मक चार्ज (इलेक्ट्रॉन)तेज गति से अन्य परमाणुओं से टकराकर और अधिक इलेक्ट्रॉन मुक्त करते हैं।
      • यह प्रक्रिया हिमस्खलन विघटन कहलाती है।
    • लेजर-आधारित पहचान:
      • कार्बन-डाइऑक्साइड लेजर से लंबी तरंग दैर्ध्य (Long-wave infrared radiation) उत्सर्जित होती है।
      • यह इलेक्ट्रॉनों को गति प्रदान करता है, जिससे वे प्रकाश उत्सर्जित करने लगते हैं।
      • लेजर के पास लगे सेंसर इस प्रकाश को पकड़कर अल्फा कणों की पहचान करने में सक्षम होते हैं।

संभावित अनुप्रयोग (Potential Applications)

  1. राष्ट्रीय सुरक्षा: अवैध रूप से रखे गए या तस्करी किए गए रेडियोधर्मी पदार्थों का पता लगाना, विशेष रूप से हवाई अड्डों और सीमाओं पर।
  2. नाभिकीय सुरक्षा: नाभिकीय रिएक्टरों और प्रतिष्ठानों से रेडिएशन रिसाव का पता लगाना।
  3. पर्यावरण निगरानी (Environmental Monitoring): वायु, जल, मृदा, खदानों और अंतरिक्ष में रेडियोधर्मी प्रदूषण की निगरानी करना।
  4. प्राकृतिक रेडियोधर्मी पदार्थों की खोज: खनन और भौगोलिक अनुसंधान में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले रेडियोधर्मी तत्वों की पहचान करना।

Download Today Current Affairs PDF

Share Now ➤

क्या आपको Apni Pathshala के Courses, RNA PDF, Current Affairs, Test Series और Books से सम्बंधित कोई जानकारी चाहिए? तो हमारी विशेषज्ञ काउंसलर टीम आपकी सिर्फ समस्याओं के समाधान में ही मदद नहीं करेगीं, बल्कि आपको व्यक्तिगत अध्ययन योजना बनाने, समय का प्रबंधन करने और परीक्षा के तनाव को कम करने में भी मार्गदर्शन देगी।

Apni Pathshala के साथ अपनी तैयारी को मजबूत बनाएं और अपने सपनों को साकार करें। आज ही हमारी विशेषज्ञ टीम से संपर्क करें और अपनी सफलता की यात्रा शुरू करें

📞 +91 7878158882

Related Posts

Scroll to Top