Defence Acquisition Council approves capital acquisition proposal worth Rs 3.60 lakh crore
संदर्भ:
हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने 12 फरवरी 2026 को लगभग 3.60 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत अधिग्रहण प्रस्तावों के लिए ‘आवश्यकता की स्वीकृति’ (Acceptance of Necessity – AoN) प्रदान की है।
DAC द्वारा अनुमोदित उपकरण:
- भारतीय वायु सेना (IAF): मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) {राफेल}, लड़ाकू मिसाइलें (Combat Missiles), एयर-शिप आधारित हाई-अल्टीट्यूड स्यूडो सैटेलाइट (AS-HAPS)
- भारतीय थल सेना (Army): एंटी-टैंक माइन्स (Vibhav), T-72 टैंकों का ओवरहॉल, बीएमपी-II (BMP-II) इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल का ओवरहॉल, आर्मर्ड रिकवरी व्हीकल (ARVs) का ओवरहॉल
- भारतीय नौसेना (Navy): P-8I लंबी दूरी के समुद्री टोही विमान (LRMR), 04 मेगावाट मरीन गैस टरबाइन आधारित इलेक्ट्रिक पावर जेनरेटर
- भारतीय तट रक्षक (ICG): डोर्नियर विमानों के लिए इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रा-रेड (EO/IR) सिस्टम।
प्रत्येक उपकरण का विस्तृत विवरण:
- मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) – 114 राफेल
- परिचय: यह इस सौदे का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके तहत 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दी गई है।
- विशेषता: इसमें से 18 विमान सीधे ‘फ्लाई-अवे’ स्थिति में आएंगे, जबकि शेष 96 विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। यह विमान 4.5 पीढ़ी का लड़ाकू विमान है जो हवा से हवा और हवा से जमीन पर सटीक हमले (Deep Strike) करने में सक्षम है।
- भूमिका: यह वायु सेना की घटती स्क्वाड्रन संख्या को पूरा करेगा और वायु प्रभुत्व (Air Dominance) सुनिश्चित करेगा।
2. हाई-अल्टीट्यूड स्यूडो सैटेलाइट (AS-HAPS)
- परिचय: यह एक सौर ऊर्जा संचालित मानवरहित विमान है जो वायुमंडल के सबसे ऊपरी स्तर (समताप मंडल) पर महीनों तक तैनात रह सकता है।
- विशेषता: इसे ‘स्यूडो सैटेलाइट’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह उपग्रह की तरह एक ही स्थान पर टिक कर निगरानी कर सकता है, लेकिन इसकी लागत उपग्रह से बहुत कम होती है।
- भूमिका: इसका उपयोग निरंतर खुफिया जानकारी (ISR), इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस और दूरसंचार के लिए किया जाएगा।
3. P-8I समुद्री टोही विमान (Boeing P-8I)
- परिचय: यह अमेरिकी कंपनी बोइंग द्वारा निर्मित लंबी दूरी का समुद्री निगरानी और एंटी-सबमरीन वॉरफेयर (ASW) विमान है।
- विशेषता: यह उन्नत सेंसरों, रडार और हार्पून मिसाइलों व टॉरपीडो से लैस है।
- भूमिका: हिंद महासागर क्षेत्र में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और समुद्री सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए यह अपरिहार्य है।
4. विभव (Vibhav) एंटी-टैंक माइन्स
- परिचय: यह पूर्णतः स्वदेशी रूप से विकसित ‘पॉइंट-अटैक’ एंटी-टैंक माइन है।
- विशेषता: यह मैकेनाइज्ड दुश्मन बलों (टैंकों और बख्तरबंद वाहनों) को आगे बढ़ने से रोकने के लिए जमीन के नीचे बिछाई जाती है।
- भूमिका: यह सीमावर्ती क्षेत्रों में रक्षात्मक दीवार का कार्य करेगी और दुश्मन के बख्तरबंद हमलों को विफल करेगी।
5. ओवरहॉल परियोजना (T-72, BMP-II, ARVs)
- परिचय: सेना के मौजूदा रूसी मूल के प्लेटफार्मों (T-72 टैंक और BMP-II वाहन) के जीवनकाल और मारक क्षमता को बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर मरम्मत और आधुनिकीकरण (Overhaul) को मंजूरी दी गई है।
- महत्व: इससे इन पुराने लेकिन शक्तिशाली टैंकों की परिचालन प्रभावशीलता अगले 10-15 वर्षों के लिए बढ़ जाएगी।
6. मरीन गैस टरबाइन इलेक्ट्रिक जेनरेटर (04 MW)
- परिचय: इसे ‘मेक-I’ श्रेणी के तहत स्वदेशी रूप से विकसित किया जाएगा।
- भूमिका: यह भारतीय नौसेना के जहाजों की बिजली उत्पादन क्षमता में आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करेगा और विदेशी निर्माताओं पर निर्भरता कम करेगा।

