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वैश्विक सूचकांक सुधार एवं वृद्धि पहल (GIRG) | UPSC Preparation

GIRG

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संदर्भ:

भारत सरकार ने 01 दिसंबर 2025 को घोषणा की कि देश अब 26 वैश्विक सूचकांकों की प्रगति को व्यवस्थित रूप से मॉनिटर करेगा। यह प्रयास Global Indices for Reforms and Growth (GIRG) पहल के तहत किया जा रहा है। इसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर भारत की विश्वसनीयता को बढ़ाना है।

वैश्विक सूचकांक सुधार एवं वृद्धि पहल (GIRG) क्या हैं?

  • परिचय: GIRG (Global Indices for Reforms and Growth) एक अंतर-मंत्रालयी पहल है, जिसका उद्देश्य विभिन्न वैश्विक सूचकांकों की निगरानी कर भारत की प्रगति को गति देना है। वर्तमान में यह पहल 16 अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा प्रकाशित 26 प्रमुख सूचकांकों को कवर करती है। 
  • वैश्विक सूचकांक: डेमोक्रेसी इंडेक्स, नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स, ग्लोबल हंगर इंडेक्स, क्लाइमेट चेंज परफॉर्मेंस इंडेक्स, इंडस्ट्रियल प्रतिस्पर्धा सूचकांक।
  • श्रेणी: ये सूचकांक चार प्रमुख श्रेणियों में आते हैं— अर्थव्यवस्था, विकास, शासन और उद्योग
  • समन्वयक: इस प्रक्रिया में NITI Aayog का DMEO (Development Monitoring & Evaluation Office) ज्ञान साझेदार और केंद्रीय समन्वयक की भूमिका निभा रहा है।

GIRG (Global Index Reporting Group) के मुख्य घटक:

  • सूचकांक आवंटन: 26 सूचकांकों को 17 नोडल मंत्रालयों को सौंपा गया है। प्रत्येक मंत्रालय को अपनी श्रेणी के सूचकांकों में सुधार की पूरी जिम्मेदारी दी गई है। राज्यों को भी GIRG में शामिल किया गया है।
  • कार्यप्रणाली की समीक्षा: नोडल मंत्रालयों को सूचकांक की कार्यप्रणाली (मेथोडोलॉजी) की समीक्षा करने और प्रकाशन एजेंसियों से संपर्क में रहने के लिए निर्देशित किया जाता है, ताकि भारत से संबंधित डेटा अद्यतन और सटीक बना रहे।
  • प्रदर्शन अंतर की पहचान: प्रत्येक मंत्रालय को यह विश्लेषण करना होता है कि किन क्षेत्रों में भारत का प्रदर्शन कमजोर है और इसके लिए किन नीतिगत सुधारों, बजटीय हस्तक्षेपों या प्रशासनिक परिवर्तनों की आवश्यकता है।
  • नीति सुधार के उपाय: मंत्रालयों को अपने-अपने सूचकांकों के अनुरूप ठोस कार्य योजनाएँ बनानी होंगी, जैसे डिजिटल बुनियादी ढांचे में सुधार करना और सामाजिक सूचकांकों में बढ़ोतरी करना।

वैश्विक सूचकांक सुधार एवं वृद्धि पहल (GIRG) का महत्व:

  • वैश्विक रैंकिंग में सुधार: GIRG का प्रमुख उद्देश्य भारत की छवि और क्षमता वैश्विक स्तर पर बेहतर रूप में प्रस्तुत करना है। जिससे आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय तुलना में भारत बेहतर स्थान प्राप्त कर सकता है।
  • डेटा-आधारित नीति निर्माण: इस ढांचे के तहत मंत्रालयों को यह सुनिश्चित करना होगा कि सूचकांक बनाने में भारत का नवीनतम आधिकारिक डेटा उपयोग हो। इससे डेटा-वैषम्य कम होगा।
  • राज्यों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा: GIRG राज्यों के प्रदर्शन को भी स्कोर और रैंक करेगा, जिससे सहकारी-संघवाद और प्रतिस्पर्धी-संघवाद दोनों को बल मिलेगा।
  • सुधार-चालित शासन मॉडल: इसके माध्यम से सूचकांक केवल रैंकिंग सुधार का माध्यम न बनकर नीतिगत सुधारों के उत्प्रेरक का कार्य करेगा।
  • नागरिक सेवा डिलीवरी में सुधार: सूचकांक स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और शासन की गुणवत्ता को दर्शाते हैं, जिससे नागरिकों को बेहतर सेवाएँ मिलती हैं।
  • निवेश-अनुकूल वातावरण: बेहतर रैंकिंग का सीधा संबंध विदेशी निवेश प्रवाह, उद्योग नीति सुधार और व्यापार सुगमता से है। इसके माध्यम से भविष्य में निवेश प्रवाह के लिए अनुकूल वातावरण बनेगा।

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