Glaw Lake Ramsar Site – अरुणाचल प्रदेश की ग्लाव झील भारत की 101वीं रामसर स्थल घोषित
संदर्भ:
हाल ही में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री द्वारा अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) की प्राचीन ग्लाव झील (Glaw Lake) को भारत का 101वां रामसर स्थल (101st Ramsar Site India) घोषित किया गया. यह अरुणाचल प्रदेश की पहली रामसर स्थल (Ramsar Wetlands) बन गई है.
ग्लाव झील (Glaw Lake) के बारे में:
- भौगोलिक स्थिति: यह झील पूर्वोत्तर भारत के अरुणाचल प्रदेश के लोहित जिले (Lohit District) में स्थित है.
- संरक्षित क्षेत्र: ग्लाव झील पूरी तरह से कमलांग बाघ अभयारण्य और वन्यजीव अभ्यारण्य (Kamlang Tiger Reserve and Wildlife Sanctuary) के अंतर्गत घने पहाड़ी वनों के बीच घिरी हुई है.
- यह पूर्वी हिमालय (Eastern Himalayas) के संवेदनशील और पर्यावरण-संवेदनशील पहाड़ी परिदृश्य में एक उच्च ऊंचाई वाली मीठे पानी की झील (High-altitude Freshwater Lake) है.
- जल का स्रोत: आर्द्रभूमि संरक्षण (Wetland Conservation) के तहत पहचानी गई यह झील मुख्य रूप से बारहमासी पहाड़ी झरनों (Perennial Mountain Streams) और हिमनदों के पिघले जल से पोषित होती है.
- झील का जलग्रहण क्षेत्र (Catchment Area) ढलानी और घने जंगलों से आच्छादित है.
- जैव विविधता: झील और इसके आस-पास के जलग्रहण क्षेत्र में 150 से अधिक वृक्ष प्रजातियों (Tree Species) को आधिकारिक रूप से रिकॉर्ड किया गया है.
- यहाँ 49 से अधिक दुर्लभ ऑर्किड प्रजातियाँ (Orchid Species) पाई जाती हैं. ऑर्किड को अक्सर पहाड़ी पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए संकेतक प्रजाति (Indicator Species) माना जाता है.
- प्राणिजात: यह परिदृश्य दुनिया के उन गिने-चुने आवासों में से है जहाँ बिल्ली वंश (Big Cats) की चार प्रमुख प्रजातियाँ—बाघ, तेंदुआ, क्लाउडेड तेंदुआ (Clouded Leopard) और हिम तेंदुआ (Snow Leopard) एक साथ सह-अस्तित्व में पाई जाती हैं.
- विशिष्ट पक्षी प्रजातियाँ: यह आर्द्रभूमि गंभीर रूप से लुप्तप्राय (Critically Endangered) सफेद पेट वाले बगुले (White-bellied Heron) का प्रमुख शीतकालीन प्रवास और निवास स्थान है. इसके अतिरिक्त, यहाँ 20 से अधिक सरीसृप (Reptiles) और उभयचरों की प्रजातियाँ दर्ज हैं.
- सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व: ग्लाव झील स्थानीय मिशमी जनजाति (Mishmi Community) के लिए अत्यधिक सांस्कृतिक महत्व रखती है.
- स्थानीय आदिवासी लोग इस पूरी झील को बेहद पवित्र (Sacred Asset) मानते हैं, जो समुदाय-आधारित पर्यावरण संरक्षण (Community-based Eco Conservation) का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है.
- रामसर स्थल के रूप में चयन: ग्लाव झील ने रामसर कन्वेंशन (Ramsar Convention) के कड़े अंतरराष्ट्रीय मानदंडों को पूरा किया है:
- यह एक अत्यंत दुर्लभ और प्रतिनिधि प्राकृतिक आर्द्रभूमि है जो पूर्वी हिमालयी क्षेत्र की जैव विविधता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
- यह संकटग्रस्त पारिस्थितिक समुदायों और गंभीर रूप से लुप्तप्राय जीवों (जैसे व्हाइट-बेलिड हेरॉन) के अस्तित्व को जैविक सहायता प्रदान करती है.
रामसर स्थल क्या होते हैं?
