Decision to broadcast live Thado language in Manipur

संदर्भ:
हाल ही में प्रसार भारती द्वारा मणिपुर में थाडो भाषा के लाइव प्रसारण को पुनः बहाल करने का निर्णय लिया गया है, जो राज्य का सामान्य स्थिति की ओर लौटने का एक सकारात्मक संकेत है।
- मई 2023 में मणिपुर में जातीय हिंसा भड़कने के बाद, इंफाल घाटी से थाडो भाषी कर्मचारियों के विस्थापन के कारण प्रसार भारती से थाडो भाषा के लाइव प्रसारण रुक गए थे।
थाडो भाषा के बारे में:
- थाडो भाषा मणिपुर की एक प्रमुख जनजातीय भाषा है। यह पूर्वोत्तर भारत की भाषाई विविधता और जटिल नृवंशविज्ञान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
- थाडो भाषा तिब्बती-बर्मी परिवार की ‘कुकी-चिन’ उप-शाखा से संबंधित है।
- ऐतिहासिक रूप से यह एक मौखिक परंपरा वाली भाषा थी, लेकिन वर्तमान में यह मुख्य रूप से लैटिन (रोमन) लिपि में लिखी जाती है।
- यह भाषा लुशाई (मिजो), पाइटे और हमार भाषाओं से भाषाई समानता रखती है, फिर भी इसकी अपनी विशिष्ट व्याकरणिक संरचना और शब्दावली है।
- 2011 की जनगणना के अनुसार, थाडो मणिपुर की ‘अनुसूचित जनजातियों’ में सबसे बड़ी एकल जनसंख्या वाला समूह है।
- ये मुख्य रूप से मणिपुर के चंदेल, चूराचाँदपुर, सेनापति और कांगपोकपी जिलों में केंद्रित हैं। इसके अलावा, असम, नागालैंड और म्यांमार के कुछ हिस्सों में भी थाडो भाषी निवास करते हैं।
- वर्तमान में, इसे एक ‘मान्यता प्राप्त’ जनजातीय भाषा का दर्जा प्राप्त है।
- थाडो भाषा लोक गीतों, कहानियों और ‘पुले’ (Pule – वंशावली वृत्तांत) से समृद्ध है, जो समुदाय के इतिहास को जीवित रखते हैं।
- यूनेस्को के ‘एटलस ऑफ वर्ल्ड लैंग्वेजेज इन डेंजर’ के अनुसार, थाडो भाषा भारत की संकटग्रस्त भाषाओं में से एक है और इसे ‘असुरक्षित’ (Vulnerable) या इससे भी अधिक गंभीर श्रेणी में रखा जाना चाहिए।
- मणिपुर के स्कूलों में प्राथमिक स्तर पर थाडो को शिक्षा के माध्यम के रूप में उपयोग करने के प्रयास किए गए हैं, जो नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के ‘मातृभाषा में शिक्षा’ के उद्देश्य के अनुरूप है।
