विद्युत संशोधन विधेयक 2025 (Electricity Amendment Bill 2025) | UPSC Preparation
Electricity Amendment Bill 2025
संदर्भ:
वर्तमान में भारत की तेजी से बदलती ऊर्जा प्रणाली की मांगों को पूरा करने के संदर्भ में भारत सरकार द्वारा विद्युत (संशोधन) विधेयक, 2025 लाया गया है। इस बिल में वित्तीय अनुशासन, उपभोक्ता अधिकारों, और पारदर्शिता को बढ़ाने हेतु कई प्रस्ताव लाए गए हैं, जिनका उद्देश्य Viksit Bharat 2047 की ऊर्जा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एक दृढ़, कुशल और उपभोक्ता-केंद्रित बिजली प्रणाली स्थापित करना है।
संशोधन की आवश्यकता क्यों?
वितरण कंपनियों की वित्तीय संक: भारत के अधिकांश DISCOMs उच्च AT&C हानियों, बिलिंग अक्षमता और बढ़ते ऋण के कारण वित्तीय दबाव में हैं। ये समस्याएँ बिजली क्षेत्र के विकास को सीमित करती हैं।
प्रतिस्पर्धा का अभाव: उपभोक्ता केवल एक ही वितरण कंपनी पर निर्भर रहते हैं, जिससे सेवा गुणवत्ता में सुधार की गुंजाइश कम हो जाती है।
क्रॉस-सब्सिडी का असंतुलन: उद्योग और रेलवे अधिक लागत वहन करते हैं, जिससे भारतीय विनिर्माण की वैश्विक प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती है।
बुनियादी ढांचे: अलग-अलग नेटवर्क का निर्माण लागत अलग-अलग होने से कुल लागत में वृद्धि होती है, जिससे संसाधनों की बर्बादी होती है।
विधेयक के प्रस्तावित प्रावधान:
संरचनात्मक सुधार: अब एक ही क्षेत्र में कई वितरण लाइसेंसधारी काम कर सकेंगे। सभी कंपनियाँ साझा नेटवर्क का उपयोग करेंगी, जिससे लागत कम होगी।
Universal Service Obligation (USO): हर लाइसेंसधारी को सभी उपभोक्ताओं को बिना भेदभाव बिजली उपलब्ध करानी होगी। 1 मेगावाट से अधिक के उपभोक्ताओं के लिए राज्य सरकारों की सहमति से USO से छूट दी जा सकेगी।
Cost-Reflective Tariff: SERCs को ऐसे टैरिफ निर्धारित करने होंगे जो वास्तविक लागत के अनुरूप हों।
Section 65 के तहत Targeted Subsidies: किसानों और गरीब उपभोक्ताओं को सब्सिडी सीधे बजट में दिखाकर दी जाएगी। विनिर्माण और रेलवे को सस्ती और प्रतिस्पर्धी बिजली उपलब्ध होगी।
नेटवर्क दक्षता और अवसंरचना: सभी उपभोक्ताओं के लिए समान व नियोजित चार्ज। नेटवर्क विकास के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन सुनिश्चित किया जा सकेगा। पहली बार Energy Storage System (ESS) की परिभाषा और भूमिका उल्लेखित की गई है। यह नवीकरणीय ऊर्जा की विश्वसनीयता बढ़ाएगा।
Electricity Council की स्थापना: केंद्र और राज्यों के बीच नीति समन्वय को बेहतर बनाने के लिए इलेक्ट्रिसिटी काउंसिल की स्थापना की जाएगी।
SERCs के अधिकारों का विस्तार: नए प्रस्ताव के अनुसारमानकों का पालन न करने पर SERCs को दंड लगाने की शक्ति दी जाएगी। आवेदन में देरी होने पर सुओ-मोटो टैरिफ निर्धारण का अधिकार भी दिया जाएगा।
कानूनी स्पष्टता (Legal Clarity): Electric Line Authority का स्पष्ट उल्लेख। साथ ही भूमि हस्तांतरण, क्षतिपूर्ति, विवाद समाधान की सुव्यवस्थित व्यवस्था की जानी सुनिश्चित की जाएगी, जो Companies Act 2013 के अनुरूप होगी।
विधेयक का महत्व:
बिजली क्षेत्र का वित्तीय स्वास्थ्य: DISCOMs की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी, जिससे पूरे बिजली क्षेत्र की स्थिरता बढ़ेगी।
उद्योग प्रतिस्पर्धा में वृद्धि: सस्ती बिजली विनिर्माण क्षेत्र की लागत कम करेगी, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगा।
उपभोक्ता अधिकारों को मजबूती: उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा गुणवत्ता, कम कटौती और पारदर्शी टैरिफ मिलने की उम्मीद।
पर्यावरणीय लाभ: नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ेगी और ESS इसे और विश्वसनीय बनाएगा।
केंद्र–राज्य सहयोग में सुधार: Electricity Council ऊर्जा नीति को अधिक संघीय और समन्वित करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
भविष्य-तैयार बिजली प्रणाली: नेटवर्क साझा करने, बाजार विस्तार और प्रतिस्पर्धा से बिजली प्रणाली अधिक आधुनिक और लचीली बनेगी।
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विद्युत संशोधन विधेयक 2025 (Electricity Amendment Bill 2025) | UPSC Preparation
Electricity Amendment Bill 2025
संदर्भ:
वर्तमान में भारत की तेजी से बदलती ऊर्जा प्रणाली की मांगों को पूरा करने के संदर्भ में भारत सरकार द्वारा विद्युत (संशोधन) विधेयक, 2025 लाया गया है। इस बिल में वित्तीय अनुशासन, उपभोक्ता अधिकारों, और पारदर्शिता को बढ़ाने हेतु कई प्रस्ताव लाए गए हैं, जिनका उद्देश्य Viksit Bharat 2047 की ऊर्जा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एक दृढ़, कुशल और उपभोक्ता-केंद्रित बिजली प्रणाली स्थापित करना है।
संशोधन की आवश्यकता क्यों?
