ISRO का GSAT-7B Satellite, 2028 के मध्य में लॉन्च की है योजना
संदर्भ:
हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने भारतीय सेना के पहले समर्पित सैन्य संचार उपग्रह जीसैट-7बी (GSAT-7B Satellite) के प्रक्षेपण को तकनीकी मूल्यांकनों के कारण पुनर्निर्धारित करते हुए 2028 के मध्य (Mid-2028) में लॉन्च करने का लक्ष्य रखा।
जीसैट-7बी उपग्रह के बारे में:
- परिचय: GSAT-7B Satellite, भारतीय सेना का पहला समर्पित संचार उपग्रह (Indian Army Communication Satellite) है, जिसे भारत की नेटवर्क-केंद्रित युद्ध क्षमताओं (Network-Centric Warfare Capabilities) को सुदृढ़ करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- अभी तक भारतीय सेना अंतरिक्ष-आधारित संचार के लिए मुख्य रूप से भारतीय वायुसेना के उपग्रह जीसैट-7 पर निर्भर रही है।
- अनुबंध: मार्च 2023 में रक्षा मंत्रालय (MoD) ने इसके स्वदेशी डिज़ाइन, विकास और निर्माण के लिए NewSpace India Limited (NSIL) के साथ अनुबंध किया था।
- वित्तीय परिव्यय: इस महत्वाकांक्षी परियोजना की कुल लागत लगभग ₹2,963 करोड़ (लगभग ₹3,000 करोड़) है।
- देरी: उपग्रह का प्रक्षेपण मूल रूप से नवंबर 2027 के लिए निर्धारित था, लेकिन हालिया तकनीकी मूल्यांकनों (Technical Evaluations) के कारण इसे लगभग छह महीने आगे बढ़ाकर 2028 के मध्य में निर्धारित किया गया।
- विशेषताएं (GSAT-7B Satellite Features):
- वजन: यह 5 टन (5,000 किलोग्राम) वजनी उपग्रह होगा, जो इसे भारत का अब तक का सबसे भारी संचार उपग्रह (Heaviest Communication Satellite) बनाएगा।
- कक्षा (Orbit): इसे पृथ्वी से लगभग 35,786 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित भूस्थिर कक्षा (Geostationary Orbit) में स्थापित किया जाएगा।
- दृष्टि रेखा से परे संचार (Beyond-Line-of-Sight – BLOS): यह सुदूर सीमावर्ती क्षेत्रों और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में तैनात सैनिकों को चौबीसों घंटे सुरक्षित कनेक्टिविटी और मिशन-क्रिटिकल बीएलओएस संचार की सुविधा प्रदान करेगा।
- एंटी-जैमिंग तकनीक: इसमें उन्नत सैन्य-ग्रेड एन्क्रिप्शन और इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटरमेजर (ECCM) तकनीक होगी, जो दुश्मन के जैमिंग प्रयासों को विफल कर देगी।
तुलनात्मक विश्लेषण: जीसैट-7 बनाम जीसैट-7बी (GSAT-7 vs GSAT-7B)
| मानदंड (Parameters) | जीसैट-7 / जीसैट-7आर (GSAT-7 / GSAT-7R) | जीसैट-7बी (GSAT-7B) |
| समर्पित बल (Dedicated Force) | भारतीय नौसेना (रुक्मिणी) | भारतीय सेना (थल सेना) |
| प्रक्षेपण वर्ष (Launch Year) | 2013 (GSAT-7) / नवंबर 2025 (GSAT-7R) | 2028 के मध्य में (प्रस्तावित) |
| वजन वर्ग (Weight Category) | लगभग 2.6 टन | 5 टन (भारत का सबसे भारी संचार उपग्रह) |
| प्राथमिक अनुप्रयोग (Primary Application) | युद्धपोतों, पनडुब्बियों और समुद्री केंद्रों के बीच संचार | सीमावर्ती सैनिकों, हथियार प्रणालियों और बख्तरबंद संरचनाओं का एकीकरण |
