Hatti Risala Festival
संदर्भ:
महाराष्ट्र के जालना जिले में मनाया जाने वाला ‘हत्ती रिसाला’ (Hatti Risala) उत्सव एक अद्वितीय सांस्कृतिक धरोहर है, जिसने मार्च 2026 में अपने गौरवशाली 138 वर्ष पूरे किए।
- अर्थ: ‘हत्ती रिसाला’ का शाब्दिक अर्थ ‘हाथियों का दस्ता’ होता है। यह परंपरा मुख्य रूप से जालना शहर से जुड़ी है।
- तिथि: यह प्रतिवर्ष धुलिवंदन (होली के अगले दिन) के अवसर पर आयोजित किया जाता है।
- इतिहास: जालना हैदराबाद के निजाम के अधीन एक महत्वपूर्ण सैन्य केंद्र था। निजाम काल के दौरान, शाही हाथियों के जुलूस निकालने की परंपरा थी, जो कालांतर में स्थानीय संस्कृति में घुल-मिल गई और एक जन-उत्सव का रूप ले लिया।
- महत्व: यह स्थानीय पहचान का अभिन्न अंग है और क्षेत्र की ऐतिहासिक सैन्य भव्यता को प्रदर्शित करता है।
- विशेषताएं:
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- प्रतीकात्मक जुलूस: उत्सव का मुख्य आकर्षण एक सुसज्जित हाथी होता है, जिस पर प्रतीकात्मक राजा और उनके प्रधान मंत्री सवार होते हैं।
- रेवड़ी वितरण: जुलूस के दौरान हाथी पर सवार पात्र भीड़ पर ‘रेवड़ी’ (एक प्रकार की मिठाई) बरसाते हैं, जिसे प्रसाद और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।
- सांप्रदायिक सद्भाव: इस उत्सव में सभी धर्मों के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं, जो भारतीय समाज की ‘विविधता में एकता’ को दर्शाता है।
- सम्मान की अनूठी परंपरा: स्थानीय मान्यता के अनुसार, जब यह जुलूस शहर की मुख्य सड़कों से गुजरता है, तो मार्ग में रहने वाले लोग सम्मान स्वरूप रंगों से खेलना बंद कर देते हैं।
निजाम काल:
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