Domicile Policy in Bihar
संदर्भ:
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शिक्षक बहाली में डोमिसाइल पॉलिसी (Domicile Policy) लागू करने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब बिहार के निवासियों को शिक्षक नियुक्तियों में प्राथमिकता दी जाएगी।
पृष्ठभूमि: बिहार में डोमिसाइल नीति (Domicile Policy in Bihar)
- बिहार में स्थानीय युवाओं को सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता देने की मांग वर्षों से चली आ रही थी।
- 2020 के विधानसभा चुनाव में इस नीति को लागू करने का वादा किया गया था, जिसे बाद में सरकार ने लागू भी किया।
- लेकिन जुलाई 2023 में सरकार ने यह नीति समाप्त कर दी, कारण बताया गया कि योग्य शिक्षकों की कमी हो रही थी।
- इसके विरोध में छात्रों और सामाजिक संगठनों ने आंदोलन किया और नीति को पुनः लागू करने की मांग उठाई।
क्या है डोमिसाइल नियम?
डोमिसाइल का अर्थ होता है – स्थायी निवास प्रमाण पत्र (Permanent Residence Certificate)।
डोमिसाइल सर्टिफिकेट क्यों जरूरी है?
शिक्षक भर्ती में अनिवार्य: बिहार सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब सिर्फ वही अभ्यर्थी पात्र होंगे, जो बिहार के स्थायी निवासी हैं।
अन्य लाभ:
- शैक्षणिक संस्थानों में एडमिशन के लिए: कॉलेज, स्कूल, यूनिवर्सिटी आदि में दाखिले में मददगार।
- सरकारी नौकरी में प्राथमिकता के लिए: स्थानीय निवासियों को आरक्षण या वरीयता दी जाती है।
- जमीन की रजिस्ट्री में आवश्यक दस्तावेज: जमीन खरीद-बिक्री में उपयोग होता है।
- वाहन खरीदने और पंजीकरण के समय जरूरी: RTO में स्थानीयता साबित करने में मदद करता है।
- राज्य सरकार की छात्रवृत्तियों के लिए जरूरी: स्कॉलरशिप योजनाओं में पात्रता के लिए उपयोगी।
- लोन के आवेदन में सहायक: बैंक या अन्य संस्थानों में पता प्रमाण के रूप में मान्य।
- सरकारी योजनाओं में स्थानीय निवास प्रमाण के रूप में: सभी प्रकार की योजनाओं और सेवाओं में काम आता है।
डोमिसाइल नीति की माँग: छात्रों की मुख्य चिंताएँ–
- बाहरी प्रतिस्पर्धा:उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की भागीदारी से बिहार के युवाओं को कम अवसर मिले।
- स्थानीय भाषा की जरूरत:भोजपुरी, मैथिली जैसी भाषाओं की समझ शिक्षण के लिए जरूरी है, जो बाहरी उम्मीदवारों में नहीं होती।
- अन्य राज्यों में नीति लागू:यूपी, राजस्थान जैसे राज्यों में पहले से डोमिसाइल आधारित प्राथमिकता दी जाती है, जिससे बिहार के छात्र असमान प्रतिस्पर्धा में पड़ते हैं।
- बेरोजगारी की स्थिति:बिहार में बेरोजगारी पहले से ज्यादा है, ऐसे में बाहरी उम्मीदवारों के चयन से संकट बढ़ता है।
- स्थानीय प्रतिनिधित्व:स्थानीय शिक्षक छात्रों को बेहतर समझते हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता और संस्थानों की स्थिरता बढ़ती है।
आगे की राह:
- भर्ती में पारदर्शिता: चयन प्रक्रिया में निष्पक्षता और जवाबदेही तय कर योग्य उम्मीदवारों को ही अवसर दिए जाएं।
- शिक्षकों का गुणवत्ता प्रशिक्षण: स्थानीयता के साथ-साथ आधुनिक और प्रभावी प्रशिक्षण से शिक्षकों की दक्षता बढ़ाना जरूरी है।
- स्कूलों का बुनियादी ढांचा सुधारें: भवन, पुस्तकालय, लैब और डिजिटल संसाधनों को सशक्त बनाना होगा।
- पाठ्यक्रम और मूल्यांकन में नवाचार: समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए नया पाठ्यक्रम और निष्पक्ष मूल्यांकन प्रणाली अपनानी चाहिए।