संदर्भ:
नैनीताल की नैनी झील का जलस्तर गिरकर 4.7 फीट पर पहुंच गया है, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे कम है। गर्मियों से पहले ही यह गिरावट जल संकट की आशंकाएं बढ़ा रही है।
नैनी झील:
- स्थिति: नैनी झील, जिसे नैनीताल भी कहा जाता है, उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र में नैनीताल शहर के बीच स्थित एक मीठे पानी की प्राकृतिक झील है।
- उत्पत्ति: यह झील टेक्टोनिक मूल की है और पहले लगभग गोलाकार थी, लेकिन भूस्खलनों के कारण इसका आकार अर्धचंद्राकार हो गया। इसका जल निकास दक्षिण-पूर्वी छोर पर होता है।
- पर्यटन महत्व: कुमाऊँ की अन्य झीलों के साथ यह झील पर्यटन और मनोरंजन का प्रमुख केंद्र है।
- सांस्कृतिक महत्व: यह झील कुमाऊँनी लोककथाओं का अभिन्न हिस्सा मानी जाती है।
- अन्य प्रमुख झीलें: नैनीताल जिले को लेक डिस्ट्रिक्ट ऑफ इंडिया कहा जाता है, जहाँ चार प्रमुख झीलें हैं—नैनी झील, सातताल झील, भीमताल झील और नौकुचियाताल झील।
- विशेषता: यह उत्तराखंड की सतह क्षेत्र के आधार पर तीसरी सबसे बड़ी झील है।
नैनी झील की प्रमुख विशेषताएँ:
- जल स्रोत: झील में 26 प्रमुख नालों से जल आता है, जिसमें मुख्य सतत जलधारा बालिया नाला है।
- जल संतुलन: झील के जल संतुलन का लगभग 50% हिस्सा भूमिगत जल प्रवाह (आवक और जावक) से नियंत्रित होता है।
- जल आपूर्ति: नैनीताल की लगभग 76% पेयजल आपूर्ति इसी झील से होती है।
- पर्यटन और मनोरंजन: यह झील नौकायन (boating), पर्यटन और मनोरंजन के लिए महत्वपूर्ण केंद्र है।
नैनी झील संकट:
- जल स्तर में गिरावट: रिकॉर्ड स्तर पर जलस्तर घटने से झील के शून्य स्तर (Zero Level) से नीचे जाने की आशंका।
- शून्य स्तर का अर्थ: झील पूरी तरह नहीं सूखेगी, लेकिन इसका जलस्तर निर्धारित गेज स्तर (12 फीट) से नीचे चला जाएगा।
- झील की गहराई: नैनी झील की अधिकतम गहराई 89 फीट है, जबकि इसका मानक गेज स्तर 12 फीट तय किया गया है।
- पेयजल संकट: गर्मी के मौसम में पानी की कमी की चिंता, क्योंकि झील से प्रतिदिन 10 मिलियन लीटर पानी निकालकर नैनीताल शहर की जल आपूर्ति की जाती है।
- निर्भरता: 2024 में नैनीताल की 75% से अधिक जल आपूर्ति नैनी झील से ही पूरी हुई।