Ganges River Dolphin Restoration Programme, 35 संयुक्त राष्ट्र विश्व बहाली फ्लैगशिप में हुआ शामिल
संदर्भ:
हाल ही में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (United Nations Environment Programme – UNEP) ने अपनी प्रतिष्ठित ‘प्रकृति की वापसी’ (Nature’s Comeback Report 2026) रिपोर्ट में भारत के गंगा नदी डॉल्फ़िन बहाली और रोजगार सृजन कार्यक्रम (Ganges River Dolphin Restoration Programme) को दुनिया के 35 संयुक्त राष्ट्र विश्व बहाली फ्लैगशिप (UNEP World Restoration Flagships) में शामिल कर सम्मानित किया।

गंगा नदी डॉल्फ़िन बहाली और रोजगार सृजन कार्यक्रम के बारे में:
- परिचय: Ganges River Dolphin Restoration Programme, भारत के राष्ट्रीय जलीय जीव (National Aquatic Animal), गंगा नदी डॉल्फ़िन के आवास संरक्षण, जनसंख्या संवर्धन और तटीय समुदायों के आजीविका चक्र को आपस में जोड़ने वाली एक अनूठी परियोजना है।
- यह पहल संयुक्त राष्ट्र पारिस्थितिकी तंत्र बहाली दशक (UN Decade on Ecosystem Restoration 2021–2030) के वैश्विक लक्ष्यों के पूर्णतः अनुकूल है।
- मंत्रालय: यह कार्यक्रम मुख्य रूप से भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के अधीन संचालित है।
- कार्यान्वयन भागीदार: राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG), भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), और विभिन्न राज्यों (जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, असम) के वन विभाग।
- वैश्विक प्रदाता: यूएनईपी (UNEP), खाद्य और कृषि संगठन (FAO), तथा जैव विविधता अभिसमय (CBD) सचिवालय ने संयुक्त रूप से इस बहाली प्रयास को अपनी वैश्विक रिपोर्ट में प्रमाणित किया है।
- दीर्घकालिक योजना: डॉल्फ़िन संरक्षण कार्य योजना 2022-2047: भारत सरकार ने इसके लिए डॉल्फ़िन संरक्षण कार्य योजना 2022-2047 (Dolphin Conservation Action Plan 2022 2047) लागू की है:
- दृष्टिकोण: आगामी 25 वर्षों के लिए नदीय पारिस्थितिकी तंत्र (River Ecosystem) के संरक्षण का एक संस्थागत खाका तैयार करना।
- प्रौद्योगिकी का उपयोग: डॉल्फ़िन के मौसमी और प्रवासी व्यवहार का अध्ययन करने के लिए पहली बार सैटेलाइट टैगिंग (Satellite Tagging) और उन्नत इको-लोकेशन सेंसर प्रणालियों का अनुप्रयोग किया जा रहा है।
- घटक:
- इन-सिटु पर्यावास का कायाकल्प: नदी में आवश्यक पर्यावरणीय प्रवाह (Environmental Flow) बनाए रखना और विक्रमशिला गांगेय डॉल्फ़िन अभयारण्य (VGDS) जैसे संरक्षित क्षेत्रों में औद्योगिक अपशिष्टों के प्रवेश पर कड़ाई से रोक लगाना।
- हरित रोजगार और संरक्षण (Green Jobs and Conservation): नदी के किनारे रहने वाले मछुआरों और स्थानीय युवाओं को संरक्षण गतिविधियों से जोड़ना, जिससे उन्हें पर्यावरण-अनुकूल रोजगार प्राप्त हो सके।
- सामुदायिक नेटवर्क: ‘गंगा प्रहारी’ (Ganga Praharis) और स्थानीय स्वयंसेवकों के माध्यम से डॉल्फ़िन के जाल में फंसने (Gill-net Entanglements) की घटनाओं को रोकने के लिए त्वरित रेस्क्यू नेटवर्क का संचालन।
| गंगा नदी डॉल्फ़िन का वैज्ञानिक नाम प्लाटानिस्ता गैंगेटिका (Platanista Gangetica) है। यह IUCN रेड लिस्ट में ‘संकटग्रस्त’ (Endangered) श्रेणी में है और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के तहत संरक्षित है। |
संरक्षण और रोजगार सृजन में कार्यक्रम का महत्व:
