DRDO Quantum Key Distribution Technology Test का सफल परीक्षण, क्वांटम-सिक्योर कम्युनिकेशन क्षेत्र में भारत की बढ़ी क्षमता
संदर्भ:
हाल ही में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा में क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन (Quantum Key Distribution – QKD) तकनीक का एक गतिशील और लाइव नेटवर्क पर सफल परीक्षण किया।
क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन (QKD) तकनीक क्या हैं?
- परिचय: क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन (QKD) एक अत्याधुनिक सुरक्षित संचार पद्धति (Secure Quantum Communication) है, जो क्वांटम मैकेनिक्स (Quantum Mechanics) के सिद्धांतों पर आधारित है।
- यह दो पक्षों (सेंडर और रिसीवर) को एक विशिष्ट, यादृच्छिक (Random) और गुप्त डिजिटल कुंजी (Cryptographic Key) उत्पन्न करने की अनुमति देती है। इस कुंजी का उपयोग संदेशों को एन्क्रिप्ट और डिक्रिप्ट करने के लिए किया जाता है।
- उद्देश्य: इसका प्राथमिक उद्देश्य “अशर्त सुरक्षा” (Unconditional Security) प्रदान करना है।
- इतिहास: QKD की थ्योरी सबसे पहले 1984 में भौतिक विज्ञानी चार्ल्स बेनेट (Charles Bennett) और गिल्स ब्रैसार्ड (Gilles Brassard) द्वारा प्रस्तावित की गई थी, जिसे BB84 प्रोटोकॉल कहा जाता है।
- भारत में इसके विकास की गति वर्ष 2020 में तेज हुई जब राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (National Quantum Mission) की रूपरेखा बनी।
- फरवरी 2022 में, DRDO और IIT-दिल्ली ने उत्तर प्रदेश में प्रयागराज और विंध्याचल के बीच 100 किमी से अधिक की दूरी पर पहली बार QKD का सफल परीक्षण किया था।
- घटक:
- क्वांटम चाैनल (Quantum Channel): वह भौतिक माध्यम (जैसे फाइबर-ऑप्टिक केबल या ओपन एयर फ्री-स्पेस) जिसके माध्यम से फोटॉन्स भेजे जाते हैं।
- क्वांटम ट्रांसमीटर और रिसीवर: फोटॉन्स को विशिष्ट ध्रुवीकरण (Polarization) के साथ उत्पन्न और प्रोसेस करने वाले लेजर और डिटेक्टर उपकरण।
- क्वांटम बिट एरर रेट (QBER) प्रोसेसर: यह घटक संचार के दौरान त्रुटियों के अनुपात को मापता है ताकि हैकर की उपस्थिति का विश्लेषण किया जा सके।
- कार्यप्रणाली: पारंपरिक एन्क्रिप्शन गणितीय जटिलताओं (Mathematical Algorithms) पर काम करता है, जिसे शक्तिशाली कंप्यूटरों द्वारा डिकोड या हैक किया जा सकता है। इसके विपरीत, QKD प्रकाश के कणों यानी फोटॉन्स (Photons) के माध्यम से डेटा संचारित करता है।
- नो-क्लोनिंग थ्योरम (No-Cloning Theorem): क्वांटम भौतिकी का यह नियम कहता है कि किसी अज्ञात क्वांटम स्टेट की सटीक कॉपी नहीं बनाई जा सकती।
- जासूसी का पता लगाना (Eavesdropping Detection): यदि कोई तीसरा पक्ष (हैकर या जासूस) इन फोटॉन्स को बीच में रोकने या मापने की कोशिश करता है, तो फोटॉन्स की क्वांटम स्थिति तुरंत बदल जाती है। इससे डेटा में गड़बड़ी (Error) उत्पन्न होती है, और सेंडर व रिसीवर को तुरंत पता चल जाता है कि संचार के साथ छेड़छाड़ हुई है।
डीआरडीओ का नवीनतम परीक्षण: चांदीपुर
- स्थान: यह ऐतिहासिक परीक्षण 14 अक्टूबर 2026 को ओडिशा के प्रूफ एंड एक्सपेरिमेंटल एस्टेब्लिशमेंट (PXE), चांदीपुर में एक लाइव ऑपरेशंनल नेटवर्क पर किया गया।
- निर्माता: इस QKD प्लेटफॉर्म को डीआरडीओ के माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज, कंप्यूटेशनल सिस्टम्स एंड साइबर सिक्योरिटी (MCC) क्लस्टर द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया गया है।
- बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप टैकबिट लैब्स (Taqbit Labs) इस परियोजना में प्रोडक्शन पार्टनर है।
- नतीजे:
- हथियार डेटा की सुरक्षा: इस परीक्षण में आर्टिलरी (तोपखाने) और बख्तरबंद हथियारों के परीक्षण के दौरान उत्पन्न होने वाले रीयल-टाइम क्रिटिकल ऑब्जर्वेशन और टेलीमेट्री डेटा (Telemetry Data) को सफलतापूर्वक सुरक्षित किया गया।
- तकनीकी सटीकता: इससे पहले जुलाई 2026 के सैन्य फील्ड ट्रायल में इसे 100 किमी के फाइबर लिंक पर टेस्ट किया गया था, जहाँ 26 डेसिबल (dB) के सिग्नल लॉस के बावजूद 6% का QBER और 5 kilobits per second की सुरक्षित की-रेट (Secure Key Rate) हासिल की गई थी, जो वॉयस और टेक्स्ट एन्क्रिप्शन के लिए पर्याप्त है।
भारत के लिए इसका रणनीतिक महत्व:
- हैक-प्रूफ मिलिट्री नेटवर्क (Hack-proof Military Network): युद्ध या हथियार परीक्षण के समय टेलीमेट्री और खुफिया डेटा का रिसाव राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए घातक हो सकता है। यह तकनीक सैन्य संचार को अभेद्य बनाती है।
- सॉवरेन क्वांटम सुरक्षा (Sovereign Quantum Security): विदेशी एन्क्रिप्शन सॉफ्टवेयर और प्रणालियों पर निर्भरता पूरी तरह खत्म होगी, जिससे आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) के तहत रक्षा प्रौद्योगिकियों का स्वदेशीकरण सुनिश्चित होगा।
- भविष्य के खतरों से सुरक्षा: भविष्य में जब शक्तिशाली क्वांटम कंप्यूटर वर्तमान की सभी डिजिटल बैंकिंग और सुरक्षा प्रणालियों (RSA एन्क्रिप्शन) को तोड़ने में सक्षम होंगे, तब यह तकनीक भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षा कवच (Quantum-Proofing) प्रदान करेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: DRDO की Quantum Key Distribution (QKD) तकनीक क्या है?
उत्तर: यह क्वांटम मैकेनिक्स के सिद्धांतों पर आधारित एक स्वदेशी सुरक्षित संचार प्रणाली (Quantum Cryptography India) है, जो डेटा ट्रांसफर के लिए हैक-प्रूफ डिजिटल कुंजियाँ उत्पन्न करती है।
प्रश्न 2: DRDO ने QKD तकनीक का सफल परीक्षण क्यों किया?
उत्तर: मिसाइल, तोपखाने और सैन्य परीक्षणों के दौरान साझा होने वाले रीयल-टाइम संवेदनशील टेलीमेट्री डेटा को बाहरी जासूसी और साइबर हमलों से सुरक्षित करने के लिए यह परीक्षण किया गया।
प्रश्न 3: Quantum Key Distribution तकनीक कैसे काम करती है?
उत्तर: यह फाइबर या मुक्त आकाश के माध्यम से प्रकाश कणों (फोटॉन्स) के रूप में कोडेड कुंजियाँ भेजती है, जिन्हें भौतिकी के नियमों के कारण कॉपी या हैक नहीं किया जा सकता।
प्रश्न 4: QKD तकनीक से सुरक्षित Communication कैसे संभव होता है?
उत्तर: यदि कोई तीसरा पक्ष नेटवर्क में ताक-झांक (Eavesdropping) करने की कोशिश करता है, तो क्वांटम की नाजुक स्थिति बदल जाती है, जिससे सिस्टम तुरंत अलर्ट हो जाता है।
प्रश्न 5: Quantum-Secure Communication पारंपरिक Encryption से कैसे अलग है?
उत्तर: पारंपरिक एन्क्रिप्शन गणितीय समीकरणों पर निर्भर होता है जिसे सुपरकंप्यूटर क्रैक कर सकते हैं, जबकि क्वांटम संचार भौतिकी के नियमों पर आधारित होने के कारण सैद्धांतिक रूप से अटूट है।
प्रश्न 6: भारत की Defence Security में QKD तकनीक की क्या भूमिका है?
उत्तर: यह राष्ट्रीय सुरक्षा अवसंरचना और सीमाओं पर तैनात संचार प्रणालियों को अभेद्य बनाकर दुश्मन देशों की इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस और साइबर आक्रामक क्षमताओं को विफल करती है।
