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RBI का ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO)

संदर्भ:

RBI का ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO): भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने अप्रैल 2025 में ₹80,000 करोड़ के सरकारी बॉन्ड खरीदने के लिए ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) खरीद की घोषणा की है। यह कदम बाजार में तरलता बढ़ाने की उम्मीदों के बीच उठाया गया है।

RBI का ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO):

  • ₹80,000 करोड़ की सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) की नई खरीद: यह चार चरणों (Tranches) में होगा, प्रत्येक में ₹20,000 करोड़ की खरीदारी की जाएगी।
  • तरलता (Liquidity) बढ़ाने की निरंतर प्रक्रिया: यह कदम वित्तीय प्रणाली में तरलता डालने के लिए उठाया गया है।
  • मार्च 2025 में OMO खरीद: RBI ने ₹1 लाख करोड़ की G-Secs की खरीद दो चरणों में (₹50,000 करोड़ प्रति चरण) की थी।
  • डॉलर-रुपया स्वैप नीलामी:  RBI ने $10 बिलियन का 36 महीनों के लिए Buy/Sell स्वैप आयोजित किया था।

ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) क्या है?

  • OMO भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा बैंकिंग प्रणाली में तरलता (Liquidity) नियंत्रित करने का एक प्रमुख मौद्रिक नीति  उपकरण है।
  • इसमें RBI सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) की खरीद या बिक्री खुले बाजार में करता है।

OMO कैसे काम करता है?

  1. RBI सरकारी प्रतिभूतियां खरीदता है: इससे बाजार में नकदी बढ़ती है।
    • बैंक अधिक कर्ज देने को प्रोत्साहित होते हैं, जिससे आर्थिक गतिविधियां तेज होती हैं।
  2. RBI सरकारी प्रतिभूतियां बेचता है
    • इससे अतिरिक्त तरलता (excess liquidity) बाजार से हटती है।
    • मुद्रास्फीति (Inflation) नियंत्रित करने में मदद मिलती है क्योंकि बाजार में पैसे की आपूर्ति कम होती है।

OMO का महत्व:

  • ब्याज दरों में स्थिरता बनाए रखना।
  • बैंकों को पर्याप्त क्रेडिट उपलब्ध कराना।
  • वित्तीय स्थिरता (Financial Stability) सुनिश्चित करना।

सरकारी प्रतिभूतियां (G-Secs) क्या हैं?

  1. ऋण उपकरण (Debt Instruments): G-Secs वे बॉन्ड या IOU होते हैं जो सरकार द्वारा धन उधार लेने के लिए जारी किए जाते हैं।
  2. उद्देश्य (Purpose): सरकार इन प्रतिभूतियों से प्राप्त धन का उपयोग सरकारी खर्च, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और अन्य विकास कार्यों के लिए करती है।
  3. प्रकार (Types):
    • ट्रेजरी बिल (T-Bills): स्वल्पकालिक (Short-term) प्रतिभूतियां, जिनकी परिपक्वता 1 वर्ष से कम होती है।
    • सरकारी बॉन्ड (Dated Securities): दीर्घकालिक (Long-term) प्रतिभूतियां, जिनकी परिपक्वता 1 वर्ष या अधिक होती है।
    • राज्य विकास ऋण (SDLs): राज्य सरकारों द्वारा जारी किए गए बॉन्ड
  4. जारीकर्ता (Issuers):
    • केंद्र सरकार: T-Bills और सरकारी बॉन्ड जारी करती है।
    • राज्य सरकारें: SDLs (बॉन्ड) जारी करती हैं।

भारत में G-Secs और OMO:

  • भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ओपन मार्केट ऑपरेशंस (OMO) के तहत सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) की खरीद और बिक्री करता है।
  • G-Secs को भारत सरकार की ओर से RBI द्वारा जारी किया जाता है

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