- पारिस्थितिकीय संकेतक (Ecological Indicator): गंगा नदी डॉल्फ़िन मीठे पानी के पारिस्थितिकी तंत्र की सेहत की एक प्रमुख सूचक (Indicator Species) है।
- इसकी आबादी में बहाली का सीधा अर्थ गंगा नदी बेसिन की समग्र जल गुणवत्ता और जैव विविधता में सुधार होना है।
- हरित रोजगार सृजन (Green Job Creation): यह संरक्षण मॉडल पर्यावरण संरक्षण और आजीविका सुरक्षा (Dolphin Conservation and Job Creation) के द्वंद्व को समाप्त करता है। यह स्थानीय समुदायों के लिए सस्टेनेबल इको-टूरिज्म, जैविक खेती और नदी गाइड के रूप में रोजगार के नए साधन सुनिश्चित करता है।
- वैश्विक प्रतिबद्धताओं की पूर्ति: यह सफलता कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचे (Kunming-Montreal Global Biodiversity Framework) के ‘लक्ष्य 2’ को प्राप्त करने की दिशा में भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को सिद्ध करती है, जिसके तहत 2030 तक 30% अवक्रमित जलीय पारिस्थितिकी तंत्रों की बहाली का संकल्प है।
- सामुदायिक स्वामित्व (Community Ownership): संरक्षण को केवल नौकरशाही के भरोसे छोड़ने के बजाय यह स्थानीय नदीय आबादी को ‘पारिस्थितिकी तंत्र का रक्षक’ बनाकर जन-भागीदारी (Jan-Bhagidari) आधारित सुशासन की नींव रखता है।
- वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा: इस बहाली कार्यक्रम के तहत अत्याधुनिक डिजिटल ट्रैकिंग टूल और रिमोट मॉनिटरिंग प्रणालियों का विकास हुआ है, जो भविष्य में भारत के अन्य संकटग्रस्त मीठे पानी के जीवों (जैसे घड़ियाल और कछुओं) के संरक्षण के लिए एक रोल मॉडल का कार्य करेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: गंगा नदी डॉल्फ़िन बहाली और रोजगार सृजन कार्यक्रम क्या है?
उत्तर: यह भारत सरकार का एक एकीकृत कार्यक्रम (Ganga River Dolphin Recovery Programme) है, जो गंगा बेसिन में डॉल्फ़िन के पर्यावास का संरक्षण करने के साथ-साथ स्थानीय तटीय समुदायों के लिए हरित रोजगार (Green Jobs) पैदा करता है।
प्रश्न 2: गंगा डॉल्फ़िन संरक्षण कार्यक्रम को संयुक्त राष्ट्र के किस वैश्विक कार्यक्रम में शामिल किया गया है?
उत्तर: इसे संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) द्वारा दुनिया के सबसे अनुकरणीय 35 संयुक्त राष्ट्र विश्व बहाली फ्लैगशिप (UN World Restoration Flagships) में शामिल कर अंतरराष्ट्रीय मान्यता दी गई है।
प्रश्न 3: UN World Restoration Flagships क्या हैं?
उत्तर: यह संयुक्त राष्ट्र पारिस्थितिकी तंत्र बहाली दशक (UN Decade) के तहत मान्यता प्राप्त दुनिया के वे सबसे बड़े और सफल संरक्षण प्रयास हैं, जो जैव विविधता बहाली और सतत आजीविका को एक साथ बढ़ावा देते हैं।
प्रश्न 4: गंगा नदी डॉल्फ़िन का वैज्ञानिक नाम और संरक्षण स्थिति क्या है?
उत्तर: इसका वैज्ञानिक नाम प्लाटानिस्ता गैंगेटिका (Platanista Gangetica) है। यह IUCN रेड लिस्ट में ‘संकटग्रस्त’ (Endangered) श्रेणी में है और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के तहत संरक्षित है।
प्रश्न 5: गंगा डॉल्फ़िन संरक्षण कार्यक्रम पर्यावरण बहाली और रोजगार सृजन में कैसे योगदान देता है?
उत्तर: यह नदी के जैविक स्वास्थ्य को पुनर्स्थापित करता है तथा स्थानीय मछुआरों व गंगा प्रहरियों को वन्यजीव निगरानी, रेस्क्यू मिशन और इको-टूरिज्म से जोड़कर स्थायी आर्थिक लाभ प्रदान करता है।