संदर्भ:
भारत में दुष्प्रचार (Disinformation): वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट 2025 ने भ्रामक जानकारी (Disinformation) को सबसे बड़ा अल्पकालिक वैश्विक खतरा बताया है। AI-जनित कंटेंट, एल्गोरिदमिक पूर्वाग्रह और सामाजिक विभाजन के कारण सच्चाई और झूठ के बीच अंतर करना कठिन हो रहा है।
भारत में दुष्प्रचार (Disinformation) का खतरा:
- परिभाषा: दुष्प्रचार (Disinformation) जानबूझकर गलत या भ्रामक जानकारी फैलाने की प्रक्रिया है, जो भारत की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता के लिए एक गंभीर चुनौती है।
- संवेदनशीलता: 4 अरब से अधिक आबादी और बहुभाषी संरचना के कारण, भारत दुष्प्रचार के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील है।
- वैश्विक खतरा: वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट 2025 के अनुसार, भ्रामक जानकारी और दुष्प्रचार दुनिया के सबसे गंभीर अल्पकालिक खतरों में शामिल हैं।
- डिजिटल प्रभाव: भारत में 900 मिलियन से अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं, जिससे हेरफेर किए गए आख्यानों (manipulated narratives), मतदाता प्रभाव (voter influence) और आर्थिक अस्थिरता (economic disruptions) की आशंका बढ़ जाती है।
- WEF की परिभाषा: ‘वैश्विक जोखिम’ (Global Risk) ऐसे किसी भी घटना को कहा जाता है जो जनसंख्या, वैश्विक GDP और प्राकृतिक संसाधनों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।
भारत में दुष्प्रचार से निपटने की चुनौतियाँ:
- चीन का प्रभाव: डोकलाम गतिरोध (Doklam Standoff) के बाद से चीन द्वारा फैलाए जा रहे दुष्प्रचार से खतरा बढ़ा, जिसके चलते भारत ने 300 से अधिक चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया।
- युवा पीढ़ी पर प्रभाव: एक सर्वेक्षण के अनुसार, झूठी जानकारी भारत के युवा जनसांख्यिकीय लाभ के लिए एक बढ़ता खतरा है।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म की गति: AI-जनित सामग्री (AI-generated content) और डिजिटल माध्यमों पर दुष्प्रचार इतनी तेज़ी से फैलता है कि तथ्यों की जांच (Fact-checking) और उसे समय पर रोकना कठिन हो जाता है।
- तथ्य–जांच की सीमाएँ: सुधार (Corrections) और स्पष्टीकरण (Clarifications) अक्सर उन लोगों तक नहीं पहुँच पाते, जो पहले ही गलत जानकारी से प्रभावित हो चुके होते हैं।
- डाटा एन्क्रिप्शन: WhatsApp, Telegram जैसे प्लेटफॉर्म एंड–टू–एंड एन्क्रिप्शन (End-to-End Encryption) का उपयोग करते हैं, जिससे गलत जानकारी की निगरानी और उसे रोकना कठिन हो जाता है।
- मीडिया साक्षरता की कमी: वृद्ध (65+ आयु वर्ग) युवा उपयोगकर्ताओं की तुलना में 3 से 4 गुना अधिक नकली समाचार साझा करने की संभावना रखते हैं, जिससे वे दुष्प्रचार के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
भारत में दुष्प्रचार की नीतिगत सिफारिशें (Policy Recommendations)
- नियामक उपाय (Regulatory Measures): भारत को यूरोपीय संघ (EU) के डिजिटल सर्विसेज एक्ट (Digital Services Act) जैसे नियम लागू करने चाहिए, ताकि दुष्प्रचार (Disinformation) और विदेशी सूचना हेरफेर (Foreign Information Manipulation and Interference – FIMI) को रोका जा सके।
- निगरानी और पर्यवेक्षण: सुपरवाइजरी बोर्ड (Supervisory Boards) और AI परिषद (AI Councils) स्थापित किए जाएं, जो जनरेटिव AI (Generative AI) से जुड़े खतरों की निगरानी करें और उसके दुरुपयोग को नियंत्रित करें।
- महत्वपूर्ण पहल (Key Initiatives): शक्ति – इंडिया इलेक्शन फैक्ट-चेकिंग कलेक्टिवऔर डीपफेक विश्लेषण इकाई जैसी पहल दुष्प्रचार से निपटने में सहायक रही हैं, जिनका विस्तार किया जाना चाहिए।