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अखिल भारतीय बाघ आकलन 2026 का पहला चरण शुरू हुआ (First phase of All India Tiger Estimation 2026 begins) | Apni Pathshala

First phase of All India Tiger Estimation 2026 begins

First phase of All India Tiger Estimation 2026 begins

संदर्भ:

हाल ही में थानथाई पेरियार वन्यजीव अभयारण्य में अखिल भारतीय बाघ आकलन 2026 (AITE-26) का पहला चरण शुरू हुआ, जो भारत के आवधिक राष्ट्रीय वन्यजीव निगरानी अभ्यास में एक महत्वपूर्ण कदम है।

अखिल भारतीय बाघ आकलन (AITE) 2026

  • परिचय: अखिल भारतीय बाघ आकलन (All India Tiger Estimation – AITE) दुनिया का सबसे बड़ा वन्यजीव निगरानी अभ्यास है। 
  • उद्देश्य: देश में बाघों की आबादी की स्थिति, सह-शिकारियों (जैसे तेंदुए, जंगली कुत्ते) और शाकाहारी जीवों के आधार का आकलन करना है।
  • शुरुआत: AITE 2026 का पहला चरण 5 जनवरी 2026 से तमिलनाडु के विभिन्न वन प्रभागों में शुरू हुआ, जो फरवरी 2026 के अंत तक चलेगा।
  • आयोजक: यह राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (National Tiger Conservation Authority – NTCA) और भारतीय वन्यजीव संस्थान (Wildlife Institute of India – WII) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जाता है। 
  • आवृत्ति: यह प्रत्येक चार वर्ष में आयोजित किया जाता है।
  • कार्यप्रणाली: इसमें चरणबद्ध तरीके से वैज्ञानिक तरीके शामिल हैं, जैसे कि साइन सर्वे (पगमार्ग और मल के निशान), लाइन ट्रांसेक्ट्स (वनस्पति, मानव प्रभाव का आकलन), कैमरा ट्रैपिंग, और आनुवंशिक नमूनाकरण।
  • प्रौद्योगिकी का उपयोग: डेटा संग्रह के लिए M-STrIPES (Monitoring System for Tigers-Intensive Protection and Ecological Status) एप्लिकेशन और DNA विश्लेषण के लिए मल के नमूनों (scat samples) का उपयोग किया जा रहा है।
  • डेटा संकलन: वन्यजीवों, शाकाहारी जीवों, और वनस्पति पर एकत्रित डेटा को संकलित किया जाएगा और 31 जनवरी तक NTCA को प्रस्तुत किया जाएगा, अंतिम रिपोर्ट 2027 में जारी होने की उम्मीद है। 

बाघ संरक्षण का महत्व:

  • वैश्विक नेतृत्व: भारत विश्व की कुल जंगली बाघों की आबादी का लगभग 75% हिस्सा है, जो संरक्षण प्रयासों में देश की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।
  • पारिस्थितिक संतुलन: बाघ खाद्य श्रृंखला के शीर्ष पर होते हैं, और उनकी आबादी का स्वास्थ्य पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य का संकेतक है।
  • संरक्षण ढांचा: प्रोजेक्ट टाइगर (1973), NTCA का गठन (2005), और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 जैसे सरकारी पहल बाघों के संरक्षण के लिए एक मजबूत कानूनी और संस्थागत ढांचा प्रदान करते हैं। 

थानथाई पेरियार वन्यजीव अभयारण्य:

  • स्थान: यह अभयारण्य तमिलनाडु के इरोड जिले में बरगुर हिल्स में स्थित है।
  • पारिस्थितिकीय गलियारा: यह सत्यमंगलम टाइगर रिजर्व (तमिलनाडु) और माले महादेश्वर वन्यजीव अभयारण्य (कर्नाटक) के बीच एक महत्वपूर्ण बाघ गलियारा है।
  • जैव विविधता: यह क्षेत्र नीलगिरी हाथी रिजर्व का भी हिस्सा है और हाथी व भारतीय गौर (Indian Gaur) सहित बड़े शाकाहारी जीवों के लिए एक महत्वपूर्ण निवास स्थान प्रदान करता है।

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