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दुर्लभ समुद्री एम्फीपोड प्रजाति स्टेनथो लोवरी की खोज (Discovery of rare marine amphipod species Stentho loweri) | Apni Pathshala

Discovery of rare marine amphipod species Stentho loweri

Discovery of rare marine amphipod species Stentho loweri

संदर्भ:

हाल ही में ओडिशा के गंजम जिले में एक दुर्लभ समुद्री एम्फीपोड (Amphipod) प्रजाति, स्टेनथो लोवरी (Stenothoe lowryi) की खोज की गई।

स्टेनथो लोवरी के बारे में:

  • स्थान: यह खोज ओडिशा के गंजम जिले में आर्यपल्ली (Arjyapalli) तट पर की गई है।
  • शोधकर्ता: बरहामपुर विश्वविद्यालय (Berhampur University) के समुद्री विज्ञान विभाग के शोधकर्ताओं ने, सहायक प्रोफेसर शेषदेव पात्रो के नेतृत्व में इस प्रजाति की पहचान की।
  • विशेष: इस प्रजाति को पहली बार भारत के समुद्री क्षेत्रों में दर्ज किया गया है। इससे पहले यह केवल मलेशियाई तटों (Pangkor Island) पर ही पाई गई थी।
  • वर्गीकरण (Taxonomy): यह स्टेनथोइडी (Stenothoidae) परिवार और एम्फीपोडा (Amphipoda) गण (Order) से संबंधित एक छोटा क्रस्टेशिया (Crustacean) है।
  • शारीरिक संरचना:
    • इसका शरीर झींगे (Shrimp) जैसा दिखता है और आकार लगभग 5.5 मिलीमीटर होता है।
    • इसमें बड़े पंजे (Large Claws) जिन्हें ‘गनाथोपोड्स’ (Gnathopods) कहा जाता है, प्रमुख विशेषता हैं। ये पंजे भोजन पकड़ने और सतहों पर चिपकने में मदद करते हैं।
    • इनकी एंटीना (Antennae) लंबी होती है और शरीर की सतह चिकनी होती है।
  • आवास (Habitat): यह मुख्य रूप से पथरीले इंटरटाइडल (Intertidal) क्षेत्रों में पाए जाते हैं, जहाँ लहरें अक्सर किनारे से टकराती हैं।
  • पर्यावरणीय संकेतक: ये जीव तटीय पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का अध्ययन करने के लिए जैव-संकेतक (Bio-indicators) के रूप में उपयोग किए जाते हैं।

एम्फीपोड्स (Amphipods) क्या हैं?

  • परिचय: एम्फीपोड्स (Amphipods) छोटे क्रस्टेशियाई जीव हैं जो समुद्री और ताजे पानी के पारिस्थितिकी तंत्र का आधार माने जाते हैं। 
  • शारीरिक संरचना (Morphology): इनका शरीर पार्श्व रूप से संकुचित (laterally compressed) होता है, जिससे ये ऊपर से नीचे की तुलना में अगल-बगल से पतले दिखते हैं।
  • नाम का अर्थ: “एम्फीपोडा” का अर्थ “विभिन्न पैरों वाला” है, क्योंकि इनके पास चलने और तैरने के लिए अलग-अलग प्रकार के पैर होते हैं।
  • आवास: ये गहरे समुद्र से लेकर ताजे पानी की झीलों, गुफाओं और यहाँ तक कि नम स्थलीय क्षेत्रों (जैसे बीच फ्लीज़) में भी पाए जाते हैं।
  • पारिस्थितिक भूमिका: ये डेट्रिटिवोर्स (detritivores) के रूप में कार्बनिक कचरे को सड़ाने और पोषक चक्र (nutrient cycling) को बनाए रखने में मदद करते हैं।
  • खाद्य श्रृंखला: ये सूक्ष्मजीवों और बड़ी मछलियों, पक्षियों व स्तनधारियों के बीच ऊर्जा हस्तांतरण का एक प्रमुख माध्यम हैं।
  • वर्गीकरण: वैज्ञानिक रूप से इन्हें 10,000 से अधिक प्रजातियों में वर्गीकृत किया गया है, जिनमें ‘गैमरिडिया’ (Gammaridea) सबसे बड़ा समूह है।
  • विकास: अन्य क्रस्टेशियाई जीवों के विपरीत, इनमें लार्वा अवस्था नहीं होती; अंडे से सीधे छोटे वयस्क जैसे बच्चे निकलते हैं।
  • प्रजनन: मादाएं अपने पैरों के बीच बने एक विशेष ब्रूड पाउच (brood pouch) में अंडों को तब तक रखती हैं जब तक वे फूट न जाएं।
  • आकार की सीमा: अधिकांश प्रजातियां 1 से 15 मिमी की होती हैं, लेकिन गहरे समुद्र में पाए जाने वाले ‘सुपर जायंट’ एम्फीपोड 34 सेमी तक बढ़ सकते हैं।

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