वितरण कंपनियों की वित्तीय संक: भारत के अधिकांश DISCOMs उच्च AT&C हानियों, बिलिंग अक्षमता और बढ़ते ऋण के कारण वित्तीय दबाव में हैं। ये समस्याएँ बिजली क्षेत्र के विकास को सीमित करती हैं।
प्रतिस्पर्धा का अभाव: उपभोक्ता केवल एक ही वितरण कंपनी पर निर्भर रहते हैं, जिससे सेवा गुणवत्ता में सुधार की गुंजाइश कम हो जाती है।
क्रॉस-सब्सिडी का असंतुलन: उद्योग और रेलवे अधिक लागत वहन करते हैं, जिससे भारतीय विनिर्माण की वैश्विक प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती है।
बुनियादी ढांचे: अलग-अलग नेटवर्क का निर्माण लागत अलग-अलग होने से कुल लागत में वृद्धि होती है, जिससे संसाधनों की बर्बादी होती है।
विधेयक के प्रस्तावित प्रावधान:
संरचनात्मक सुधार: अब एक ही क्षेत्र में कई वितरण लाइसेंसधारी काम कर सकेंगे। सभी कंपनियाँ साझा नेटवर्क का उपयोग करेंगी, जिससे लागत कम होगी।
Universal Service Obligation (USO): हर लाइसेंसधारी को सभी उपभोक्ताओं को बिना भेदभाव बिजली उपलब्ध करानी होगी। 1 मेगावाट से अधिक के उपभोक्ताओं के लिए राज्य सरकारों की सहमति से USO से छूट दी जा सकेगी।
Cost-Reflective Tariff: SERCs को ऐसे टैरिफ निर्धारित करने होंगे जो वास्तविक लागत के अनुरूप हों।
Section 65 के तहत Targeted Subsidies: किसानों और गरीब उपभोक्ताओं को सब्सिडी सीधे बजट में दिखाकर दी जाएगी। विनिर्माण और रेलवे को सस्ती और प्रतिस्पर्धी बिजली उपलब्ध होगी।
नेटवर्क दक्षता और अवसंरचना: सभी उपभोक्ताओं के लिए समान व नियोजित चार्ज। नेटवर्क विकास के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन सुनिश्चित किया जा सकेगा। पहली बार Energy Storage System (ESS) की परिभाषा और भूमिका उल्लेखित की गई है। यह नवीकरणीय ऊर्जा की विश्वसनीयता बढ़ाएगा।
Electricity Council की स्थापना: केंद्र और राज्यों के बीच नीति समन्वय को बेहतर बनाने के लिए इलेक्ट्रिसिटी काउंसिल की स्थापना की जाएगी।
SERCs के अधिकारों का विस्तार: नए प्रस्ताव के अनुसार मानकों का पालन न करने पर SERCs को दंड लगाने की शक्ति दी जाएगी। आवेदन में देरी होने पर सुओ-मोटो टैरिफ निर्धारण का अधिकार भी दिया जाएगा।
कानूनी स्पष्टता (Legal Clarity): Electric Line Authority का स्पष्ट उल्लेख। साथ ही भूमि हस्तांतरण, क्षतिपूर्ति, विवाद समाधान की सुव्यवस्थित व्यवस्था की जानी सुनिश्चित की जाएगी, जो Companies Act 2013 के अनुरूप होगी।
विधेयक का महत्व:
बिजली क्षेत्र का वित्तीय स्वास्थ्य: DISCOMs की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी, जिससे पूरे बिजली क्षेत्र की स्थिरता बढ़ेगी।
उद्योग प्रतिस्पर्धा में वृद्धि: सस्ती बिजली विनिर्माण क्षेत्र की लागत कम करेगी, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगा।
उपभोक्ता अधिकारों को मजबूती: उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा गुणवत्ता, कम कटौती और पारदर्शी टैरिफ मिलने की उम्मीद।
पर्यावरणीय लाभ: नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ेगी और ESS इसे और विश्वसनीय बनाएगा।
केंद्र–राज्य सहयोग में सुधार: Electricity Council ऊर्जा नीति को अधिक संघीय और समन्वित करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
भविष्य-तैयार बिजली प्रणाली: नेटवर्क साझा करने, बाजार विस्तार और प्रतिस्पर्धा से बिजली प्रणाली अधिक आधुनिक और लचीली बनेगी।
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