First BRICS Sherpa Meeting held in India
संदर्भ:
हाल ही में भारत की अध्यक्षता में वर्ष 2026 की पहली BRICS शेरपा बैठक का आयोजन नई दिल्ली में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह बैठक भारत की 2026 की अध्यक्षता के औपचारिक रोडमैप को तैयार करने की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम है।
BRICS शेरपा बैठक:
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- मेजबान: भारत (चौथी बार: 2012, 2016, 2021 के बाद)।
- अध्यक्षता: भारत के ब्रिक्स शेरपा और विदेश मंत्रालय में सचिव (आर्थिक संबंध) सुधाकर दलेला ने की। उनका सहयोग भारत के सूस-शेरपा शंभू एल. हक्की ने किया।
- प्रतिभागी: इसमें 10 सदस्य देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और यूएई) के प्रतिनिधियों के साथ-साथ ‘भागीदार देशों’ (जैसे बेलारूस) ने भी पहली बार भाग लिया।
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मुख्य विषय: भारत ने इस वर्ष के लिए एक अत्यंत व्यापक और भविष्योन्मुखी विषय निर्धारित किया है: लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण।
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- यह थीम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘जन-केंद्रित’ (People-centric) और ‘मानवता-प्रथम’ (Humanity-first) दृष्टिकोण पर आधारित है।
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प्राथमिकताएं: बैठक के दौरान भारत ने अपनी अध्यक्षता के चार प्रमुख स्तंभों पर विस्तार से चर्चा की:
- डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI): भारत ने अपने UPI, आधार और डिजीलॉकर जैसे सफल मॉडलों को ब्रिक्स देशों के बीच साझा करने और वित्तीय समावेश बढ़ाने पर जोर दिया।
- वैश्विक शासन में सुधार: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) और बहुपक्षीय वित्तीय संस्थानों (IMF, World Bank) में व्यापक सुधार की मांग, ताकि उभरती अर्थव्यवस्थाओं को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।
- आतंकवाद विरोध और सुरक्षा: आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में सदस्य देशों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने के तंत्र को मजबूत करना।
- सतत विकास और जलवायु कार्रवाई: स्वच्छ ऊर्जा (Green Energy) और आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए सहयोग बढ़ाना।
बैठक की विशिष्ट विशेषताएं:
- सांस्कृतिक कूटनीति: शेरपाओं ने अक्षरधाम मंदिर और राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय का दौरा किया, जो भारत की सॉफ्ट पावर और सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन था।
- संस्थागत विकास: विस्तारित ब्रिक्स (10 देशों वाले समूह) के भीतर आंतरिक कार्यप्रणाली को सुव्यवस्थित करने और नए ‘पार्टनर कंट्री’ मॉडल पर चर्चा हुई।
- बहु-क्षेत्रीय सहयोग: स्वास्थ्य, कृषि, पर्यावरण और स्टार्टअप्स जैसे क्षेत्रों में साल भर होने वाली गतिविधियों का खाका पेश किया गया।
महत्व:
- ग्लोबल साउथ: विस्तारित ब्रिक्स प्रारूप में भारत की अध्यक्षता यह सुनिश्चित करने का अवसर है कि विकासशील देशों के हित (जैसे ऋण संकट और व्यापार बाधाएं) वैश्विक एजेंडे में शीर्ष पर रहें।
- चीन-भारत संतुलन: चीन के बढ़ते आर्थिक प्रभाव के बीच, भारत इस मंच का उपयोग एक ‘संतुलन शक्ति’ के रूप में कर रहा है। बैठक के हाशिये पर भारत-चीन रणनीतिक वार्ता भी आयोजित की गई।
- विस्तारित ब्रिक्स: 10 देशों के बड़े समूह में हितों के टकराव को कम करना और एक साझा सहमति बनाना भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक परीक्षा होगी।

