Haati Tribe
Haati Tribe –
संदर्भ:
हिमाचल प्रदेश में हाल ही में सामने आई एक बहुपति विवाह (Polyandrous Marriage) की घटना ने एक बार फिर हाटी जनजाति की पारंपरिक प्रथाओं और सामाजिक रीति-रिवाजों को चर्चा में ला दिया है।
हाटी जनजाति के बारे में:
स्थान (Location)
- यह जनजाति मूलतः हिमाचल प्रदेश के ट्रांस–गिरी क्षेत्र और उत्तराखंड के जौनसार–बावर क्षेत्र में निवास करती है।
नदी क्षेत्र (Rivers)
- इनकी बस्तियाँ गिरी और टोंस नदियों के आसपास हैं, जो यमुना नदी की सहायक नदियाँ हैं।
नाम की उत्पत्ति (Etymology): “हाटी” शब्द की उत्पत्ति “हाट” से हुई है, जो परंपरागत गाँव के बाज़ार को दर्शाता है।
जनसंख्या:
- 2011 में इनकी जनसंख्या लगभग 2.5 लाख थी; वर्तमान में अनुमानित 3 लाख के करीब है।
सामाजिक और सांस्कृतिक संरचना:
पारंपरिक शासन व्यवस्था (Traditional Governance)
- “खुम्बली” नामक जनजातीय परिषद (tribal council) विवादों का समाधान और महत्वपूर्ण निर्णय लेती है।
सामाजिक वर्गीकरण (Social Structure)
- समाज दो भागों में विभाजित है:
- ऊँची जातियाँ: भाट, खश (Bhat, Khash)
- निचली जातियाँ: बधोईस (Badhois)
जीविकोपार्जन (Livelihood)
- इनकी मुख्य आजीविका कृषि पर निर्भर है।
- साथ ही, ईको–टूरिज्म (eco-tourism) से भी मौसमी आय होती है।
विकास से पिछड़ापन: भौगोलिक अलगाव (geographical isolation) के कारण ये शैक्षणिक और सामाजिक रूप से पिछड़े रहे हैं।
अनुसूचित जनजाति का दर्जा (Scheduled Tribe Status)
- जौनसार–बावर (उत्तराखंड) को 1967 में अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिला।
- ट्रांस–गिरी क्षेत्र (हिमाचल प्रदेश) को यह दर्जा 2023–24 में प्रदान किया गया।
बहुपत्नीवाद और बहुपति–विवाह की कानूनी स्थिति:
कानूनी निषेध (Prohibition):
- हिंदू विवाह अधिनियम, 1955, विशेष विवाह अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita) के तहत बहुपत्नीवाद और बहुपति-विवाह प्रतिबंधित हैं।
अनुसूचित जनजातियों को छूट (Exemption for Scheduled Tribes):
- ये कानून स्वतः अनुसूचित जनजातियों पर लागू नहीं होते, जब तक कि केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित न किया जाए।
संवैधानिक प्रावधान:
- अनुच्छेद 342 अनुसूचित जनजातियों को विशिष्ट कानूनी मान्यता प्रदान करता है।
कानूनी छूट की धारा:
- हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 2(2) कहती है कि जब तक केंद्र सरकार अधिसूचना जारी न करे, तब तक यह अधिनियम अनुसूचित जनजातियों पर लागू नहीं होगा।
परंपरा की मान्यता (Definition of Custom):
- किसी परंपरा को तभी मान्यता मिलती है जब वह:
- दीर्घकालीन (long-standing),
- उचित (reasonable),
- और सार्वजनिक नीति के विरुद्ध न हो।
न्यायालयीन मान्यता:
- परंपरागत कानूनों को मान्यता देने के लिए न्यायालयों को स्पष्ट प्रमाण (clear evidence) की आवश्यकता होती है।
समान नागरिक संहिता (UCC), उत्तराखंड – 2024:
- अनुसूचित जनजातियों को स्पष्ट रूप से UCC से बाहर रखा गया है।
UCC नियमावली – 2025:
- यह पुष्टि करती है कि संविधान के भाग XXI के तहत संरक्षित समूहों पर UCC लागू नहीं होगा।