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गुजरात बायोटेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी (GBU) | Ankit Avasthi Sir

GBU

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संदर्भ:

नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट में गुजरात बायोटेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी (GBU) की सराहना की। नीति आयोग ने इसे उच्च शिक्षा के वैश्वीकरण के लिए एक अग्रणी मॉडल बताया, जो वैश्विक विश्वविद्यालयों को आकर्षित करने और विकसित भारत@2047 के अनुरूप है।

गुजरात बायोटेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी (GBU) के बारे मे:

  • गुजरात बायोटेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी (GBU) गुजरात सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा स्थापित दुनिया की पहली ऐसी यूनिवर्सिटी है जो पूरी तरह से स्नातक (Post-graduate) स्तर के जैव-प्रौद्योगिकी अनुसंधान पर केंद्रित है। 
  • इसकी स्थापना 2020 में एडिनबर्ग विश्वविद्यालय (University of Edinburgh), यूके के सहयोग से की गई है। 
  • यहाँ पाठ्यक्रम को पांच प्रमुख डोमेन में बांटा गया है: पशु जैव प्रौद्योगिकी, पर्यावरण जैव प्रौद्योगिकी, औद्योगिक जैव प्रौद्योगिकी, चिकित्सा जैव प्रौद्योगिकी और पादप जैव प्रौद्योगिकी।
  • यह संस्थान भारत के ‘बायो-इकोनॉमी’ (Bio-economy) लक्ष्य (2030 तक $300 बिलियन) में योगदान देने के लिए डिजाइन किया गया है।
  • गांधीनगर स्थित यह परिसर उच्च तकनीक वाली प्रयोगशालाओं और ‘इनक्यूबेशन सेंटर्स’ से लैस है। जो लगभग 23 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है।
  • गिफ्ट सिटी में स्थित इस यूनिवर्सिटी में 80 करोड़ रुपये से अधिक की उन्नत अनुसंधान सुविधाएं हैं, और लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से एक अंतरराष्ट्रीय परिसर का विकास हो रहा है।

नीति आयोग की प्रशंसा के प्रमुख बिंदु:

    • उद्योग-अकादमिक लिंकेज: GBU केवल डिग्री प्रदान नहीं करता, बल्कि शुरू से ही छात्रों को उद्योगों की समस्याओं (Problem-solving) पर काम करने के लिए प्रेरित करता है।
    • अंतरराष्ट्रीय सहयोग: एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के साथ इसकी साझेदारी वैश्विक मानकों के पाठ्यक्रम और शिक्षण पद्धति सुनिश्चित करती है। इसमें प्रयोगशाला के आविष्कारों को बाजार तक पहुँचाने पर जोर दिया जाता है।
  • प्रमुख उपलब्धियाँ: 70 से अधिक बाहरी शोध अनुदान प्राप्त हुए, जिनका मूल्य ₹40 करोड़ से अधिक है। 50 से अधिक शोधकर्ताओं और फैकल्टी सदस्यों को रोजगार मिला, केंद्र और राज्य की छात्रवृत्तियों के माध्यम से 40 से अधिक पीएचडी स्कॉलर, SSIP (Student Startup and Innovation Policy) के तहत 37 छात्र टीमों ने ₹2 करोड़ से अधिक की स्टार्टअप फंडिंग हासिल की।
  • जैव-प्रौद्योगिकी महत्व: यह यूनिवर्सिटी पारंपरिक डिग्रियों और उद्योग की मांग के बीच के अंतर को कम करने, भारत में पेटेंट और नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देने और पर्यावरण और औद्योगिक जैव प्रौद्योगिकी के माध्यम से ‘नेट जीरो’ लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक है।

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