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UNSC के पुनर्गठन के लिए G-4 देशों का शीघ्र कार्रवाई का मॉडल (G-4 countries early action model for restructuring the UNSC) | Apni Pathshala

G-4 countries early action model for restructuring the UNSC

G-4 countries early action model for restructuring the UNSC

संदर्भ:

भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने जी-4 (G4) देशों की ओर से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के पुनर्गठन के लिए एक ‘शीघ्र कार्रवाई का मॉडल’ (Model for Early Action) प्रस्तुत किया है। यह मॉडल समकालीन भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करने के लिए एक विस्तृत रूपरेखा प्रदान करता है। 

जी-4 मॉडल की मुख्य विशेषताएं:

  • सदस्यता का विस्तार: जी-4 देशों ने परिषद की कुल सदस्य संख्या को वर्तमान 15 से बढ़ाकर 25 या 26 करने का प्रस्ताव दिया है। इसमें 6 नए स्थायी सदस्य और 4 या 5 नए अस्थायी सदस्य जोड़ने का सुझाव दिया गया है।
  • स्थायी सीटों का वितरण: अफ्रीका से 2, एशिया-प्रशांत से 2, लैटिन अमेरिका और कैरिबियन (GRULAC) से 1, और पश्चिमी यूरोप व अन्य (WEOG) से 1।
  • वीटो पावर: जी-4 मॉडल के अनुसार स्थायी सदस्यों के पास वीटो शक्ति होगी, लेकिन वे इसे तब तक प्रयोग नहीं करेंगे जब तक कि समीक्षा प्रक्रिया के दौरान इस पर अंतिम निर्णय नहीं ले लिया जाता।
  • क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व: मॉडल में ग्लोबल साउथ, विशेष रूप से अफ्रीका के साथ हुए अन्याय को दूर करने पर जोर दिया गया है। छोटे द्वीप विकासशील देशों (SIDS) को भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने का सुझाव दिया गया है।
  • लोकतांत्रिक चयन प्रक्रिया: नए स्थायी सदस्यों का चयन संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) द्वारा लोकतांत्रिक तरीके से किया जाएगा। 

पुनर्गठन की आवश्यकता क्यों? 

  • वर्तमान संरचना 1945 के विश्व को दर्शाती है, जबकि आज की दुनिया पूरी तरह बदल चुकी है।
  • सुरक्षा परिषद वर्तमान वैश्विक संघर्षों (जैसे मध्य पूर्व और अन्य युद्धों) को रोकने में विफल रही है, जिससे इसकी विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
  • अफ्रीका का एजेंडा परिषद की 70% चर्चाओं का हिस्सा है, लेकिन उसके पास एक भी स्थायी सीट नहीं है।
  • जी-4 देशों (भारत, ब्राजील, जर्मनी, जापान) ने चेतावनी दी है कि सुधारों में देरी से मानवीय पीड़ा और संकट बढ़ रहे हैं।

जी-4 (G4) राष्ट्रों का परिचय:

  • जी-4 चार देशों का एक समूह है जिसमें भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान शामिल हैं। 
  • 2005 में स्थापित यह गठबंधन मुख्य रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता प्राप्त करने के लिए एक-दूसरे के दावों का समर्थन करता है। 
  • ये देश अपने बढ़ते वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव के कारण सुरक्षा परिषद में संरचनात्मक सुधारों और अधिक प्रतिनिधित्व की मांग कर रहे हैं।
  • जी-4 के प्रयासों का सबसे प्रबल विरोध ‘यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस’ (UfC) समूह द्वारा किया जाता है, जिसे ‘कॉफी क्लब’ भी कहा जाता है। इसमें इटली, पाकिस्तान, मेक्सिको और अर्जेंटीना जैसे देश शामिल हैं।

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