- परिचय: रामसर स्थल (Ramsar Sites) अंतरराष्ट्रीय महत्व की वे आर्द्रभूमियाँ (Wetlands) हैं जिन्हें ‘रामसर कन्वेंशन’ (Ramsar Convention) के तहत वैश्विक स्तर पर जैविक विविधता और पारिस्थितिक तंत्र के संरक्षण के लिए मान्यता दी गई है।
- रामसर कन्वेंशन एकमात्र ऐसी वैश्विक पर्यावरण संधि है जो किसी विशिष्ट पारिस्थितिक तंत्र (आर्द्रभूमि) को समर्पित है। 2 फरवरी 1971 को ईरान के कैस्पियन सागर तट पर स्थित रामसर शहर में इस अंतर-सरकारी संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह संधि वैश्विक स्तर पर 1975 में लागू हुई।
- इस कारण हर वर्ष 2 फरवरी को दुनिया भर में ‘विश्व आर्द्रभूमि दिवस’ मनाया जाता है।
- आद्रभूमि: कन्वेंशन के अनुसार, आर्द्रभूमि से तात्पर्य दलदल (Marsh), पंकभूमि (Fen), पीटभूमि (Peatland) या पानी के उन क्षेत्रों से है—चाहे वे प्राकृतिक हों या कृत्रिम, स्थायी हों या अस्थायी, जिनमें बहता या स्थिर जल, मीठा, खारा या लवणीय पानी शामिल हो।
- इसमें समुद्री जल के वे क्षेत्र भी शामिल हैं जहाँ ज्वार (Low Tide) के समय गहराई 6 मीटर से अधिक नहीं होती है।
- कन्वेंशन के तीन मुख्य स्तंभ (Three Pillars): सभी आर्द्रभूमियों का विवेकपूर्ण उपयोग (Wise Use) सुनिश्चित करना, अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों की सूची के लिए उपयुक्त स्थलों का चयन करना (Ramsar List) और सीमा पार फैली आर्द्रभूमियों और साझा प्रणालियों के संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना।
- चयन के 9 मानदंड: किसी आर्द्रभूमि को रामसर स्थल का दर्जा प्राप्त करने के लिए कन्वेंशन द्वारा निर्धारित 9 विशिष्ट मानदंडों में से कम से कम एक को पूरा करना अनिवार्य होता है। इन्हें मुख्य रूप से दो समूहों में बांटा गया है:
- समूह 1 (साइट के प्रकार): यदि वह अपने जैव-भौगोलिक क्षेत्र में प्राकृतिक या अर्ध-प्राकृतिक आर्द्रभूमि का एक दुर्लभ, प्रतिनिधि या अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत करती हो।
- समूह 2 (प्रजातियों और पारिस्थितिक समुदायों पर आधारित):
- यदि वह संकटग्रस्त (Vulnerable/Endangered) या गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजातियों को आश्रय देती हो।
- यदि वह किसी विशेष जैव-भौगोलिक क्षेत्र की जैविक विविधता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण पौधों/पशुओं की आबादी का समर्थन करती हो।।यदि वह अपने जीवन चक्र के किसी महत्वपूर्ण चरण में वन्यजीवों को संकट के समय शरण प्रदान करती हो।
- यदि वह नियमित रूप से 20,000 या उससे अधिक जलपक्षियों (Waterbirds) को आकर्षित करती हो।
- यदि वह नियमित रूप से किसी जलपक्षी प्रजाति या उप-प्रजाति की आबादी के 1% जीवों को आश्रय देती हो।
- यही मानदंड विशिष्ट मछली प्रजातियों, उनके स्पॉनिंग ग्राउंड (अंडा देने के स्थान) और अन्य गैर-एवियन जानवरों के लिए भी लागू होता है।
- मोंट्रेक्स रिकॉर्ड (Montreux Record): यह रामसर सूची के अंतर्गत ही बनाए रखा जाने वाला एक स्वैच्छिक रजिस्टर है।
- इसमें उन अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों को शामिल किया जाता है, जहाँ तकनीकी विकास, प्रदूषण या अन्य मानवीय हस्तक्षेप के कारण पारिस्थितिक चरित्र में परिवर्तन हो चुका है, हो रहा है, या होने की संभावना है।
- भारत: भारत ने 1 फरवरी 1982 को इस संधि पर हस्ताक्षर किए।
- वर्ष 2026 की नवीनतम घोषणाओं के अनुसार, भारत में कुल रामसर स्थलों की संख्या 101 तक पहुँच चुकी है। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में स्थित जय प्रकाश नारायण पक्षी अभयारण्य (सुरहा ताल) को भारत का 100वां रामसर स्थल घोषित किया गया है।
- चिल्का झील (ओडिशा) और केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (राजस्थान) को 1981 में भारत के पहले रामसर स्थलों के रूप में नामित किया गया था।
