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श्वेत बौने तारे से उत्पन्न रंगीन बो शॉकवेव तरंग की खोज (Discovery of a coloured bow shockwave originating from a white dwarf star) | UPSC Preparation

Discovery of a coloured bow shockwave originating from a white dwarf star

Discovery of a coloured bow shockwave originating from a white dwarf star

संदर्भ:

हाल ही में खगोलविदों ने RXJ0528+2838 नामक एक अत्यधिक चुंबकीय ‘सफेद बौने’ (White Dwarf) तारे के चारों ओर एक दुर्लभ और रहस्यमयी ‘बो शॉक’ तरंग की खोज की है। 

खोज का मुख्य आकर्षण: 

खगोलविदों के अनुसार, RXJ0528+2838 नामक एक मृत तारा अंतरिक्ष में यात्रा करते समय एक जीवंत और बहु-रंगीन शॉकवेव उत्पन्न कर रहा है। 

  • दूरी और स्थान: यह प्रणाली पृथ्वी से लगभग 730 प्रकाश वर्ष दूर ‘ऑरिगा’ (Auriga) नक्षत्र में स्थित है।
  • बाइनरी सिस्टम: यह सफेद बौना एक कम द्रव्यमान वाले ‘लाल बौने’ (Red Dwarf) तारे के साथ एक बाइनरी सिस्टम (युग्मक प्रणाली) में है, जहां दोनों तारे मात्र 80 मिनट में एक-दूसरे की परिक्रमा पूरी करते हैं।
  • दुर्लभ दृश्य: यूरोपीय दक्षिणी वेधशाला (ESO) के ‘वेरी लार्ज टेलीस्कोप’ का उपयोग करते हुए, वैज्ञानिकों ने एक धनुषाकार (arc-shaped) संरचना देखी, जिसमें हाइड्रोजन (लाल), नाइट्रोजन (हरा) और ऑक्सीजन (नीला) गैसों के संकेत मिले हैं। 

क्यों है यह अद्भुत?

सामान्यतः, ऐसे ‘बो शॉक’ उन प्रणालियों में देखे जाते हैं जहां तारे के चारों ओर गैस की एक डिस्क (Accretion Disc) होती है। लेकिन RXJ0528+2838 के मामले में कुछ अलग है:

  • डिस्क का अभाव: इस सफेद बौने में गैस की वह डिस्क नहीं है जो आमतौर पर पदार्थ के बहिर्वाह (outflow) के लिए जिम्मेदार होती है।
  • चुंबकीय प्रभाव: वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तारे का अत्यधिक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र इसके साथी तारे से आने वाली गैस को सीधे अपने ध्रुवों की ओर खींचता है, जिससे बिना डिस्क के ही शक्तिशाली बहिर्वाह पैदा होता है।
  • दीर्घकालिक घटना: शॉकवेव के आकार और घनत्व से पता चलता है कि यह प्रक्रिया पिछले 1,000 वर्षों से जारी है, जो इसे एक अस्थायी घटना के बजाय एक स्थिर प्रक्रिया बनाती है। 

महत्व:

यह खोज ‘व्हाइट ड्वार्फ पल्सर’ जैसी नई श्रेणियों को समझने में मदद करती है। अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के लिए यह पहेली है कि बिना किसी डिस्क के यह मृत तारा इतनी ऊर्जा कैसे उत्पन्न कर रहा है। 

महत्वपूर्ण बिंदु:

  • सफेद बौना (White Dwarf): जब सूर्य जैसे कम या मध्यम द्रव्यमान वाले तारे अपना परमाणु ईंधन (हाइड्रोजन) समाप्त कर लेते हैं, तो वे अपनी बाहरी परतों को त्याग देते हैं और केवल एक गर्म, सघन कोर बचता है। इसे ‘सफेद बौना’ कहा जाता है। इनका आकार पृथ्वी जैसा लेकिन द्रव्यमान सूर्य के बराबर होता है। 
  • चंद्रशेखर सीमा: भारतीय-अमेरिकी खगोलशास्त्री सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर द्वारा प्रतिपादित यह सीमा (लगभग 1.44 सौर द्रव्यमान) बताती है कि एक सफेद बौना अधिकतम कितना भारी हो सकता है।
  • डायनेमो मॉडल: यह सिद्धांत बताता है कि सफेद बौने के ठंडे होते कोर में होने वाली हलचल (Convection) शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र पैदा करती है, जो पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र की प्रक्रिया के समान है।

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