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मादा चीता ज्वाला ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया(Female cheetah Jwala birth to five healthy cubs) | UPSC Preparation

Female cheetah Jwala birth to five healthy cubs

Female cheetah Jwala birth to five healthy cubs

संदर्भ:

मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान (KNP) में प्रोजेक्ट चीता के तहत नामीबिया से लाई गई मादा चीता ‘ज्वाला’ (पूर्व नाम सियाया) ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। यह ज्वाला का भारत में तीसरा सफल प्रसव है, जिसने उसे ‘सुपर मॉम’ का खिताब दिलाया है। 

  • सितंबर 2022: नामीबियाई चीता ज्वाला 17 सितंबर 2022 को कूनो लाई गई थी। 
  • मार्च 2023: ज्वाला ने अपने पहले प्रसव में 4 शावकों को जन्म दिया था, जिनमें से केवल एक (मादा चीता ‘मुखी’) जीवित बची।
  • जनवरी 2024: दूसरे प्रसव में उसने 4 शावकों को जन्म दिया, जिनमें से 3 जीवित हैं।

प्रमुख उपलब्धियां:

  • कुल जनसंख्या: भारत में चीतों की कुल संख्या अब 53 हो गई है (गांधी सागर अभयारण्य सहित)।
  • भारतीय धरती पर जन्म: भारत में जन्मे जीवित शावकों की संख्या अब 33 तक पहुंच गई है।
  • सफल प्रसव: यह भारतीय भूमि पर चीतों का 10वां सफल प्रसव (Litter) दर्ज किया गया है।
  • अनुकूलन का प्रमाण: ज्वाला का तीसरी बार मां बनना यह दर्शाता है कि अफ्रीकी चीते भारतीय जलवायु और कूनो के पारिस्थितिकी तंत्र में पूरी तरह ढल चुके हैं। 

प्रोजेक्ट चीता (Project Cheetah) क्या हैं?

  • परिचय: प्रोजेक्ट चीता (Project Cheetah) दुनिया की पहली अंतरमहाद्वीपीय बड़े जंगली मांसाहारी जीव के स्थानांतरण की परियोजना है। 
  • लॉन्च: भारत में चीता 1952 में आधिकारिक रूप से विलुप्त घोषित किया गया था। इस प्रजाति की पुनर्स्थापना के लिए 17 सितंबर 2022 को कूनो नेशनल पार्क, मध्य प्रदेश में प्रोजेक्ट चीता लॉन्च किया गया।
  • प्रमुख उद्देश्य: इसका लक्ष्य भारत में चीतों की एक आत्मनिर्भर आबादी (Self-sustaining population) स्थापित करना और उपेक्षित घास के मैदानों (Grasslands) के पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करना है।
  • कार्यान्वयन एजेंसियां: परियोजना का संचालन राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा किया जा रहा है, जिसमें भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) तकनीकी सहायता प्रदान करता है।
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग: अब तक तीन देशों—नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना—के साथ समझौता हुआ है। हाल ही में 28 फरवरी 2026 को बोत्सवाना से 9 नए चीते लाए गए हैं।
  • विस्तार: कूनो के बाद, गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य को दूसरे घर के रूप में विकसित किया गया है। भविष्य में गुजरात के बन्नी घास के मैदान और मध्य प्रदेश के नौरादेही में भी विस्तार की योजना है।
  • प्रमुख प्रजाति: चीता को एक ‘अम्ब्रेला स्पीशीज’ माना गया है, जिसका संरक्षण अन्य घास के मैदानों के जीवों और जैव विविधता को बचाने में मदद करता है।
  • सामुदायिक भागीदारी: स्थानीय समुदायों को जोड़ने के लिए 450 से अधिक ‘चीता मित्र’ नियुक्त किए गए हैं, जो मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और जागरूकता बढ़ाने का कार्य करते हैं।
कूनो राष्ट्रीय उद्यान (KNP):

  • अवस्थिति: मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में विंध्याचल पर्वत श्रृंखला के उत्तरी भाग में स्थित है।
  • नामकरण: उद्यान के बीच से बहने वाली चम्बल की सहायक ‘कूनो नदी’ के नाम पर इसका नाम रखा गया है।
  • विकास क्रम: 1981 में वन्यजीव अभयारण्य के रूप में स्थापित, जिसे दिसंबर 2018 में राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा मिला।
  • क्षेत्रफल: इसका मुख्य क्षेत्र (Core Area) लगभग 748 वर्ग किमी और बफर ज़ोन सहित कुल क्षेत्रफल 1,235 वर्ग किमी है।
  • वनस्पति: यहाँ मुख्य रूप से करधई, सलाई और खैर के वृक्षों वाले ‘उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन’ पाए जाते हैं।
  • पारिस्थितिकी: यह मालवा पठार और बुंदेलखंड की उच्च भूमि के बीच एक संक्रमण क्षेत्र (Transitional Zone) है।
  • वन्यजीव विविधता: चीता के अलावा यहाँ तेंदुआ, भेड़िया, लकड़बग्घा, चौसिंगा, चिंकारा और 200+ पक्षी प्रजातियाँ मौजूद हैं।
  • ऐतिहासिक महत्त्व: यहाँ पालपुर, आमेट और मैटोनी जैसे प्राचीन किले स्थित हैं जो पूर्व रियासतों के अवशेष हैं।

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