Discovery of rare blind red fish called Gichakk Nkana
संदर्भ:
वैज्ञानिकों ने हाल ही में असम में एक दुर्लभ अंधी लाल मछली (Blind Red Fish) की खोज की है, जिसे गिचक्क नकाणा (Gitchak nakana) नाम दिया गया है। यह खोज पूर्वोत्तर भारत और पूर्वी हिमालय क्षेत्र में भूजल के भीतर रहने वाली किसी मछली का पहला रिकॉर्ड है।
गिचक्क नकाणा के बारे में:
- खोज स्थल: यह मछली असम के गोलपाड़ा (Goalpara) जिले के एक गांव में, मेघालय की सीमा के पास स्थित एक घरेलू कुएं (dug-out well) से मिली है।
- शोधकर्ता: इसकी खोज असम डॉन बॉस्को यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता विमारीथी के. मारक (Wimarithy K. Marak) और डॉ. लोकेश्वर युमनाम के नेतृत्व में एक अंतरराष्ट्रीय टीम (भारत, जर्मनी और स्विट्जरलैंड) द्वारा की गई है।
- आकार: यह एक अत्यंत सूक्ष्म मछली है, जिसकी लंबाई लगभग 2 सेंटीमीटर है।
- रंग और पारदर्शिता: मछली का शरीर रंगहीन और पारदर्शी होता है। इसकी रक्त वाहिकाएं और आंतरिक अंग त्वचा के माध्यम से दिखाई देते हैं, जिससे यह जीवित अवस्था में रक्त-लाल (Blood-red) दिखाई देती है।
- नेत्रहीनता: पूर्ण अंधेरे में रहने के कारण इसमें आंखों का पूर्ण अभाव है।
- खोपड़ी की संरचना: इसकी सबसे अनूठी शारीरिक विशेषता ‘स्कल रूफ’ (Skull roof) का न होना है। इसका मस्तिष्क केवल त्वचा से ढका होता है, जो इसे अन्य मछलियों से अलग बनाता है।
- आयु: अनुवांशिक (Genetic) अध्ययनों के अनुसार, यह प्रजाति अपने निकटतम पूर्वजों से लगभग 2.1 से 4.5 करोड़ साल पहले अलग हुई थी।
- प्रजनन: शोध में पाया गया कि इस प्रजाति की मादा एक समय में केवल 8 बड़े अंडे देती है, जो सीमित संसाधनों वाले भूमिगत वातावरण के अनुकूलन को दर्शाता है।
- स्वाद कलिका : इसके स्पर्शकों (Barbels) में स्वाद कलिकाओं (Taste buds) का घनत्व बहुत अधिक होता है, जो पूर्ण अंधकार में भोजन खोजने में मदद करते हैं।
- दुर्लभता: दुनिया भर में ज्ञात 300 से अधिक भूमिगत मछलियों में से 10% से भी कम एक्विफर्स (Aquifers) में पाई जाती हैं; अधिकांश गुफाओं में रहती हैं।
- संरक्षण की स्थिति (Conservation): यह प्रजाति अब तक केवल एक ही कुएं में पाई गई है, जो इसे अत्यधिक स्थानिक (Locally endemic) और संवेदनशील बनाती है। भूजल का अत्यधिक दोहन और रासायनिक प्रदूषण इसके अस्तित्व के लिए मुख्य खतरे हैं।

