DAJGUA
संदर्भ:
भारत सरकार ने अद्वितीय जनजातीय विकास मॉडल को आगे बढ़ाते हुए “धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान” के लिए 80,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। जिसका लक्ष्य जनजातीय बहुल गाँवों में बुनियादी ढाँचे की कमी को दूर करना है।
धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (DAJGUA) क्या हैं?
- परिचय: धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान एक सामुदायिक-केंद्रित पहल है। इस अभियान की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झारखंड के हजारीबाग से की थी।
- उद्वेश्य: इसका उद्देश्य आदिवासी बहुल गांवों में शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य, जीवनयापन, स्वच्छता और स्थानीय शासन को मजबूत करना है। यह अभियान ग्राम स्तर पर जरूरतों की पहचान कर समाधान लागू करता है ताकि जनजातीय परिवारों का संपूर्ण सामाजिक-आर्थिक उत्थान हो सके।
- मूल: यह अभियान जनजातीय इतिहास के महानायक भगवान बिरसा मुंडा ‘धरती आबा’ को समर्पित है। जिन्होंने औपनिवेशिक शासन और शोषण के विरुद्ध जनजातीय नेतृत्व को सशक्त आधार दिया।
अभियान की संरचना एवं क्रियान्वयन ढाँचा:
- बहु-मंत्रालयी समन्वय: इस अभियान का संचालन 17 मंत्रालयों की संयुक्त भागीदारी से होता है। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गाँवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, जल आपूर्ति, बिजली, डिजिटल कनेक्टिविटी और आजीविका संबंधी योजनाएँ एकीकृत रूप से लागू हों।
- लक्षित क्षेत्र और लाभार्थी: अभियान देश के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 63,000 जनजातीय गाँवों को कवर करता है, जिससे 5 करोड़ से अधिक जनजातीय जनसंख्या प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होगी।
- पीएम-जनमन मिशन के साथ अभिसरण: यह 25 प्रमुख हस्तक्षेपों को जोड़कर लाया गया व्यापक विकास पैकेज है, जिसमें पीएम-जनमन शामिल है। पीएम-जनमन (प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान) का उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार करना है।
अभियान की प्रमुख विशेषताएँ:
- मूल सुविधाएं: 20 लाख पक्के घरों का निर्माण, जनजातीय बहुल गांवों को जोड़ने हेतु 25,000 किमी सड़कें, 20 से कम घरों वाली 5,000 बस्तियों में भी पाइप जल आपूर्ति का लक्ष्य।
- आधुनिक सेवाओं का विस्तार: 2.35 लाख घरों तथा संस्थानों का विद्युतीकरण, 25 लाख LPG कनेक्शन, भारतनेट के माध्यम से 5,000 गाँवों में डिजिटल कनेक्टिविटी, 100 जनजातीय बहुउद्देश्यीय विपणन केंद्र (ग्रामीण अर्थव्यवस्था हेतु)।
- आत्मनिर्भरता आधारित मॉडल: अभियान में जनजातीय परिवारों को होमस्टे मॉडल के लिए 5 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाती है।
अभियान का सामाजिक-आर्थिक महत्व:
- इंफ्रास्ट्रक्चर-आधारित समावेशन: सड़क, बिजली, पाइप जल, डिजिटल कनेक्टिविटी और आवास जैसी सुविधाएँ जनजातीय समाज को मुख्यधारा के विकास से जोड़ती हैं और सरकारी सेवाओं तक पहुँच बढ़ाती हैं।
- आजीविका संवर्धन: होमस्टे, कौशल विकास और विपणन केंद्रों के माध्यम से स्थानीय आजीविका स्रोत मजबूत होते है। इससे ग्रामीण-जनजातीय अर्थव्यवस्था में सतत आय का नया मॉडल विकसित हो सकता है।
- सांस्कृतिक सशक्तिकरण: भगवान बिरसा मुंडा के नाम पर अभियान का नामकरण जनजातीय पहचान को सम्मान देता है और नीति स्तर पर सांस्कृतिक सम्मान की रणनीति को पुष्ट करता है।
- प्रशासनिक दक्षता: 17 मंत्रालयों के अभिसरण से योजनाओं में दोहरे खर्च कम होते हैं और क्रियान्वयन में गति व पारदर्शिता आती है।

