Government greenhouse gas emission intensity targets for carbon-intensive industrial units
संदर्भ:
हाल ही में भारत सरकार ने कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 208 अतिरिक्त कार्बन-गहन (carbon-intensive) औद्योगिक इकाइयों के लिए ‘ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन तीव्रता’ (Greenhouse Gas Emission Intensity – GEI) लक्ष्य अधिसूचित किए हैं।
अधिसूचना के मुख्य बिंदु:
- नए क्षेत्र शामिल: इस विस्तार के साथ अब पेट्रोलियम रिफाइनरी, पेट्रोकेमिकल्स, टेक्सटाइल्स (कपड़ा उद्योग) और सेकेंडरी एल्युमीनियम क्षेत्रों को भी अनिवार्य अनुपालन तंत्र (Compliance Mechanism) के दायरे में लाया गया है।
- इकाइयों की संख्या: नवीनतम अधिसूचना में 208 नई औद्योगिक इकाइयों को “बाध्य संस्थाओं” (Obligated Entities) के रूप में नामित किया गया है।
- कुल कवरेज: इससे पहले अक्टूबर 2025 में एल्युमीनियम, सीमेंट, क्लोर-अल्कली और पल्प एंड पेपर क्षेत्रों की 282 इकाइयों के लिए लक्ष्य तय किए गए थे। अब भारतीय कार्बन बाजार के तहत कुल 490 इकाइयां कवर हो चुकी हैं।
- कमी का लक्ष्य: इन नई इकाइयों के लिए 2023-24 को आधार वर्ष (Baseline Year) माना गया है। इन्हें 2026-27 तक अपने उत्सर्जन तीव्रता में 3% से 7% तक की कमी लाने का लक्ष्य दिया गया है।
- CCTS: यह अधिसूचना कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS), 2023 के तहत जारी की गई है, जो भारत के घरेलू कार्बन बाजार (Indian Carbon Market – ICM) को और अधिक सशक्त और व्यापक बनाती है।
महत्व:
- NDC के साथ जुड़ाव: यह कदम भारत के अपडेटेड NDC लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसके तहत भारत ने 2030 तक अपनी GDP की उत्सर्जन तीव्रता को 2005 के स्तर से 45% कम करने का संकल्प लिया है।
- वैश्विक संदर्भ: यूरोपीय संघ के CBAM जैसे सीमा करों से बचने के लिए भारत का अपना घरेलू कार्बन बाजार होना महत्वपूर्ण है। यह भारतीय निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाए रखने में मदद करेगा।
कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS):
- कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) जलवायु परिवर्तन से लड़ने और ‘नेट जीरो 2070’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा लाई गई एक महत्वपूर्ण योजना है।
- CCTS को ऊर्जा संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2022 के तहत वैधानिक शक्ति प्रदान की गई है। इसे औपचारिक रूप से जून 2023 में अधिसूचित किया गया था।
- CCTS का मुख्य उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन को कम करने के लिए एक बाजार-आधारित तंत्र विकसित करना है।
- यह योजना ‘कैप एंड ट्रेड’ (Cap and Trade) मॉडल के एक उन्नत संस्करण पर आधारित है, जिसे भारत में ‘उत्सर्जन तीव्रता लक्ष्य’ के रूप में लागू किया गया है:
- लक्ष्य निर्धारण: सरकार प्रत्येक ‘बाध्य इकाई’ (Obligated Entity) के लिए उत्पादन की प्रति इकाई उत्सर्जन (Greenhouse Gas Emission Intensity) का लक्ष्य निर्धारित करती है।
- कार्बन क्रेडिट सर्टिफिकेट (CCC): यदि कोई कंपनी अपने निर्धारित लक्ष्य से कम उत्सर्जन करती है, तो उसे ‘कार्बन क्रेडिट सर्टिफिकेट’ दिए जाते हैं। 1 सर्टिफिकेट = 1 टन CO2 समकक्ष (tCO2e) की बचत।
- ट्रेडिंग: जो कंपनियां अपने लक्ष्यों को पूरा नहीं कर पातीं, उन्हें दंड से बचने के लिए बाजार से CCC खरीदने होते हैं।
- हितधारक:
- प्रशासक (BEE): ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (Bureau of Energy Efficiency) इस योजना का मुख्य नियामक है। यह लक्ष्य तय करता है और निगरानी करता है।
- रजिस्ट्रार (Grid-India): ग्रिड कंट्रोलर ऑफ इंडिया लिमिटेड कार्बन क्रेडिट का डेटाबेस रखता है।
- नियामक (CERC): केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) ट्रेडिंग गतिविधियों और एक्सचेंजों का नियमन करता है।

