Himgiri
संदर्भ:
भारतीय नौसेना ने उन्नत गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट ‘हिमगिरी’ को प्राप्त किया है, जो युद्धपोत डिजाइन और निर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि को दर्शाता है।
Himgiri के बारे में जानकारी
परियोजना वर्गीकरण
- Himgiri, नilgiri-Class (Project 17A)के तहत बनने वाला तीसरा युद्धपोत है।
- यह अपनी श्रेणी का पहला युद्धपोत है जिसेGarden Reach Shipbuilders & Engineers (GRSE), कोलकाता द्वारा बनाया गया है।
- इसेWarship Design Bureau (WDB) ने डिज़ाइन किया है और Warship Overseeing Team (कोलकाता) इसकी निगरानी करती है।
डिज़ाइन और क्षमताएँ
मल्टी–मिशन प्लेटफॉर्म: यह युद्धपोत एंटी–एयर, एंटी–सर्फेस और एंटी–सबमरीन युद्ध के लिए तैयार है।
स्ट्राइक और डिफेंस सिस्टम
- BrahMos क्रूज़ मिसाइलें (जहाज-रोधी और ज़मीन पर हमला करने वाली) लगी हैं।
- Barak-8 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें (SAM) सुरक्षा देती हैं।
सर्विलांस और कॉम्बैट सिस्टम: इसमें AESA रडार और एडवांस्ड कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम लगे हुए हैं।
प्रणोदन प्रणाली: इसमें डीज़ल और गैस टरबाइन प्रणोदन प्रणाली का संयोजन है, जो इसे लचीलापन और गति प्रदान करता है।
क्रू क्षमता और एविएशन
- यह युद्धपोत 225 नौसैनिकों को समायोजित कर सकता है।
- इसमें फुल हेलिकॉप्टर ऑपरेशंस की सुविधा है।
महत्त्व और योगदान:
स्वदेशी योगदान: इस युद्धपोत का 75% निर्माण स्वदेशी सामग्री से हुआ है।
MSME की भागीदारी: परियोजना में 200 से अधिक MSMEs (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) को शामिल किया गया।
पुनर्जन्म: इसका नाम INS Himgiri (Leander-Class frigate) के नाम पर रखा गया है, जिसे 6 मई 2025 को 30 वर्षों की सेवा के बाद डिकमिशन किया गया।