Fiscal Health Index 2026
संदर्भ:
हाल ही में नीति आयोग ने राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक (Fiscal Health Index – FHI) 2026 का दूसरा वार्षिक संस्करण जारी किया। जिसमें आयोग द्वारा भारतीय राज्यों के वित्तीय प्रबंधन, ऋण स्थिरता और राजस्व जुटाने की क्षमता का एक डेटा-संचालित मूल्यांकन प्रदान किया गया है।
राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक (FHI) क्या हैं?
- परिचय: राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक (Fiscal Health Index – FHI) राज्यों के वित्तीय प्रबंधन की शुद्धता और स्थिरता को मापने का एक व्यापक डेटा-आधारित ढांचा है। यह एक सांख्यिकीय उपकरण है जो राज्यों के बजट, राजस्व, ऋण और व्यय की गुणवत्ता का विश्लेषण कर उन्हें स्कोर प्रदान करता है।
- जारीकर्ता: मुख्य रूप से नीति आयोग (NITI Aayog) इसे जारी करता है, जो राज्यों के वित्तीय आंकड़ों (RBI और बजट प्रतियों) का उपयोग करता है।
- उद्देश्य: राज्यों के बीच ‘प्रतिस्पर्धी संघवाद’ को बढ़ावा देना और उन्हें राजकोषीय अनुशासन (FRBM नियमों) के पालन के लिए प्रोत्साहित करना।
राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक (FHI) 2026 के मुख्य बिंदु:
- सूचकांक के मुख्य स्तंभ: इस रिपोर्ट में राज्यों का मूल्यांकन निम्नलिखित पाँच प्रमुख स्तंभों के आधार पर किया गया है।
- व्यय की गुणवत्ता (Quality of Expenditure): विकास कार्यों और पूंजीगत संपत्तियों के निर्माण पर खर्च का अनुपात।
- राजस्व संग्रहण (Revenue Mobilisation): राज्यों की स्वयं की कर और गैर-कर राजस्व जुटाने की क्षमता।
- राजकोषीय विवेक (Fiscal Prudence): राजकोषीय घाटे को निर्धारित सीमाओं के भीतर रखने का अनुशासन।
- ऋण सूचकांक (Debt Index): राजस्व प्राप्तियों के सापेक्ष ब्याज भुगतान का बोझ।
- ऋण स्थिरता (Debt Sustainability): भविष्य में ऋण चुकाने की क्षमता और ऋण-जीएसडीपी (Debt-to-GSDP) अनुपात।
- प्रमुख राज्यों की रैंकिंग: सूचकांक में 18 प्रमुख राज्यों को उनके स्कोर के आधार पर चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है:
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- Achievers (प्राप्तकर्ता): ओडिशा (73.1), गोवा (54.7), झारखंड (50.5)। ओडिशा ने लगातार दूसरे वर्ष शीर्ष स्थान बरकरार रखा है।
- Front Runners (अग्रणी): गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक। इन राज्यों ने स्थिर ऋण और राजस्व प्रवाह प्रदर्शित किया।
- Performers (औसत): मध्य प्रदेश, हरियाणा, बिहार, तमिलनाडु, राजस्थान। बिहार ने घाटा प्रबंधन में सुधार कर अपनी श्रेणी में वृद्धि की है।
- Aspirational (आकांक्षी): केरल, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, पंजाब (12.4)। पंजाब सबसे निचले स्थान पर है, जो अत्यधिक ऋण और वित्तीय तनाव को दर्शाता है।
- उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्य: इस वर्ष के संस्करण में पहली बार 10 उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों को अलग से शामिल और रैंक किया गया है:
- शीर्ष स्थान: अरुणाचल प्रदेश (59.5) उत्कृष्ट व्यय गुणवत्ता और ऋण प्रबंधन के कारण पहले स्थान पर रहा।
- अन्य बेहतर प्रदर्शनकर्ता: उत्तराखंड (द्वितीय) और त्रिपुरा (तृतीय)।
- चुनौतियाँ: इन राज्यों में केंद्रीय हस्तांतरण (Central Transfers) पर अत्यधिक निर्भरता देखी गई है, जो कुछ मामलों में राजस्व का 90% तक है।
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- ऋण का बोझ: राज्यों का कुल ऋण अब भारत के सामान्य सरकारी ऋण का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है, जो राष्ट्रीय राजकोषीय स्थिरता के लिए चिंता का विषय है।
- राजस्व स्वतंत्रता: गोवा और ओडिशा जैसे राज्यों में उच्च ‘स्वयं का राजस्व अनुपात’ देखा गया, जो उनकी राजकोषीय स्वायत्तता को दर्शाता है।
- सिफारिशें:
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- संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता: रिपोर्ट में जीएसटी आधार को व्यापक बनाने, गैर-प्राथमिकता वाले खर्चों (जैसे अत्यधिक सब्सिडी) को कम करने और पूंजीगत व्यय की गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
- मध्यम अवधि की योजना: घाटे को नियंत्रित करने के लिए राज्यों को बहु-वर्षीय राजकोषीय योजना (Medium-Term Fiscal Planning) अपनाने की सलाह दी गई है।
- डेटा पारदर्शिता: सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) को मजबूत करने और सत्यापित कैग (CAG) डेटा के उपयोग का सुझाव दिया गया है।
