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प्राचीनतम ज्ञात सुपरनोवा GRB 250314A की खोज (Discovery of the oldest known supernova GRB 250314A) | UPSC Preparation

Discovery of the oldest known supernova GRB 250314A

Discovery of the oldest known supernova GRB 250314A

संदर्भ:

हाल ही में जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) ने एक दुर्लभ गामा-किरण विस्फोट की पहचान करने के लिए दूरबीनों के एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का उपयोग करके प्राचीनतम ज्ञात सुपरनोवा का पता लगाया है। इसकी खोज मार्च 2025 में SVOM मिशन द्वारा शुरू हुई और अंततः जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) ने इसे पुष्टि की।

सुपरनोवा क्या हैं?

  • सुपरनोवा एक तारे के जीवन का अंतिम और सबसे शक्तिशाली विस्फोट है, जो तब होता है जब कोई विशाल तारा अपने नाभिकीय ईंधन को समाप्त कर देता है। इस प्रक्रिया में, तारे का कोर गुरुत्वाकर्षण के कारण ढह जाता है, जिससे एक प्रचंड विस्फोट होता है, जो प्रकाश और ऊर्जा की एक विशाल लहर उत्पन्न करता है। यह विस्फोट ब्रह्मांड के विकास और नए तारों और ग्रहों के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण हैं। 
  • हाल ही में SVOM मिशन के तहत जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) ने सबसे प्राचीन सुपरनोवा की खोज की पुष्टि की है, जिसे GRB 250314A नाम दिया गया। 
  • आंकलन के अनुसार यह सुपरनोवा विस्फोट उस समय हुआ जब ब्रह्मांड केवल 730 मिलियन वर्ष पुराना था, अर्थात् लगभग 5% वर्तमान आयु। 

खोज की प्रक्रिया:

  • प्रारम्भिक संकेत : 14 मार्च 2025 को फ्रांसीसी−चीनी SVOM उपग्रह ने एक दुर्लभ और अत्यंत चमकीला गामा–रे बर्स्ट (GRB 250314A) दर्ज किया। यह लगभग 10 सेकंड तक चला और लंबे समय तक चलने वाले ऐसे विस्फोट सामान्यतः अत्यधिक विशाल तारों के पतन से जुड़े होते हैं।

  • स्थान निर्धारण: डेढ़ घंटे में ही NASA के Neil Gehrels Swift Observatory ने एक्स-रे स्रोत का सटीक स्थान निर्धारित कर लिया। 11 घंटे बाद Nordic Optical Telescope ने इसका इन्फ्रारेड आफ्टरग्लो देखा, जिससे ज्ञात हुआ कि यह अत्यंत दूरस्थ घटना है।

  • दूरी का अनुमान: इसके लगभग चार घंटे बाद यूरोपीय दक्षिणी वेधशाला के Very Large Telescope ने यह निर्धारित किया कि यह विस्फोट Big Bang के 730 मिलियन वर्ष बाद हुआ था।

  • JWST द्वारा पुष्टि: ब्रह्मांड के विस्तार के कारण इस विस्फोट की रोशनी अत्यधिक रेडशिफ्टेड होकर इन्फ्रारेड में खिसक गई थी। JWST ने जुलाई 2025 में अपनी NIRCam से सूक्ष्म चमक-पतलन (light variation) को दर्ज किया और इसे एक कोर-कॉलैप्स सुपरनोवा के रूप में प्रमाणित किया।

सुपरनोवा की वैज्ञानिक विशेषताएँ:

  • प्रारम्भिक ब्रह्मांड की झलक: यह सुपरनोवा उस समय हुआ जब सितारे अत्यधिक विशाल, कम धात्विकता वाले और अत्यल्प आयु वाले थे। यह खोज पहली पीढ़ी के तारों और रिआयनाइजेशन युग की प्रक्रियाओं को समझने में महत्वपूर्ण है।

    • रासायनिक समृद्धि: सुपरनोवा विस्फोट भारी तत्वों (metals) को ब्रह्मांड में फैलाते हैं। इतनी प्रारम्भिक अवस्था में यह प्रक्रिया शुरू होना दर्शाता है कि तारकीय विकास बहुत तेजी से हुआ।

  • समानता: अध्ययन में पाया गया कि यह प्राचीन सुपरनोवा वर्तमान आकाशगंगा में दिखने वाले सुपरनोवा जैसा ही है। यह मौजूदा मॉडलों को चुनौती देता है और संकेत देता है कि प्रारम्भिक तारों के बारे में हमारी जानकारी अधूरी है।

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