Financial Stability Report
Financial Stability Report –
संदर्भ:
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा जुलाई 2025 में जारी वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (Financial Stability Report – FSR) के अनुसार, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और भूराजनैतिक तनावों के बावजूद भारत दुनिया की आर्थिक वृद्धि का एक प्रमुख प्रेरक (growth driver) बना हुआ है।
रिपोर्ट की प्रमुख बिन्दु–
- व्यापक आर्थिक मजबूती:
- भारत वैश्विक विकास का प्रमुख इंजन बना हुआ है; FY 2026 के लिए GDP वृद्धि दर 6.5% रहने का अनुमान।
- यह वृद्धि मजबूत घरेलू बुनियादी ढांचे और संतुलित नीतियों पर आधारित है।
- बाहरी प्रभावों और जलवायु जोखिमों के बावजूद, मुद्रास्फीति नियंत्रण में बनी हुई है।
- CPI (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक) मई 2025 में 2.8% पर पहुंचा – फरवरी 2019 के बाद सबसे कम, अप्रैल 2025 में यह 3.2% था।
- वित्तीय प्रणाली की स्थिति:
- बैंकिंग और गैर-बैंकिंग क्षेत्र दोनों में मजबूत पूंजी भंडार, कम NPA और स्वस्थ लाभप्रदता बनी हुई है।
- कॉर्पोरेट क्षेत्र की बैलेंस शीट सुदृढ़ है, जिससे समग्र आर्थिक स्थिरता को बल मिला है।
- तनाव परीक्षण के नतीजे:
- Scheduled Commercial Banks (SCBs) गंभीर आर्थिक झटकों के परिदृश्य में भी अच्छी तरह पूंजीकृत हैं।
- NBFCs में भी मजबूत पूंजी भंडार, बेहतर संपत्ति गुणवत्ता (asset quality), और मजबूत कमाई के संकेत मिले हैं।
- म्युचुअल फंड, क्लियरिंग कॉरपोरेशन, और बीमा क्षेत्र भी मजबूत स्थिति में हैं; इनकी solvency ratios नियामक मानकों से ऊपर हैं।
वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (एफएसआर) के बारे में:
- प्रकाशन संस्था: यह रिपोर्ट भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा वर्ष में दो बार (biannual) प्रकाशित की जाती है।
- प्रमुख उद्देश्य: यह रिपोर्ट भारतीय वित्तीय प्रणाली की मजबूती (resilience) और वित्तीय स्थिरता पर संभावित खतरों का आकलन प्रस्तुत करती है।
स्रोत: यह रिपोर्ट, वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद (FSDC) की उप-समिति द्वारा किए गए सामूहिक मूल्यांकन (collective assessment) पर आधारित होती है।
महत्व:
- बैंकों, NBFCs, बीमा कंपनियों, और अन्य वित्तीय संस्थानों की जोखिम उठाने की क्षमता और स्थिरता को मापती है।
- यह नीति निर्माताओं को समय रहते जोखिमों की पहचान और समुचित हस्तक्षेप की दिशा में मार्गदर्शन देती है।
- वित्तीय बाजारों में पारदर्शिता और विश्वास बनाए रखने में सहायक है।
वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद:
स्थापना: वर्ष 2010 में भारत सरकार द्वारा एक गैर-सांविधिक (non-statutory) शीर्ष निकाय के रूप में गठित।
अध्यक्ष: केंद्रीय वित्त मंत्री इसके अध्यक्ष होते हैं।
सदस्य:
- भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर
- SEBI, IRDAI, PFRDA के अध्यक्ष
- FMC (अब SEBI में विलय)
- वित्त सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी
- वर्ष 2018 में इसका दायरा बढ़ाया गया, जिससे अधिक समन्वय सुनिश्चित किया जा सके।
मुख्य कार्य:
- वित्तीय स्थिरता को बढ़ावा देना और बनाए रखना
- वित्तीय क्षेत्र का विकास सुनिश्चित करना
- विनियामक संस्थाओं के बीच समन्वय को बढ़ावा देना
- वित्तीय साक्षरता, वित्तीय समावेशन, और व्यापक आर्थिक निगरानी (macroprudential supervision) से जुड़ी समस्याओं का समाधान करना
महत्व:
- यह भारत की वित्तीय प्रणाली में जोखिमों की निगरानी और नीति समन्वय का एक प्रमुख मंच है।
- इसके अंतर्गत, Financial Stability Report (FSR) जैसी प्रमुख रिपोर्टें तैयार की जाती हैं, जो नीति निर्माण में सहायक होती हैं।