- सुंदरवन डेल्टा (पश्चिम बंगाल) भारत का सबसे बड़ा और रेणुका आर्द्रभूमि (हिमाचल प्रदेश) भारत का सबसे छोटा रामसर स्थल है।
- तमिलनाडु में भारत के सबसे अधिक रामसर स्थल हैं, जिसके बाद उत्तर प्रदेश का स्थान आता है।
- वर्तमान में भारत के दो स्थल मोंट्रेक्स रिकॉर्ड में शामिल हैं: केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (राजस्थान) और लोकटक झील (मणिपुर)।
- भारत में आर्द्रभूमि संरक्षण के कानूनी उपाय: आर्द्रभूमि (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा अधिसूचित इन नियमों के तहत राज्यों में ‘राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण’ (State Wetland Authority) का गठन किया गया है ताकि इनका विकेंद्रीकृत प्रबंधन सुनिश्चित हो सके।
- प्रत्येक रामसर स्थल स्वचालित रूप से वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित क्षेत्र नहीं होता है, जब तक कि उसे अलग से राष्ट्रीय उद्यान या अभयारण्य घोषित न किया जाए। इसलिए इनके संरक्षण के लिए विशिष्ट नियमों का सहारा लिया जाता है।
रामसर स्थलों का महत्व:
| जैव विविधता का संरक्षण | ये स्थल प्रवासी पक्षियों (जैसे मध्य एशियाई फ्लाईवे) के लिए महत्वपूर्ण मार्ग और लुप्तप्राय जीवों के प्रजनन केंद्र होते हैं। |
| बाढ़ नियंत्रण एवं जल शुद्धिकरण | आर्द्रभूमियाँ प्राकृतिक स्पंज की तरह काम करती हैं, जो अतिरिक्त वर्षा जल को सोखकर बाढ़ के जोखिम को कम करती हैं और प्रदूषकों को छानती हैं। |
| जलवायु नियमन (Blue Carbon) | पीटलैंड और मैंग्रोव जैसे आर्द्रभूमि क्षेत्र सामान्य वनों की तुलना में कहीं अधिक तेजी से कार्बन का संचय (Carbon Sequestration) करते हैं। |
| आजीविका और अर्थव्यवस्था | ये क्षेत्र स्थानीय समुदायों को मछली पकड़ने, कृषि (जैसे धान की खेती), पर्यटन और जल संसाधनों के माध्यम से आर्थिक स्थिरता प्रदान करते हैं। |
| भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) | शुष्क मौसम के दौरान जल स्तर को बनाए रखने के लिए एक्विफर्स (Aquifers) को रिचार्ज करने में मदद करते हैं। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: ग्लाव झील कहाँ स्थित है?
उत्तर: यह खूबसूरत और प्राचीन मीठे पानी की झील उत्तर-पूर्व भारत के अरुणाचल प्रदेश राज्य के लोहित जिले में स्थित है.
प्रश्न 2: ग्लाव झील को रामसर स्थल क्यों घोषित किया गया?
उत्तर: इसके समृद्ध जैव विविधता हॉटस्पॉट होने, 150+ वृक्षों व 49+ ऑर्किड प्रजातियों की उपस्थिति तथा गंभीर रूप से लुप्तप्राय जीवों के आवास होने के कारण इसे यह वैश्विक दर्जा मिला.
प्रश्न 3: रामसर स्थल क्या होता है?
उत्तर: रामसर कन्वेंशन (Ramsar Convention) के तहत अंतरराष्ट्रीय महत्व की उन आर्द्रभूमियों (Wetlands of International Importance) को रामसर स्थल के रूप में सूचीबद्ध किया जाता है, जो वैश्विक जैव विविधता और मानव अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण हैं.
प्रश्न 4: भारत में अब कुल कितने रामसर स्थल हैं?
उत्तर: 3 अगस्त 2026 को अरुणाचल प्रदेश की ग्लाव झील के शामिल होने के बाद भारत में रामसर स्थलों की कुल संख्या 101 हो गई है.
प्रश्न 5: ग्लाव झील का पारिस्थितिक महत्व क्या है?
उत्तर: यह पर्यावरण सुरक्षा (Water Security) सुनिश्चित करती है, गंभीर रूप से लुप्तप्राय सफेद पेट वाले बगुले का घर है और बाघ व हिम तेंदुए जैसी 4 बड़ी बिल्ली प्रजातियों के सह-अस्तित्व का समर्थन करती है.
प्रश्न 6: रामसर कन्वेंशन क्या है?
उत्तर: आर्द्रभूमि संरक्षण के लिए यह एक अंतर-सरकारी अंतरराष्ट्रीय संधि (International Environmental Treaty) है, जिस पर 2 फरवरी 1971 को ईरान के रामसर शहर में हस्ताक्षर किए गए थे. भारत इसमें 1982 में शामिल हुआ था.
