Farakka Barrage Project

संदर्भ:
हाल ही में जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग के सचिव श्री वी. एल. कांठा राव ने पश्चिम बंगाल स्थित फरक्का बैराज परियोजना (FBP) का दो दिवसीय विस्तृत दौरा और समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने बीरनगर क्षेत्र के पास 10वें सीमांत तटबंध के नष्ट हुए हिस्से का विशेष निरीक्षण किया गया।
फरक्का बैराज परियोजना (Farakka Barrage Project – FBP):
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- उद्देश्य: मुख्य उद्देश्य गंगा के पानी का एक हिस्सा (लगभग 40,000 क्यूसेक) भागीरथी-हुगली नदी में मोड़ना था ताकि कोलकाता बंदरगाह को गाद (Silt) से मुक्त रखा जा सके।
- अवस्थिति: यह पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में गंगा नदी पर स्थित है, जो बांग्लादेश सीमा से मात्र 18 किमी दूर है।
- निर्माण: इसका निर्माण 1961 में शुरू हुआ और 1975 में परिचालन में आया।
प्रमुख घटक:
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- मुख्य बैराज: 2,245 मीटर लंबा, जिसमें 109 गेट हैं।
- फीडर नहर: 38.38 किमी लंबी यह नहर गंगा के पानी को हुगली नदी तक ले जाती है।
- जंगीपुर बैराज: यह फीडर नहर में पानी के प्रवाह को नियंत्रित करता है।
महत्व:
- राष्ट्रीय सुरक्षा: बैराज के ऊपर स्थित रेल-सह-सड़क पुल उत्तर-पूर्वी भारत (Seven Sisters) को शेष देश से जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है। यह सामरिक दृष्टि से सेना और रसद की आवाजाही के लिए अनिवार्य है।
- पेयजल और औद्योगिक उपयोग: यह हुगली नदी के खारेपन को कम कर कोलकाता महानगर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों को मीठा पानी उपलब्ध कराता है।
- अंतर्राष्ट्रीय जल कूटनीति: यह भारत और बांग्लादेश के बीच 1996 की गंगा जल संधि का आधार है। दिसंबर 2026 में इस संधि की समाप्ति और संभावित नवीनीकरण के कारण इसका महत्व वर्तमान में चरम पर है।
- अंतर्देशीय जलमार्ग: यह राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (NW-1) का एक अभिन्न हिस्सा है, जो हल्दिया से प्रयागराज तक माल ढुलाई को सुगम बनाता है।
