Electronics Components Manufacturing Scheme
संदर्भ:
हाल ही में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तीसरे चरण के तहत 22 अतिरिक्त प्रस्तावों को मंजूरी दी है। जो भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) का परिचय:
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- इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) केंद्र प्रायोजित पहल है, जिसका लक्ष्य देश के इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है।
- इसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 28 मार्च, 2025 को ₹22,919 करोड़ के कुल परिव्यय के साथ मंजूरी दी थी और 8 अप्रैल, 2025 को अधिसूचित किया गया था।
- उद्देश्य:
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- घरेलू मूल्यवर्धन (Domestic Value Addition – DVA) बढ़ाना: आयात पर निर्भरता कम करना, जो वर्तमान में कई महत्वपूर्ण घटकों के लिए 80-85% है।
- निवेश आकर्षित करना: वैश्विक और घरेलू दोनों कंपनियों से विनिर्माण मूल्य श्रृंखला (value chain) में निवेश आकर्षित करना।
- वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के साथ एकीकरण: भारतीय फर्मों को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (Global Value Chains – GVCs) में एकीकृत करना।
- रोजगार सृजन: उच्च-कुशल प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा करना।
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- संरचना: ECMS एक उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन (Production-Linked Incentive – PLI) योजना के समान है, लेकिन यह विशेष रूप से घटकों पर केंद्रित है। यह विभिन्न प्रकार के प्रोत्साहन प्रदान करती है। जो ‘पहले आओ, पहले पाओ’ (first-come, first-served) आधार पर दिए जाते हैं।
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- टर्नओवर-लिंक्ड प्रोत्साहन: छह साल की अवधि के लिए (एक वर्ष की गर्भाधान अवधि/gestation period के साथ), वृद्धिशील बिक्री पर आधारित होता है।
- पूंजीगत व्यय (Capex) – लिंक्ड प्रोत्साहन: संयंत्र और मशीनरी, उपकरण आदि में निवेश पर 25% तक का वित्तीय प्रोत्साहन।
- हाइब्रिड प्रोत्साहन: कुछ विशिष्ट उन्नत खंडों के लिए टर्नओवर और कैपेक्स दोनों का संयोजन।
योजना का तीसरा चरण:
- 2 जनवरी, 2026 को MeitY ने ECMS के तीसरे चरण के तहत 22 प्रस्तावों को मंजूरी दी। इसमें अनुमोदित प्रस्तावों की संख्या: 22 आवेदन, अनुमानित निवेश: ₹41,863 करोड़ और अनुमानित उत्पादन: ₹2,58,152 करोड़ (अगले 6 वर्षों में)।
- इस चरण के अनुमोदन के साथ, योजना के तहत कुल 46 परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है, जिसमें कुल निवेश ₹54,567 करोड़ है और लगभग 51,000 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।
- इस चरण में अनुमोदित परियोजनाओं में 11 लक्ष्य खंड उत्पाद शामिल हैं, जिनका उपयोग मोबाइल, दूरसंचार, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव और आईटी हार्डवेयर जैसे विभिन्न क्षेत्रों में होता है:
- बेयर कंपोनेंट्स (Bare Components): प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCBs, जिसमें HDI भी शामिल है), कैपेसिटर, कनेक्टर, एनक्लोजर (मोबाइल/आईटी हार्डवेयर के लिए), और ली-आयन सेल।
- उप-असेंबली (Sub-assemblies): कैमरा मॉड्यूल, डिस्प्ले मॉड्यूल।
- आपूर्ति श्रृंखला सामग्री (Supply Chain Items): कॉपर क्लैड लैमिनेट (CCL), एल्युमिनियम एक्सट्रूज़न, एनोड सामग्री।
- इन परियोजनाओं को आंध्र प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सहित आठ राज्यों में स्थापित किया जाएगा।
महत्व:
- आत्मनिर्भर भारत: यह योजना आयात प्रतिस्थापन (import substitution) के माध्यम से घरेलू क्षमताओं का निर्माण करके ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण को साकार करती है।
- विनिर्माण को प्रोत्साहन: यह भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र को असेंबली-आधारित विनिर्माण से उच्च-मूल्य के घटक विनिर्माण की ओर ले जाती है, जिससे भारत एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित होता है।
- आर्थिक विकास और रोजगार: भारी निवेश और उत्पादन क्षमता से आर्थिक विकास को गति मिलेगी और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
- अन्य योजनाओं के साथ तालमेल (Synergy): ECMS अन्य प्रमुख पहलों, जैसे कि PLI योजना, भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM), और SPECS योजना के साथ मिलकर काम करती है।
- निर्यात क्षमता: घरेलू स्तर पर मजबूत विनिर्माण आधार भारत के निर्यात को बढ़ावा देगा; इलेक्ट्रॉनिक्स पहले ही भारत का तीसरा सबसे बड़ा निर्यातक क्षेत्र बन चुका है।

