Golestan Palace
संदर्भ:
हाल ही में मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्षों और तेहरान के अरग स्क्वायर के पास हुए हवाई हमलों के कारण गोलेस्तान पैलेस को नुकसान पहुँचा है। हमलों के शॉकवेव्स से महल के प्रसिद्ध हॉल और बाहरी दीवारों के कांच व सजावट क्षतिग्रस्त हुए हैं।
गोलेस्तान पैलेस (Golestan Palace) के बारे में:
- परिचय: गोलेस्तान पैलेस, जिसे “गुलाबों का महल” भी कहा जाता है, ईरान की राजधानी तेहरान की सबसे पुरानी ऐतिहासिक इमारतों में से एक है।
- स्थापना: इसकी नींव 16वीं शताब्दी में सफवीद राजवंश (Safavid Dynasty) के शाह तहमास्प प्रथम के शासनकाल में रखी गई थी।
- विकास: 18वीं शताब्दी में ज़ंद राजवंश के करीम खान ने इसका पुनरुद्धार कराया, लेकिन इसका वास्तविक विस्तार काजार राजवंश (Qajar Dynasty) के दौरान हुआ।
- राजधानी: जब 1794 में काजार शासकों ने तेहरान को अपनी राजधानी बनाया, तब यह महल उनका आधिकारिक शाही निवास और सत्ता का केंद्र बन गया।
- पहलवी काल: 1925 से 1979 के बीच यहाँ रज़ा शाह और मोहम्मद रज़ा शाह जैसे शासकों के राज्याभिषेक संपन्न हुए।
- यूनेस्को मान्यता: इसकी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्ता के कारण इसे 2013 में UNESCO World Heritage Site घोषित किया गया।
- संरक्षण: यह ‘1954 हेग कन्वेंशन’ के तहत संरक्षित है, जो युद्ध के दौरान सांस्कृतिक संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
वास्तुकला की मुख्य विशेषताएँ:
- शम्स-ओल-एमारेह (Shams-ol-Emareh): ‘सूर्य का भवन’ के नाम से प्रसिद्ध यह इमारत अपने समय में तेहरान की सबसे ऊँची संरचना थी, जो यूरोपीय स्थापत्य से प्रभावित है।
- तख्त-ए-मर्मर (Marble Throne): पीले संगमरमर से बना यह भव्य सिंहासन फारसी मूर्तिकला और वास्तुकला का बेजोड़ नमूना है।
- तालार-ए-आयनेह (Mirror Hall): यह अपने जटिल कांच और दर्पण के काम (Aina-kari) के लिए प्रसिद्ध है, जो शाही भव्यता को दर्शाता है।
- पर्शियन गार्डन: महल के चारों ओर बने बाग पारंपरिक ‘चारबाग’ शैली और आधुनिक परिदृश्य का मिश्रण हैं।
भारत से ऐतिहासिक संबंध:
गोलेस्तान पैलेस का भारत के साथ एक गहरा ऐतिहासिक जुड़ाव है। मुगल सम्राट शाहजहाँ द्वारा बनवाया गया विश्व प्रसिद्ध ‘मयूर सिंहासन’, जिसे 1739 में नादिर शाह दिल्ली से लूटकर फारस ले गया था, एक समय इसी महल के ‘सलाम हॉल’ (Salam Hall) में रखा गया था। बाद में इसे इसके रत्नों के लिए संभवतः खंडित कर दिया गया।