भारत के रक्षा अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए महत्व:
- वायुसेना पर निर्भरता की समाप्ति: वर्तमान में सेना वायुसेना के जीसैट-7ए उपग्रह पर आंशिक निर्भर है। जीसैट-7बी (GSAT-7B Satellite Launch 2028) के आने से थल सेना को पूर्ण परिचालन स्वायत्तता (Operational Autonomy) प्राप्त होगी।
- रणनीतिक युद्धक्षेत्र नियंत्रण: यह उपग्रह आधुनिक युद्ध प्रणालियों, जैसे कि ड्रोन (UAVs), वायुसैनिक प्लेटफॉर्मों, और गाइडेड मिसाइल प्रणालियों को एक एकीकृत नेटवर्क-वारफेयर ग्रिड से जोड़ेगा।
- पारंपरिक संचार प्रणालियों की विफलता में बैकअप: युद्ध या संघर्ष की स्थिति में जब दुश्मन द्वारा स्थलीय नेटवर्क (Terrestrial Networks) को नष्ट या बाधित कर दिया जाता है, तब अंतरिक्ष-आधारित यह लचीली प्रणाली सेना के संचार बैकबोन को जीवित रखेगी।
- व्यापक रक्षा नेटवर्क का विस्तार: यह परियोजना भारत की व्यापक सैन्य अंतरिक्ष रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत भारतीय वायुसेना के लिए ₹2,563 करोड़ की लागत से जीसैट-7सी (GSAT-7C) विकसित किया जा रहा है और स्पेस बेस्ड सर्विलांस (SBS) मिशन के तहत 52 नए उपग्रह तैनात करने की योजना है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: GSAT-7B Satellite क्या है और इसका मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: यह इसरो (ISRO) द्वारा विकसित किया जा रहा भारतीय सेना का पहला समर्पित सैन्य संचार उपग्रह है, जिसका उद्देश्य सीमा पर सुरक्षित और रीयल-टाइम कनेक्टिविटी प्रदान करना है।
प्रश्न 2: ISRO GSAT-7B को कब लॉन्च करने की योजना है?
उत्तर: आवश्यक तकनीकी मूल्यांकनों के कारण छह महीने की देरी के बाद, अब इसे 2028 के मध्य (Mid-2028) में अंतरिक्ष में लॉन्च करने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रश्न 3: GSAT-7B Satellite भारतीय सेना के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: यह दुर्गम सीमाओं पर तैनात सैनिकों, मिसाइल प्रणालियों और वायुसैनिक प्लेटफॉर्मों के बीच बिना किसी रुकावट के दृष्टि रेखा से परे सुरक्षित संचार (Beyond-Line-of-Sight Communication) सक्षम बनाएगा।
प्रश्न 4: GSAT-7B Satellite की प्रमुख विशेषताएं क्या हैं?
उत्तर: यह 5 टन वजनी भारत का सबसे भारी भूस्थिर संचार उपग्रह होगा, जो पूर्णतः स्वदेशी एन्क्रिप्शन और अत्याधुनिक एंटी-जैमिंग सुरक्षा तकनीकों से लैस होगा।
प्रश्न 5: GSAT-7 और GSAT-7B Satellite में क्या अंतर है?
उत्तर: जीसैट-7 (और इसका रिप्लेसमेंट 7R) भारतीय नौसेना के समुद्री ऑपरेशन्स के लिए समर्पित है, जबकि जीसैट-7बी विशेष रूप से भारतीय थल सेना की रणनीतिक आवश्यकताओं के लिए बनाया जा रहा है।
प्रश्न 6: Indian Military Communication Satellite से सेना को क्या फायदे मिलेंगे?
उत्तर: इससे सेना को नेटवर्क-केंद्रित युद्ध में बढ़त मिलेगी, विदेशी प्रणालियों (जैसे जीपीएस) पर निर्भरता खत्म होगी और युद्ध काल में सुरक्षित डेटा ट्रांसमिशन सुनिश्चित होगा।
