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विमान वस्तुओं में हितों का संरक्षण विधेयक 2025

संदर्भ:

राज्यसभा ने ‘विमान वस्तुओं में हितों का संरक्षण विधेयक 2025 पारित किया, जो वैमानिक वित्तपोषण से संबंधित अंतरराष्ट्रीय संधियों को कानूनी प्रभाव देने वाला एक महत्वपूर्ण कानून है। इस विधेयक का उद्देश्य केप टाउन कन्वेंशन और एयरक्राफ्ट प्रोटोकॉल को भारतीय कानूनी प्रणाली में लागू करना है, जिससे विमान वित्तपोषण और पट्टे (लीज) व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जा सके

केप टाउन कन्वेंशन (Cape Town Convention):

  1. परिचय: 2001 में अपनाई गई एक अंतरराष्ट्रीय संधि, केप टाउन कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल इंटरेस्ट्स इन मोबाइल इक्विपमेंट और इसका एयरक्राफ्ट प्रोटोकॉल विमान, हेलीकॉप्टर और इंजनों के एसेट-आधारित वित्तपोषण (asset-based financing) और लीजिंग के लिए एक समान कानूनी नियम स्थापित करता है।
  2. उद्देश्य:
    • लेसर्स (Lessors) और क्रेडिटर्स (Creditors) को कानूनी सुरक्षा प्रदान करना, जिससे डिफॉल्ट (default) की स्थिति में उन्हें उचित कानूनी समाधान मिल सके।
    • अंतरराष्ट्रीय विमानन लीजिंग को सरल बनाना और विभिन्न देशों के कानूनी जटिलताओं को कम करना।
  3. मुख्य विशेषताएँ:
    • मानकीकृत कानूनी ढांचा: विमान उपकरणों कीलीजिंग, सुरक्षा हित (security interests), और सशर्त बिक्री  को कवर करता है।
    • क्रेडिटर संरक्षण: डिफॉल्ट की स्थिति मेंक्रेडिटर्स को तेजी से विमान पुनः प्राप्त और डीरजिस्टर (deregister) करने का अधिकार देता है।
    • वैश्विक रजिस्ट्रेशन प्रणाली: स्वामित्व और हितों का एक केंद्रीयकृत अंतरराष्ट्रीय रजिस्टरस्थापित करता है।
    • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लागू: सीमाओं के पार विमान लीजिंग को सुरक्षित और पूर्वानुमेय बनाता है, जिससे कानूनी विवादों की संभावना कम होती है।

विमान वस्तुओं में हितों का संरक्षण विधेयक 2025 (Protection of Interests in Aircraft Objects Bill 2025):

  1. कानूनी प्रवर्तन: भारत में केप टाउन कन्वेंशन और उसके प्रोटोकॉल को वैधानिक मान्यता प्रदान करता है।
  2. क्रेडिटर अधिकार: डिफॉल्ट (default) की स्थिति में, क्रेडिटर्स या लेसर्स को दो महीने या एक सहमत अवधि के भीतर विमान पुनः प्राप्त करने की अनुमति देता है।
  3. डीजीसीए को घरेलू रजिस्ट्री के रूप में मान्यता: डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA)को विमान से संबंधित अंतरराष्ट्रीय हितों और बकाया राशि की घरेलू रजिस्ट्री के रूप में नामित करता है।
  4. अनिवार्य रिपोर्टिंग:
    • एयरलाइंस को प्रत्येक विमान के आधार पर अपने बकाये की रिपोर्टिंग अनिवार्य बनाता है।
    • लेसर्स को भारत में अपने संचालन और हितों की जानकारी DGCA को देनी होगी।
    • दिवालियापन पर स्पष्टता: एयरलाइंस के दिवालिया होने की स्थिति में लेसर्स को बेहतर सुरक्षा प्रदान करता है।

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