Dulhasti Stage-II Hydroelectric Project

संदर्भ:
हाल ही में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने जम्मू-कश्मीर में चेनाब नदी पर स्थित 260 मेगावाट की दुलहस्ती स्टेज-II जलविद्युत परियोजना को वन मंजूरी दे दी है। जो भारत की रणनीतिक और ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।
दुलहस्ती चरण-II जलविद्युत परियोजना के बारे मे:
दुलहस्ती चरण-II जलविद्युत परियोजना जम्मू और कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में चिनाब नदी पर प्रस्तावित एक महत्वपूर्ण जलविद्युत परियोजना है। यह वर्तमान में परिचालन में रही 390 मेगावाट की दुलहस्ती चरण-I परियोजना का विस्तार है।
- क्षमता: इस परियोजना की कुल स्थापित क्षमता 260 मेगावाट (130 मेगावाट की 2 इकाइयां) है।
- उद्देश्य: इसका लक्ष्य भूमिगत पावरहाउस के माध्यम से 90% भरोसेमंद वर्ष में 803.33 मिलियन यूनिट वार्षिक ऊर्जा उत्पादन करना है।
- प्रकार: यह एक ‘रन-ऑफ-द-रिवर’ (Run-of-the-river) परियोजना है, जिसका अर्थ है कि यह नदी के प्राकृतिक प्रवाह का उपयोग करके बिजली पैदा करती है और इसके लिए बड़े जलाशय की आवश्यकता नहीं होती।
- कार्यान्वयन एजेंसी: इसका विकास NHPC लिमिटेड (राष्ट्रीय जलविद्युत निगम) द्वारा ‘बिल्ड, ओन, ऑपरेट एंड ट्रांसफर’ (BOOT) आधार पर किया जा रहा है।
- लागत: परियोजना की अनुमानित लागत ₹3,200 करोड़ से अधिक है।
- तकनीकी संरचना: इसमें 3.68 किमी लंबी हेड रेस टनल (HRT) और एक भूमिगत पावरहाउस शामिल होगा। यह चरण-I के मौजूदा बुनियादी ढांचे का उपयोग करेगी।
परियोजना का महत्व:
- ऊर्जा सुरक्षा: जम्मू-कश्मीर में बिजली की भारी कमी रहती है। यह परियोजना केंद्र शासित प्रदेश को ग्रिड स्थिरता और स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करेगी।
- क्षेत्रीय विकास: किश्तवाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास, रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलने की उम्मीद है।
- नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य: भारत ने 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य रखा है। जलविद्युत परियोजनाएं ‘बेस लोड’ ऊर्जा प्रदान करने में सहायक होती हैं।
- लाभार्थी राज्य: इस परियोजना से उत्पन्न बिजली उत्तरी ग्रिड को आपूर्ति की जाएगी, जिससे जम्मू-कश्मीर के साथ ही पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली सहित कई राज्यों को लाभ होगा।
भू-राजनीतिक प्रभाव:
- पर्यावरण मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (EAC) ने सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty – IWT) के निलंबित किए जाने (अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद) के बाद इस परियोजना को मंजूरी दी है।
- दुलहस्ती स्टेज-II जैसी परियोजनाओं को मंजूरी देना यह संकेत देता है कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय जल अधिकारों के मामले में रक्षात्मक होने के बजाय अपने वैध अधिकारों का पूर्ण उपयोग करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
विशेष: 1960 की सिंधु जल संधि के तहत, तीन पूर्वी नदियों (रावी, ब्यास, सतलुज) का नियंत्रण भारत के पास है, जबकि तीन पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चिनाब) का जल पाकिस्तान को आवंटित है। हालांकि, भारत को पश्चिमी नदियों पर बिजली उत्पादन के लिए ‘रन-ऑफ-द-रिवर’ परियोजनाएं बनाने का सीमित अधिकार है।
