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भारत में मछली उत्पादन की वृद्धि (Growth of fish production in India) | UPSC

Growth of fish production in India

Growth of fish production in India

संदर्भ:

भारत अब वैश्विक मत्स्य उत्पादन में चीन के बाद दूसरा स्थान प्राप्त कर चुका है। यह जानकारी केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री द्वारा हाल ही में दी गई। यह उपलब्धि भारत की सतत मत्स्य नीति, समुद्री संसाधनों के प्रभावी उपयोग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मत्स्य क्षेत्र के योगदान को दर्शाती है।

(Growth of fish production in India) भारत में मछली उत्पादन की वृद्धि के मुख्य बिंदु:

लंबी अवधि की प्रगति (Steady Growth Over the Decade):

  • भारत में मछली उत्पादन वर्ष 2024–25 में 103% बढ़ गया है, जो कि 2013–14 के स्तर की तुलना में दोगुने से भी अधिक है।
  • यह वृद्धि देश में मत्स्य पालन के क्षेत्र में व्यापक विकास को दर्शाती है।

वृद्धि में सहायक योजनाएँ (Schemes Driving the Growth):

  • प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PM Matsya Sampada Yojana):
    इस योजना ने मत्स्य पालन के बुनियादी ढांचे, उत्पादन क्षमता और विपणन को सशक्त किया है।
  • किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत मत्स्य पालन के लिए ऋण सुविधा (Credit Facility for Fisheries under KCC):
    इस सुविधा से मछली पालकों को आसान और सस्ता ऋण प्राप्त हुआ, जिससे उत्पादन और निवेश में बढ़ोतरी हुई।

भारत में मत्स्य क्षेत्र की संरचना:

संविधान में स्थिति:

  • मत्स्य पालन (Fisheries)भारतीय संविधान की राज्य सूची (State List) में शामिल है।
  • हालांकि, केंद्र सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशोंके प्रयासों में सहायता प्रदान करती है ताकि मत्स्य क्षेत्र का समुचित विकास सुनिश्चित किया जा सके।

अंतर्देशीय बनाम समुद्री क्षेत्र (Inland vs Marine Sector):

  • अंतर्देशीय मत्स्य क्षेत्रपूरी तरह से राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आता है।
  • समुद्री मत्स्य क्षेत्रकी जिम्मेदारी केंद्र और तटीय राज्य सरकारों के बीच साझा होती है।

उत्पादन में योगदान:

  • भारत की कुल मछली उत्पादन मेंलगभग 75% योगदान अंतर्देशीय मत्स्य क्षेत्र का होता है।
  • यह दर्शाता है कि नदियाँ, झीलें और तालाब जैसे स्रोत उत्पादन में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में भागीदारी (Economic Contribution):

  • मत्स्य क्षेत्र भारत केकुल राष्ट्रीय सकल मूल्य वर्धन (GVA) का लगभग 12% योगदान देता है।
  • यहकृषि क्षेत्र के कुल GVA में 26% हिस्सेदारी रखता है, जो कृषि के भीतर इसकी महत्ता को दर्शाता है।

रोजगार और जनभागीदारी: मत्स्य उत्पादन और इससे जुड़े मूल्य श्रृंखला (value chain) में लगभग 3 करोड़ (30 million) लोग प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से संलग्न हैं।

वित्तीय समर्थन: केंद्रीय बजट 2025–26 में मत्स्य क्षेत्र के लिए अब तक का सबसे अधिक वार्षिक बजटीय सहयोग प्रस्तावित किया गया है।

मत्स्य पालन क्षेत्र की चुनौतियाँ:

  • पर्यावरणीय:अत्यधिक मछली पकड़ना, आवास विनाश, जलवायु परिवर्तन
  • आर्थिक:बाजार में उतार-चढ़ाव, IUU मछली पकड़ना, सीमित पहुंच
  • सामाजिक:खाद्य सुरक्षा, लैंगिक असमानता, समुदायों का विस्थापन
  • अन्य:बुनियादी ढाँचे की कमी, संसाधन प्रबंधन की समस्याएँ, आधुनिक तकनीकों की कमी

सरकार द्वारा मत्स्य क्षेत्र में उठाए गए कदम:

  • प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना (PMMSY)
  • प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सहयोजना (PMMSY के अंतर्गत एक केंद्रीय उप-योजना)
  • PMMSY के तहत जलीय कृषि (Aquaculture) पार्कों की स्थापना
  • नीली क्रांति योजना व मत्स्य और जलीय कृषि अवसंरचना विकास निधि (FIDF)
  • पाँचवी समुद्री मत्स्य गणना (नीति निर्माण हेतु डेटा एकत्र)
  • IUU फिशिंग पर रोक हेतु भारत का क्षेत्रीय कार्ययोजना (RPOA-IUU) को समर्थन
  • श्रीलंका, बांग्लादेश और मालदीव के साथ सहयोग में बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में अवैध, अपंजीकृत व अनियमित मछली पकड़ने पर रोक

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