Hexagon of Alliances

संदर्भ:
हाल ही में इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने पश्चिम एशिया में सुरक्षा, कूटनीति और आर्थिक सहयोग के लिए हेक्सागन ऑफ अलायंसेज का प्रस्ताव रखा।
हेक्सागन ऑफ अलायंसेज क्या हैं?
“हेक्सागन ऑफ अलायंसेज” छह देशों या रणनीतिक स्तंभों का एक बहुपक्षीय सुरक्षा और आर्थिक ढांचा है। यह इजराइल द्वारा प्रस्तावित है, जिसमें देश पारंपरिक द्विपक्षीय संबंधों से आगे बढ़कर, समान विचारधारा वाले लोकतांत्रिक और प्रगतिशील राष्ट्रों का एक ‘मिनेटिरल’ समूह बनाने पर फोकस करेंगे।
उद्देश्य:
- रेडिकल धुरी का मुकाबला: ईरान समर्थित “एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस” (हिजबुल्लाह, हूती, हमास) के बढ़ते प्रभाव को नियंत्रित करना।
- रणनीतिक सुरक्षा: लाल सागर और पूर्वी भूमध्य सागर में समुद्री व्यापारिक मार्गों (SLOCs) की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
- कनेक्टिविटी: चीन के ‘बीआरआई’ (BRI) के विकल्प के रूप में भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) को एक सुरक्षा कवच प्रदान करना।
- तकनीकी सहयोग: सेमीकंडक्टर, एआई और रक्षा उत्पादन में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) का निर्माण।
सदस्य देश:
- इज़राइल: (तकनीकी और खुफिया केंद्र)
- भारत: (आर्थिक इंजन और इंडो-पैसिफिक एंकर)
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE): (वित्तीय और लॉजिस्टिक हब)
- ग्रीस: (यूरोप का प्रवेश द्वार)
- साइप्रस: (भूमध्य सागर में सामरिक बेस)
फोकस क्षेत्र:
- रक्षा और खुफिया (Defence & Intelligence): साझा खतरे के प्रति रीयल-टाइम डेटा साझा करना।
- ऊर्जा गलियारा (Energy Corridor): इज़राइल और साइप्रस के प्राकृतिक गैस क्षेत्रों को भारत और यूरोप से जोड़ना।
- खाद्य सुरक्षा (Food Security): भारत की कृषि क्षमता और इज़राइल की जल-प्रौद्योगिकी का अरब निवेश के साथ समन्वय (I2U2 की तर्ज पर)।
- साइबर सुरक्षा: महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को राज्य-प्रायोजित साइबर हमलों से बचाना।
भारत के लिए महत्व:
- पश्चिम की ओर विस्तार (Look West Policy): भारत अब केवल तेल और प्रवासी श्रमिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इस गठबंधन के माध्यम से एक सुरक्षा प्रदाता (Security Provider) की भूमिका में है।
- पाकिस्तान और तुर्की का मुकाबला: ग्रीस और साइप्रस के साथ भारत के बढ़ते संबंध तुर्की-पाकिस्तान के नापाक गठजोड़ को वैश्विक मंचों पर संतुलित करते हैं।
- मेक इन इंडिया: इज़राइली रक्षा कंपनियों के साथ संयुक्त उद्यम (Joint Ventures) भारत को रक्षा निर्यात का केंद्र बना सकते हैं।
