Government lifts restrictions on import of metallurgical coke

संदर्भ:
भारत सरकार ने हाल ही में कम राख वाले मेटालर्जिकल कोक (low ash metallurgical coke) के आयात पर लगे प्रतिबंधों को हटाकर इसे ‘मुक्त’ (free) श्रेणी में रखने का निर्णय किया है। यह कदम इस्पात उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव है, जिसका उद्देश्य कच्चे माल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
मेटालर्जिकल कोक क्या है?
- मेटालर्जिकल कोक (मेट कोक) एक उच्च-कार्बन, कम-अशुद्धता वाला ईंधन है।
- इसे कोकिंग कोल को हवा की अनुपस्थिति में गर्म करके (विनाशकारी आसवन) प्राप्त किया जाता है।
- यह लौह अयस्क को पिघले हुए लोहे में बदलने वाली वात्या भट्टी (blast furnace) प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण ईंधन और अपचायक एजेंट के रूप में काम करता है।
- कम राख (18% से कम) और अल्ट्रा-लो फास्फोरस वाले इसके वेरिएंट उच्च-श्रेणी के इस्पात निर्माण के लिए आवश्यक हैं।
मेटालर्जिकल कोक संबंधी नीतिगत बदलाव:
- विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने कम राख वाले मेट कोक पर आयात प्रतिबंधों को 1 जनवरी से 30 जून, 2026 तक बढ़ा दिया था।
- हाल ही में वित्त मंत्रालय द्वारा मेट कोक पर अनंतिम एंटी-डंपिंग ड्यूटी (USD 60.87 से USD 130.66 प्रति टन) लगाने को मंजूरी देने के बाद, DGFT ने 3 जनवरी, 2026 को एक अधिसूचना के माध्यम से आयात नीति को ‘प्रतिबंधित’ से बदलकर ‘मुक्त’ कर दिया।
नीति परिवर्तन का कारण:
- एंटी-डंपिंग ड्यूटी: प्रतिबंध हटाने का मुख्य कारण एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाना है। यह एक व्यापार उपचारात्मक उपाय है जो विदेशी आपूर्तिकर्ताओं को अनुचित रूप से कम कीमतों पर भारत में उत्पाद बेचने से रोकता है।
- घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करना: भारत में मध्यम-गुणवत्ता वाले कोकिंग कोल के विशाल भंडार होने के बावजूद, देश अपनी कोकिंग कोल की लगभग 85% आवश्यकता आयात से पूरी करता है क्योंकि अधिकांश घरेलू कोयला धातुकर्म उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं है।
- उद्योग की मांग: पिछले प्रतिबंधों के कारण घरेलू इस्पात निर्माताओं को कच्चे माल की कमी का सामना करना पड़ रहा था, जिससे उत्पादन लागत बढ़ रही थी और उत्पादन में व्यवधान का जोखिम था।
इसका प्रभाव:
- उत्पादन लागत: मेट कोक इस्पात उत्पादन लागत का लगभग 35-40% हिस्सा है। मुक्त आयात से लागत में स्थिरता आने की उम्मीद है।
- प्रतिस्पर्धात्मकता: कम और स्थिर लागत से भारतीय इस्पात उद्योग की घरेलू और निर्यात दोनों बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
- सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs): द्वितीयक इस्पात, फाउंड्री और फेरो-मिश्र धातु क्षेत्र में MSMEs, जो अक्सर आपूर्ति झटकों से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं, इस कदम से लाभान्वित होंगे।
- आर्थिक विकास: इस्पात जैसे प्रमुख उद्योग के लिए सुनिश्चित इनपुट आपूर्ति, ऑटोमोबाइल और बुनियादी ढांचे जैसे अन्य उद्योगों में विकास को बढ़ावा देगी।
