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भारत में रक्षा उत्पादन (Defence Production in India) | UPSC Preparation

Defence Production in India

Defence Production in India

संदर्भ:

भारत अब भी अपने रक्षा उपकरणों और हथियारों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, लेकिन हालिया सरकारी आंकड़ों के अनुसार घरेलू रक्षा निर्माण में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है।

  • ऑपरेशन सिंदूर के सफल निष्पादन के बाद देश में स्वदेशी रक्षा क्षमताओं की प्रभावशीलता और उन पर विश्वास को लेकर चर्चाएं तेज हुई हैं। इससे आत्मनिर्भर भारत अभियान को बल मिला है और रक्षा क्षेत्र में देश के तकनीकी और औद्योगिक विकास की नई संभावनाएं खुली हैं।
(Defence Production in India)

भारत में रक्षा उत्पादन में वृद्धि

वित्त वर्ष 2023-24 (FY24) की उपलब्धियाँ:

  • भारत का रक्षा उत्पादन ₹1.3 लाख करोड़ तक पहुँच गया — यह अब तक का रिकॉर्ड स्तर है।
  • यह वित्त वर्ष 2022-23 (FY23) की तुलना में 17% अधिक है।
  • लगातार दूसरे वर्ष ₹1 लाख करोड़ का आंकड़ा पार किया गया।
  • FY22 से रक्षा उत्पादन दोहरे अंकों (double-digit) में वृद्धि दर्ज कर रहा है।

वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) का अब तक का आँकड़ा:

  • दिसंबर 2024 तक ₹90,000 करोड़ का उत्पादन हो चुका है।
  • पूरे वर्ष के लिए सरकार ने ₹1.6 लाख करोड़ का लक्ष्य तय किया है।

रक्षा उत्पादन में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की भूमिका:

सार्वजनिक क्षेत्र (PSUs):

  • रक्षा उत्पादन में अब भी प्रमुख योगदान दे रहे हैं।

निजी क्षेत्र (Private Sector):

  • FY17 से FY24 तक लगभग 20% हिस्सा था।
  • FY25 में यह बढ़कर 24% हो गया है।
  • निर्यात (Export) में निजी कंपनियाँ अग्रणी हैं — उन्हें अधिक export authorisation मिल रहे हैं।

MSME क्षेत्र:

  • FY25 में ₹13,000 करोड़ से अधिक की रक्षा खरीद।
  • यह सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य से दोगुना है।
  • सरकार की अनिवार्य खरीद नीतियों (compulsory procurement norms) से सहयोग मिला है।

रक्षा निर्यात (Defence Exports):

  • FY23 और FY24 में भारत का रक्षा निर्यात ₹20,000 करोड़ के पार रहा।
  • FY20 की तुलना में दोगुना हो चुका है।

2024-25 में रिकॉर्ड रक्षा अनुबंध

मुख्य आँकड़े:

  • कुल 193 रक्षा अनुबंध हस्ताक्षरित किए गए।
  • इनकी कुल लागत ₹2,09,050 करोड़ रही — अब तक का सबसे ऊँचा वार्षिक आंकड़ा
  • इनमें से 177 अनुबंध घरेलू उद्योग को दिए गए, जिनका मूल्य ₹1,68,922 करोड़ है।

इसका महत्त्व:

  • यह भारत में स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
  • भारतीय कंपनियों को प्राथमिकता मिलने से:
    • रोज़गार सृजन में वृद्धि हुई है।
    • तकनीकी विकास और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिला है।

रक्षा औद्योगिक गलियारे (Defence Industrial Corridors)

स्थापना:

  • भारत सरकार ने 2 समर्पित रक्षा औद्योगिक गलियारे बनाए हैं:
  1. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh)
  2. तमिलनाडु (Tamil Nadu)

अब तक की उपलब्धियाँ (फ़रवरी 2025 तक):

  • कुल₹8,658 करोड़ से अधिक निवेश प्राप्त हुआ।
  • 253 समझौता ज्ञापन (MoUs)पर हस्ताक्षर।
  • MoUs की अनुमानित निवेश क्षमता₹53,439 करोड़

भौगोलिक विस्तार: दोनों राज्यों में 11 प्रमुख केंद्र (Nodes) स्थापित किए गए हैं।

महत्त्वपूर्ण लाभ: यह गलियारे उन्नत अवसंरचना और प्रोत्साहन  प्रदान कर रहे हैं।

भारत को डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब” के रूप में उभरने में सहायता मिल रही है।

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