Equator Prize 2025
संदर्भ:
कर्नाटक के धारवाड़ जिले के तीरथा गांव की बीबी फातिमा महिला स्व-सहायता समूह (SHG) ने संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा प्रदान किया जाने वाला इक्वेटर पुरस्कार 2025 जीता है।
(Equator Prize 2025) इक्वेटर पुरस्कार 2025 :
- शुरुआत – 2002 में लॉन्च किया गया।
- उद्देश्य – यह वार्षिक पुरस्कार आदिवासी समुदायों और स्थानीय समूहों द्वारा संचालित प्रकृति-आधारित समाधानों को सम्मानित करता है, जो सतत विकास और पारिस्थितिक लचीलापन (ecological resilience) को बढ़ावा देते हैं।
- उपाधि – इसे जैव विविधता संरक्षण का नोबेल पुरस्कार भी कहा जाता है।
Bibi Fathima Swa Sahaya Sangha:
- स्थान – कर्नाटक
- नेतृत्व – महिला-नेतृत्व वाली पहल
- लाभार्थी – 30 गांवों में 5,000 से अधिक किसान
- मुख्य कार्य –
- बाजरा-आधारित बहु-फसली खेती (millet-based multi-cropping)
- बीज बैंक (Seed Banks)
- सौर ऊर्जा से संचालित प्रोसेसिंग यूनिट्स
- प्रभाव – पारंपरिक ज्ञान, पुनर्जनन कृषि (regenerative agriculture) और नवीकरणीय ऊर्जा को मिलाकर
- जैव विविधता की पुनर्स्थापना
- खाद्य सुरक्षा में सुधार
- हाशिए पर मौजूद महिलाओं और युवाओं को कृषि-उद्यमी (agripreneurs) के रूप में सशक्त बनाना
- जलवायु लचीलापन और समानता को बढ़ावा