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ICRIER की हीलिंग सोइल्स इन इंडिया रिपोर्ट (ICRIER Healing Soils in India Report) | Apni Pathshala

ICRIER Healing Soils in India Report

ICRIER Healing Soils in India Report

संदर्भ:

हाल ही में ICRIER (इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस) द्वारा ‘हीलिंग सोइल्स इन इंडिया: फॉर बेटर क्रॉप हेल्थ एंड ह्यूमन न्यूट्रिशन’ रिपोर्ट जारी की गई है।

रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष:

मृदा स्वास्थ्य की वर्तमान स्थिति:

      • पोषक तत्वों की कमी: रिपोर्ट के अनुसार, भारत की 95% से अधिक मिट्टी में नाइट्रोजन (N) की कमी है। केवल 40% मिट्टी में पर्याप्त फास्फोरस (P) और 32% में पर्याप्त पोटैशियम (K) पाया गया है।
      • मृदा जैविक कार्बन (SOC) का संकट: मिट्टी की उर्वरता का मुख्य सूचक SOC का स्तर चिंताजनक है। लगभग 80% भारतीय मिट्टी में जैविक कार्बन की कमी है, जो मिट्टी की जल धारण क्षमता और सूक्ष्मजीव गतिविधियों को सीधे प्रभावित करती है।
      • सूक्ष्म पोषक तत्वों का ह्रास: जिंक (Zn), आयरन (Fe) और बोरॉन (B) जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी लगातार बढ़ रही है, जिससे फसलों की पोषण गुणवत्ता गिर रही है। 

गिरावट के प्रमुख कारण:

  • असंतुलित उर्वरक उपयोग: यूरिया (नाइट्रोजन) पर अत्यधिक सब्सिडी (80% से अधिक) के कारण किसान इसका अधिक उपयोग करते हैं, जबकि P और K उर्वरकों का उपयोग कम होता है। इससे NPK का आदर्श अनुपात (4:2:1) बिगड़कर कई राज्यों में अत्यधिक असंतुलित हो गया है।
  • खेती की त्रुटिपूर्ण पद्धतियां: गहन जुताई, फसल अवशेषों को जलाना और मोनोक्रॉपिंग (एक ही फसल बार-बार उगाना) से मिट्टी की प्राकृतिक संरचना नष्ट हो रही है।
  • मृदा क्षरण: भारत प्रतिवर्ष लगभग 5.3 बिलियन टन ऊपरी उपजाऊ मिट्टी हवा और पानी के कटाव के कारण खो देता है।
  • मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव (Hidden Hunger): मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी का सीधा असर मानव स्वास्थ्य पर पड़ता है। उदाहरण के लिए, मिट्टी में जिंक की कमी बच्चों में ‘स्टंटिंग’ (बौनापन) और संज्ञानात्मक विकास में कमी का एक प्रमुख कारण है। इसे ‘हिडन हंगर’ या छिपी हुई भूख कहा जाता है।
  • सुधारात्मक सुझाव: रिपोर्ट में 3-P फ्रेमवर्क (Policy, Products, Practices) का सुझाव दिया गया है: 
  • Policy (नीति): उर्वरक सब्सिडी संरचना में सुधार ताकि संतुलित पोषक तत्व उपयोग (Balanced Nutrient Use) को बढ़ावा मिले।
  • Products (उत्पाद): नैनो-उर्वरक, बायो-उर्वरक और फसल-विशिष्ट उर्वरकों के अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर जोर।
  • Practices (पद्धतियां): 4R सिद्धांत (Right Time, Right Source, Right Rate, Right Place) को अपनाना और प्राकृतिक खेती (Natural Farming) को प्रोत्साहित करना।

सरकारी पहलें:

  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड (SHC) योजना: अब तक 25 करोड़ से अधिक कार्ड वितरित किए जा चुके हैं, जो किसानों को 12 मापदंडों पर मिट्टी की रिपोर्ट प्रदान करते हैं।
  • PM-PRANAM: रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने वाली योजना है। जिसमें किसानों को उर्वरकों की समझ और उनके उपयोग के बारे में समझाया जाता है।

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