Global Mind Health Report 2025
संदर्भ:
हाल ही में सैपियन लैब्स द्वारा ‘ग्लोबल माइंड हेल्थ रिपोर्ट 2025’ जारी किया गया। जिसमें 84 देशों के सर्वेक्षण में भारतीय युवाओं को 60वां स्थान प्राप्त हुआ है, जो भारत की भविष्य की कार्यबल उत्पादकता और सामाजिक स्थिरता के लिए एक चेतावनी है।
ग्लोबल माइंड हेल्थ रिपोर्ट 2025 के मुख्य बिंदु:
- MHQ: रिपोर्ट में ‘मेंटल हेल्थ कोटिएंट’ (MHQ) का उपयोग किया गया है, जिसमें 47 विभिन्न संज्ञानात्मक, भावनात्मक और सामाजिक संकेतकों को मापा गया है।
- युवाओं का स्कोर: भारत के 18-34 आयु वर्ग के युवाओं का औसत MHQ स्कोर मात्र 33 रहा, जो “तनावपूर्ण या संघर्षपूर्ण” (Distressed or Struggling) श्रेणी में आता है।
- पीढ़ीगत अंतराल (Generational Gap): इसके विपरीत, 55 वर्ष से अधिक आयु के भारतीयों का स्कोर 96 दर्ज किया गया, जो सामान्य मानसिक स्वास्थ्य मानकों के निकट है।
- वैश्विक तुलना: तंजानिया, नाइजीरिया और घाना जैसे देश शीर्ष पर रहे, जबकि जापान, ब्रिटेन और भारत जैसे देश निचले पायदान पर हैं। यह सिद्ध करता है कि आर्थिक समृद्धि का अर्थ अनिवार्य रूप से बेहतर मानसिक स्वास्थ्य नहीं है।
- मुख्य कारक: रिपोर्ट ने युवाओं में इस गिरावट के लिए चार प्रमुख “विघटनकारी कारकों” की पहचान की है:
- जल्द स्मार्टफोन का उपयोग: भारत में स्मार्टफोन प्राप्त करने की औसत आयु 16.5 वर्ष है। 13 वर्ष से कम आयु में स्मार्टफोन के संपर्क में आने से वयस्कता में भावनात्मक नियंत्रण और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता में कमी आती है।
- अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड (UPF): भारतीय युवाओं का 44% हिस्सा नियमित रूप से पैकेट बंद और जंक फूड का सेवन करता है, जो सीधे तौर पर संज्ञानात्मक गिरावट से जुड़ा है।
- पारिवारिक संबंधों में कमी: भारत में केवल 64% युवा अपने परिवार के करीब महसूस करते हैं, जबकि बुजुर्गों में यह आंकड़ा 78% है। सामाजिक अलगाव मानसिक लचीलेपन को कमजोर कर रहा है।
- आध्यात्मिकता का अभाव: जीवन के प्रति एक उच्च उद्देश्य या अर्थ की कमी भी युवाओं के गिरते MHQ का एक कारण मानी गई है।
चुनौतियां:
- आर्थिक प्रभाव: MHQ सीधे उत्पादकता से जुड़ा है। निम्न मानसिक स्वास्थ्य का अर्थ है कार्यबल की कार्यक्षमता में कमी, जो Viksit Bharat @2047 के लक्ष्य में बाधा बन सकता है।
- सामाजिक अस्थिरता: रिपोर्ट के अनुसार, ‘सोशल सेल्फ’ (Social Self) सूचकांक में गिरावट का सीधा संबंध हिंसक अपराधों में वृद्धि से हो सकता है।
- पेशेवरों की कमी: भारत में प्रति 1 लाख लोगों पर विशेषज्ञों की संख्या WHO मानक (3 प्रति लाख) से काफी कम (लगभग 0.75) है।
नीतिगत हस्तक्षेप:
- Tele-MANAS: Tele-MANAS के माध्यम से 24/7 मुफ्त मानसिक परामर्श सेवा प्रदान की जा रही है।
- National Suicide Prevention Strategy (NSPS): 2030 तक आत्महत्या दर में 10% की कमी लाने का लक्ष्य।
- मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017: इसके तहत मानसिक स्वास्थ्य को एक कानूनी अधिकार के रूप में मान्यता दी गई है।

