Development of a deep-learning tool called Disobind
संदर्भ:
भारतीय शोधकर्ताओं ने Disobind नामक एक क्रांतिकारी डीप-लर्निंग टूल विकसित किया है, जो जैव-प्रौद्योगिकी और चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है। यह टूल मुख्य रूप से Intrinsically Disordered Proteins (IDPs) यानी ‘आंतरिक रूप से अव्यवस्थित प्रोटीन’ की कार्यप्रणाली और उनके अन्य प्रोटीनों के साथ जुड़ने (Binding) के तरीकों की भविष्यवाणी करता है।
Disobind क्या है?
- Disobind एक ओपन-सोर्स AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) टूल है जिसे नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंसेज (NCBS) और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित किया गया है।
- यह टूल ‘प्रोटीन लैंग्वेज मॉडल’ (pLM) का उपयोग करता है, जो प्रोटीन अनुक्रमों (Sequences) के विशाल डेटा पर आधारित होता है।
- इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे किसी संरचनात्मक जानकारी की आवश्यकता नहीं होती, यह केवल प्रोटीन अनुक्रमों के आधार पर सटीक भविष्यवाणी कर सकता है।
Disobind की मुख्य विशेषताएं:
- अनुक्रम-आधारित भविष्यवाणी: यह टूल केवल प्रोटीन के अमीनो एसिड अनुक्रमों का विश्लेषण कर यह बता सकता है कि प्रोटीन का कौन सा हिस्सा दूसरे अणु के साथ जुड़ेगा।
- उच्च सटीकता: परीक्षणों के दौरान Disobind ने वर्तमान में उपलब्ध सर्वश्रेष्ठ टूल जैसे ‘AlphaFold2’ और ‘AlphaFold3’ से भी बेहतर प्रदर्शन किया है, विशेषकर उन प्रोटीनों के मामले में जिन्हें इसने पहले कभी नहीं देखा था।
- मल्टी-लेयर आर्किटेक्चर: इसमें प्रोजेक्शन ब्लॉक, इंटरेक्शन ब्लॉक और मल्टी-लेयर परसेप्ट्रॉन (MLP) शामिल हैं, जो डेटा का गहन विश्लेषण करते हैं।
- रोग निदान और दवा विकास: यह टूल नई दवाओं के डिजाइन और रोगों के जैविक तंत्र को समझने में वैज्ञानिकों की मदद करेगा।
Intrinsically Disordered Proteins (IDPs) का महत्व:
प्रोटीन आमतौर पर एक निश्चित 3D आकार में मुड़ते हैं, लेकिन IDPs ऐसे ‘शेप-शिफ्टिंग’ (आकार बदलने वाले) अणु होते हैं जिनका कोई स्थिर ढांचा नहीं होता।
- कोशिका संचार: ये प्रोटीन कोशिकाओं के भीतर सिग्नल भेजने और जीन विनियमन (Gene Regulation) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- रोगों से संबंध: कैंसर, न्यूरोडीजेनेरेटिव विकार (जैसे अल्जाइमर और पार्किंसंस), और हृदय रोगों में इन प्रोटीनों की भूमिका प्रमुख होती है।
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: यह भारत की बढ़ती AI क्षमताओं को दर्शाता है। Disobind जैसे उपकरण ‘डिजिटल इंडिया’ मिशन और ‘बायोटेक्नोलॉजी’ क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक बड़ा कदम हैं।

